विश्व स्तनपान सप्ताह: “हर मां का संकल्प, हर शिशु का अधिकार—स्तनपान” : डॉ. सुजाता संजय

विश्व स्तनपान सप्ताह पर माताओं और परिवारों से जागरूकता बढ़ाने की अपील

देहरादून, 3 अगस्त। विश्व स्तनपान सप्ताह (1–7 अगस्त) के अवसर पर वरिष्ठ स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. सुजाता संजय ने माताओं, परिवारों और समाज से आह्वान किया कि वे स्तनपान को केवल एक स्वास्थ्य आदत नहीं, बल्कि प्रत्येक नवजात शिशु का मूल अधिकार और स्वस्थ जीवन की मजबूत नींव के रूप में स्वीकार करें। उन्होंने कहा कि मां का दूध शिशु के लिए प्रकृति का सबसे सुरक्षित, संपूर्ण और संतुलित आहार है, जो जन्म के साथ ही उसके शारीरिक, मानसिक और बौद्धिक विकास की आधारशिला रखता है।

जन्म के पहले घंटे में स्तनपान सबसे महत्वपूर्ण

डॉ. सुजाता संजय ने बताया कि शिशु के जन्म के पहले घंटे के भीतर स्तनपान शुरू करना अत्यंत आवश्यक है। जन्म के तुरंत बाद निकलने वाला गाढ़ा पीला दूध, जिसे कोलोस्ट्रम (Colostrum) कहा जाता है, नवजात के लिए पहला प्राकृतिक टीका माना जाता है। इसमें मौजूद एंटीबॉडी, प्रोटीन और आवश्यक पोषक तत्व शिशु को संक्रमणों से बचाने और उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

उन्होंने स्पष्ट कहा कि कोलोस्ट्रम को किसी भी स्थिति में फेंकना नहीं चाहिए और न ही नवजात को इससे वंचित किया जाना चाहिए।

छह माह तक केवल मां का दूध ही पर्याप्त

डॉ. संजय ने बताया कि जन्म से छह माह की आयु तक शिशु को केवल मां का दूध ही दिया जाना चाहिए। इस दौरान पानी, शहद, घुट्टी, गाय का दूध अथवा अन्य कोई खाद्य पदार्थ देने की आवश्यकता नहीं होती।

उन्होंने कहा कि छह माह के बाद पौष्टिक पूरक आहार शुरू किया जा सकता है, लेकिन दो वर्ष अथवा उससे अधिक समय तक स्तनपान जारी रखने से बच्चे के समग्र विकास को दीर्घकालिक लाभ मिलता है।

स्तनपान से मां को भी मिलते हैं अनेक स्वास्थ्य लाभ

उन्होंने कहा कि स्तनपान केवल शिशु के लिए ही नहीं बल्कि मां के स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत लाभकारी है। इससे प्रसव के बाद रक्तस्राव कम होता है, गर्भाशय शीघ्र सामान्य स्थिति में लौटता है तथा भविष्य में स्तन एवं अंडाशय के कैंसर का जोखिम भी कम हो सकता है।

इसके अतिरिक्त स्तनपान मां और शिशु के बीच भावनात्मक संबंध को मजबूत करता है, जिससे बच्चे का आत्मविश्वास और मानसिक विकास बेहतर होता है।

भ्रांतियों से बचें, सही जानकारी अपनाएं

डॉ. सुजाता संजय ने कहा कि आज भी समाज में स्तनपान को लेकर अनेक भ्रांतियां प्रचलित हैं। कई परिवारों में नवजात को जन्म के तुरंत बाद शहद, घुट्टी या अन्य पदार्थ दिए जाते हैं, जबकि यह बच्चे के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है।

उन्होंने कहा कि सही जानकारी और जागरूकता के माध्यम से ही इन गलत धारणाओं को समाप्त किया जा सकता है।

परिवार का सहयोग सफल स्तनपान की सबसे बड़ी ताकत

उन्होंने विशेष रूप से पति, दादा-दादी, नाना-नानी तथा सास-ससुर सहित परिवार के सभी सदस्यों से नई मां को मानसिक सहयोग, पर्याप्त आराम और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने की अपील की।

उन्होंने कहा कि एक सहयोगी पारिवारिक वातावरण ही सफल स्तनपान की सबसे मजबूत आधारशिला है।

समस्या होने पर विशेषज्ञ से लें सलाह

डॉ. संजय ने कहा कि यदि किसी मां को स्तनपान कराने में कठिनाई, दूध कम बनने, निप्पल में दर्द अथवा अन्य किसी प्रकार की समस्या हो तो स्वयं उपचार करने के बजाय स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ या प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी से परामर्श अवश्य लेना चाहिए।

उन्होंने कहा कि समय पर उचित चिकित्सकीय सलाह मिलने से अधिकांश समस्याओं का सफल समाधान संभव है।

हर मां को मिले सम्मान और सहयोग

उन्होंने कहा कि विश्व स्तनपान सप्ताह का उद्देश्य केवल स्तनपान के लाभ बताना नहीं है, बल्कि ऐसा सामाजिक वातावरण तैयार करना भी है, जहां प्रत्येक मां बिना किसी झिझक के अपने शिशु को स्तनपान करा सके।

उन्होंने अस्पतालों, कार्यस्थलों और समाज से ऐसी व्यवस्था विकसित करने का आह्वान किया, जिससे हर मां को सम्मान, सहयोग और अनुकूल वातावरण मिल सके।

“मां का दूध जीवनभर के अच्छे स्वास्थ्य की नींव”

अपने संदेश के अंत में डॉ. सुजाता संजय ने कहा,

“मां का दूध केवल पोषण नहीं, बल्कि जीवनभर के अच्छे स्वास्थ्य का सबसे मजबूत आधार है। आइए, विश्व स्तनपान सप्ताह पर हम सभी यह संकल्प लें कि हर मां को स्तनपान के लिए प्रोत्साहित करेंगे, उसका सम्मान करेंगे और प्रत्येक शिशु को उसके जीवन का पहला और सबसे अनमोल अधिकार दिलाने में अपनी जिम्मेदारी निभाएंगे। स्वस्थ मां और स्वस्थ शिशु ही स्वस्थ समाज तथा सशक्त राष्ट्र की पहचान हैं।”

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