लेखक श्रेय राजदेव ने युवाओं को भारतीय संस्कृति और राष्ट्रवाद से जुड़ने का दिया संदेश
सिलीगुड़ी । वीर सावरकर जयंती के अवसर पर नॉर्थ बंगाल यूनिवर्सिटी परिसर, सिलीगुड़ी में फिल्ममेकर एवं लेखक श्रेय राजदेव द्वारा लिखित पुस्तक “मैं हिंदू हूं: सफर स्वयंसेवक का” का भव्य विमोचन किया गया। कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े बुद्धिजीवियों, समाजसेवियों, शिक्षाविदों एवं गणमान्य लोगों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।
कार्यक्रम के दौरान वीर सावरकर के राष्ट्रवाद, सांस्कृतिक चेतना और देश के प्रति उनके योगदान को श्रद्धापूर्वक स्मरण किया गया। उपस्थित वक्ताओं ने कहा कि वीर सावरकर के विचार आज भी युवाओं को राष्ट्रहित और सामाजिक जागरूकता के लिए प्रेरित करते हैं।
कई गणमान्य अतिथि रहे मौजूद
कार्यक्रम में प्रमुख रूप से रत्नेश त्यागी, नरेंद्र प्रसाद, अमरेंद्र पांडेय, बिनायक सुंदास, नंद किशोर गोयल, अधिराज, अमित सहित अनेक प्रतिष्ठित अतिथि उपस्थित रहे। सभी अतिथियों ने पुस्तक के विमोचन को एक सकारात्मक और वैचारिक पहल बताया।
स्वयंसेवक की वैचारिक यात्रा को दर्शाती है पुस्तक
पुस्तक विमोचन के अवसर पर लेखक श्रेय राजदेव ने कहा कि “मैं हिंदू हूं: सफर स्वयंसेवक का” केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि एक स्वयंसेवक के अनुभवों, विचारों और वैचारिक यात्रा का दस्तावेज है। उन्होंने कहा कि पुस्तक में भारतीय संस्कृति, राष्ट्रवाद, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक पहचान जैसे विषयों को प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया है।
उन्होंने कहा कि आज के समय में युवाओं को अपनी सांस्कृतिक जड़ों और भारतीय मूल्यों से जोड़ना अत्यं
त आवश्यक है। सकारात्मक संवाद और वैचारिक जागरूकता के माध्यम से ही समाज और राष्ट्र को मजबूत बनाया जा सकता है।
साहित्य और राष्ट्र निर्माण पर हुई चर्चा
कार्यक्रम के दौरान साहित्य की भूमिका, राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भागीदारी तथा वी
र सावरकर की विचारधारा पर विस्तृत चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि साहित्य समाज को दिशा देने का सबसे प्रभावी माध्यम है और ऐसी पुस्तकें युवाओं में जागरूकता तथा राष्ट्रप्रेम की भावना विकसित करती हैं।
उपस्थित अतिथियों ने लेखक श्रेय राजदेव को शुभकामनाएं देते हुए पुस्तक को प्रेरणादायक बताया और कहा कि यह पुस्तक समाज में सकारात्मक वैचारिक विमर्श को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
देशभक्ति और सांस्कृतिक ऊर्जा से ओत-प्रोत रहा वातावरण
पूरे कार्यक्रम के दौरान नॉर्थ बंगाल यूनिवर्सिटी परिसर में देशभक्ति और सांस्कृतिक चेतना का विशेष वातावरण देखने को मिला। कार्यक्रम का समापन अतिथियों एवं उपस्थित लोगों के बीच संवाद, विचार-विमर्श और स्मृति चित्रों के साथ हुआ।

