देहरादून : उत्तराखंड स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने साइबर क्राइम में एक बड़ी कार्रवाई करते हुए जम्मू-कश्मीर के बड़गाम जिले के श्रीनगर क्षेत्र से साइबर ठगी के दो शातिर सदस्यों को गिरफ्तार किया है। संवेदनशील इलाके और स्थानीय दबाव के बावजूद एसटीएफ की टीम ने चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में सफलता हासिल की।
गिरफ्तारी और बरामदगी
गिरफ्तार किए गए आरोपी हैं:
- शौकत हुसैन मलिक पुत्र अली मोहम्मद मलिक, निवासी पारिसाबाद, थाना बड़गाम
- बिलाल अहमद पुत्र अली मोहम्मद मल्ला, निवासी करीपोरा, थाना बड़गाम, जिला बड़गाम
गिरफ्तारी के दौरान तीन मोबाइल फोन, कई एटीएम कार्ड, आधार कार्ड, पैन कार्ड और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए गए।
घटना का विवरण
देहरादून के 71 वर्षीय एक वरिष्ठ नागरिक की शिकायत पर यह मामला सामने आया। 21 नवंबर 2025 को ठगों ने खुद को टेलीकॉम विभाग और फिर सीबीआई/दिल्ली पुलिस अधिकारी बताते हुए फर्जी व्हाट्सएप वीडियो कॉल के जरिए डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाया। फर्जी वॉरंट और दस्तावेज दिखाकर उन्होंने बैंक खातों की जांच का बहाना बनाया और 65 लाख रुपये विभिन्न खातों में ट्रांसफर करवा लिए।
जांच और तकनीकी विश्लेषण
एसटीएफ की टीम ने बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और व्हाट्सएप डेटा का विश्लेषण किया। मेटा कंपनी, बैंकों और सेवा प्रदाताओं से जानकारी प्राप्त कर आरोपी चिन्हित किए गए। जांच में पता चला कि ये आरोपी फर्जी बैंक खाते, सिम कार्ड और एटीएम कार्डों के जरिए संगठित साइबर ठगी का नेटवर्क चला रहे थे। इन खातों के खिलाफ उत्तराखंड समेत देश के 7 राज्यों में शिकायतें दर्ज हैं।
संवेदनशील परिस्थितियों में सफल कार्रवाई
गिरफ्तारी के समय स्थानीय भीड़ ने थाने से लेकर अदालत तक पुलिस टीम पर दबाव बनाने की कोशिश की। इस क्षेत्र में पहले भी ग्रेनेड हमले हो चुके हैं, फिर भी एसटीएफ की टीम ने धैर्य बनाए रखते हुए आरोपी गिरफ्तार किए और कोर्ट में प्रभावी पैरवी कर पुलिस रिमांड हासिल किया।
पुलिस अधिकारियों के बयान
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, एसटीएफ अजय सिंह ने बताया कि पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ, एडीजी डॉ. वी. मुरुगेसन और आईजी एसटीएफ डॉ. नीलेश आनंद भरने के मार्गदर्शन में साइबर अपराधियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है।
जनता से अपील
एसपी अजय सिंह ने आम जनता से अपील की है:
- डिजिटल अरेस्ट पूरी तरह फर्जी स्कैम है। कोई भी सरकारी अधिकारी व्हाट्सएप पर ऐसा नोटिस नहीं भेजता।
- फर्जी कॉल, धमकी या पैसे मांगने पर तुरंत साइबर थाने में शिकायत करें।
- ऑनलाइन निवेश, फ्रैंचाइजी, टिकट बुकिंग या दोगुना पैसा देने वाले लुभावने ऑफर से बचें।
- शक होने पर गूगल से नंबर सर्च न करें, बल्कि निकटतम पुलिस स्टेशन या साइबर क्राइम यूनिट से संपर्क करें।
- चाक्षु पोर्टल (संचार साथी वेबसाइट) पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें।