सैकड़ों श्रद्धालुओं ने खींचा रथ, पुष्पवर्षा और भजन-कीर्तन से गूंजा पूरा शहर
मसूरी। पर्यटन नगरी मसूरी में भगवान जगन्नाथ की भव्य रथ यात्रा श्रद्धा, आस्था और उत्साह के वातावरण में निकाली गई। मधुबन आश्रम, मुनि की रेती (ऋषिकेश) के तत्वावधान में आयोजित इस पांचवीं वार्षिक रथ यात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर भगवान जगन्नाथ के दर्शन किए और रथ की रस्सी खींचकर स्वयं को धन्य महसूस किया। पूरे मार्ग में भक्तों ने भजन-कीर्तन, नृत्य और जयघोष के साथ वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
पूजा-अर्चना और छप्पन भोग के साथ हुआ रथ यात्रा का शुभारंभ
रथ यात्रा का शुभारंभ मसूरी के सनातन धर्म मंदिर, लंढौर से हुआ। यात्रा प्रारंभ होने से पूर्व भगवान बलराम, भगवान जगन्नाथ (कृष्ण) और माता सुभद्रा की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। भगवान को छप्पन प्रकार के व्यंजनों का भोग अर्पित करने के बाद उनकी प्रतिमाओं को सुसज्जित रथ पर विराजमान कराया गया।
शहर के प्रमुख मार्गों से निकली शोभायात्रा
भव्य रथ यात्रा लंढौर बाजार से शुरू होकर घंटाघर, शहीद भगत सिंह चौक, इंद्रमणि बडोनी चौक, शहीद स्थल और माल रोड से होते हुए गांधी चौक स्थित लक्ष्मी नारायण मंदिर पहुंची। मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना के उपरांत धार्मिक आयोजन का समापन हुआ।
यात्रा के दौरान श्रद्धालु पूरे मार्ग में भजन-कीर्तन करते हुए झूमते रहे। अनेक श्रद्धालुओं ने भगवान जगन्नाथ के रथ की रस्सी खींचकर पुण्य अर्जित किया, जबकि कई भक्तों ने श्रद्धा स्वरूप मार्ग की सफाई करते हुए झाड़ू लगाई। यह दृश्य श्रद्धा, सेवा और समर्पण का अद्भुत उदाहरण बना।
जगह-जगह हुआ भव्य स्वागत और प्रसाद वितरण
रथ यात्रा का विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों तथा स्थानीय नागरिकों ने गर्मजोशी से स्वागत किया। मार्ग के दोनों ओर खड़े श्रद्धालुओं ने भगवान जगन्नाथ की शोभायात्रा पर पुष्पवर्षा कर अपनी आस्था व्यक्त की। अनेक स्थानों पर श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद वितरण की भी व्यवस्था की गई, जिससे पूरे आयोजन में धार्मिक उत्साह और बढ़ गया।
भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा का बताया आध्यात्मिक महत्व
मधुबन आश्रम, ऋषिकेश के स्वामी परमानंद दास ने रथ यात्रा के धार्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भगवान जगन्नाथ समस्त संसार के पालनहार और स्वामी हैं। उन्होंने बताया कि भगवान जगन्नाथ ऐसे आराध्य हैं, जिनकी प्राण प्रतिष्ठा के बाद भी वे भक्तों के बीच रथ पर विराजमान होकर स्वयं दर्शन देने निकलते हैं।
उन्होंने स्कंद पुराण का उल्लेख करते हुए कहा कि जो श्रद्धालु भगवान जगन्नाथ के रथ की रस्सी खींचते हैं और सेवा भाव से यात्रा में भाग लेते हैं, उन्हें अपार पुण्य की प्राप्ति होती है। ऐसी मान्यता है कि भगवान की निष्काम सेवा करने वाले भक्तों को पुनर्जन्म के बंधन से मुक्ति मिलती है तथा उनका जीवन आनंद और आध्यात्मिक शांति से भर जाता है।
उत्तराखंड में तीन दशक से हो रहा आयोजन
स्वामी परमानंद दास ने बताया कि भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा की परंपरा हजारों वर्ष पुरानी है। उत्तराखंड में यह यात्रा लगभग तीन दशकों से आयोजित की जा रही है, जबकि मसूरी में इस वर्ष पांचवीं बार इसका आयोजन हुआ। उन्होंने अधिक से अधिक लोगों से इस पावन यात्रा में शामिल होकर भजन-कीर्तन एवं सेवा कार्यों के माध्यम से आध्यात्मिक लाभ प्राप्त करने का आह्वान किया।
बड़ी संख्या में मौजूद रहे श्रद्धालु और गणमान्य लोग
इस अवसर पर मधुबन आश्रम, ऋषिकेश के प्रबंधक हर्ष कौशल, मसूरी पालिकाध्यक्ष मीरा सकलानी, भाजपा मंडल अध्यक्ष रजत अग्रवाल, जगजीत कुकरेजा, नीरज अग्रवाल, शानू वर्मा, कमला थपलियाल, अनीता धनाई, संदीप अग्रवाल, सुरेश गोयल सहित मसूरी, देहरादून, ऋषिकेश और आसपास के क्षेत्रों से आए सैकड़ों श्रद्धालु एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।