राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने नागरिक अलंकरण समारोह में प्रदान किया सम्मान
देहरादून। भगत सिंह कोश्यारी को लोक कार्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान पद्मभूषण से सम्मानित किया गया। नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन के गणतंत्र मंडप में आयोजित नागरिक अलंकरण समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें यह सम्मान प्रदान किया।
इस अवसर पर भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सहित केंद्र सरकार के कई मंत्री और अन्य गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे।
वर्ष 2026 के लिए प्रदान किए गए पद्म पुरस्कार
राष्ट्रपति द्वारा आयोजित पहले नागरिक अलंकरण समारोह में कुल 66 पद्म पुरस्कार प्रदान किए गए। इनमें:
- 02 पद्म विभूषण
- 06 पद्म भूषण
- 58 पद्मश्री
सम्मान शामिल रहे।
पद्म पुरस्कार देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में गिने जाते हैं, जिन्हें कला, समाज सेवा, साहित्य, शिक्षा, चिकित्सा, विज्ञान, खेल, सार्वजनिक जीवन और सिविल सेवा सहित विभिन्न क्षेत्रों में विशिष्ट योगदान के लिए प्रदान किया जाता है।
क्या है पद्मभूषण सम्मान?
पद्मभूषण उच्च कोटि की विशिष्ट सेवा के लिए दिया जाने वाला देश का तीसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान है।
जबकि:
- पद्म विभूषण असाधारण और विशिष्ट सेवा के लिए
- पद्मश्री किसी भी क्षेत्र में उल्लेखनीय सेवा के लिए प्रदान किया जाता है।
इन पुरस्कारों की घोषणा प्रत्येक वर्ष गणतंत्र दिवस के अवसर पर की जाती है।
“भगत दा” के नाम से लोकप्रिय हैं कोश्यारी
उत्तराखंड में भगत सिंह कोश्यारी को स्नेहपूर्वक “भगत दा” के नाम से जाना जाता है। वे एक प्रतिष्ठित सामाजिक कार्यकर्ता, शिक्षाविद्, पत्रकार और समर्पित राष्ट्रवादी नेता के रूप में पहचाने जाते हैं।
उन्होंने अपना जीवन जन सेवा और समाज के गरीब एवं पिछड़े वर्गों के उत्थान के लिए समर्पित किया है। वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के एक निष्ठावान स्वयंसेवक रहे हैं और अपनी सादगी, अनुशासन तथा शिक्षा के प्रति समर्पण के लिए प्रसिद्ध हैं।
पहाड़ी गांव से शुरू हुआ सार्वजनिक जीवन का सफर
17 जून 1942 को उत्तराखंड के बागेश्वर जिले के पलानधुरा गांव में जन्मे भगत सिंह कोश्यारी ने सीमित संसाधनों के बावजूद उच्च शिक्षा प्राप्त की।
उन्होंने 1964 में आगरा विश्वविद्यालय से संबद्ध अल्मोड़ा कॉलेज से अंग्रेजी साहित्य में स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल की।
इसके बाद उन्होंने 1964-65 के दौरान उत्तर प्रदेश के एटा जिले के राजा का रामपुर में व्याख्याता के रूप में अपने करियर की शुरुआत की। बाद में उन्होंने स्वयं को शिक्षा और समाज सेवा के लिए समर्पित कर दिया।
उत्तराखंड आंदोलन और राजनीति में निभाई महत्वपूर्ण भूमिका
वर्ष 1997 में उन्हें उत्तर प्रदेश विधान परिषद के लिए नामित किया गया। उत्तराखंड राज्य गठन के बाद वे राज्य के पहले मंत्रिमंडल में कैबिनेट मंत्री बने और बाद में उत्तरांचल (अब उत्तराखंड) के मुख्यमंत्री के रूप में भी कार्य किया।
उन्होंने उत्तराखंड विधानसभा में विपक्ष के नेता की जिम्मेदारी भी निभाई।
वर्ष 2008 में वे राज्यसभा सदस्य चुने गए और 2014 में नैनीताल-ऊधम सिंह नगर लोकसभा क्षेत्र से सांसद निर्वाचित हुए।
महाराष्ट्र और गोवा के राज्यपाल भी रहे
भगत सिंह कोश्यारी को 5 सितंबर 2019 को महाराष्ट्र का राज्यपाल नियुक्त किया गया, जहां उन्होंने प्रभावी रूप से अपनी सेवाएं दीं।
इसके अलावा अगस्त 2020 में उन्हें गोवा के राज्यपाल का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया था।
लेखक के रूप में भी बनाई पहचान
राजनीति और समाज सेवा के साथ-साथ भगत सिंह कोश्यारी ने साहित्य के क्षेत्र में भी योगदान दिया है। उन्होंने “उत्तरांचल प्रदेश क्यों” और “उत्तरांचल प्रदेश संघर्ष एवं समाधान” जैसी पुस्तकें लिखीं, जिनमें उत्तराखंड के विकास और राज्य निर्माण से जुड़े उनके विचार प्रतिबिंबित होते हैं।
प्रेरणादायक है उनका जीवन
भगत सिंह कोश्यारी का जीवन संघर्ष, सेवा, नेतृत्व और राष्ट्र समर्पण का प्रेरक उदाहरण माना जाता है। पद्मभूषण सम्मान से सम्मानित होना उत्तराखंड के लिए भी गौरव का विषय माना जा रहा है।