महिला सशक्तिकरण के प्रयासों पर किसी भी प्रकार की राजनीति नहीं होनी चाहिए: सीएम धामी

देहरादून, 16 अप्रैल 2026: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर चर्चा के लिए आयोजित उत्तराखंड विधानसभा के विशेष सत्र ‘नारी सम्मान- लोकतंत्र में अधिकार’ को संबोधित किया। मुख्यमंत्री ने सदन से अपील की कि महिलाओं के सशक्तिकरण और उन्हें 33 प्रतिशत आरक्षण देने के मुद्दे पर किसी भी प्रकार की राजनीति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा लाए गए नारी शक्ति वंदन अधिनियम को यथाशीघ्र लागू करने के लिए सर्वसम्मत संकल्प पारित करने का प्रस्ताव रखा।

राज्य आंदोलनकारियों और नारी शक्ति को नमन

अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए मुख्यमंत्री धामी ने उत्तराखंड राज्य आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली महिलाओं को नमन किया। उन्होंने गौरा देवी, टिंचरी माई, बिशनी देवी शाह, जशूली शौक्याण, कुंती वर्मा, भागीरथी देवी, मंगला देवी, हंसा धनाई, सरला बहन, बेलमती चौहान, सुशीला बहन और कमला पंत जैसी नारी शक्ति को विशेष श्रद्धांजलि अर्पित की।

सनातन संस्कृति में नारी का सम्मान

मुख्यमंत्री ने कहा कि सनातन संस्कृति में नारी को देवी का दर्जा दिया गया है। माँ दुर्गा, माँ लक्ष्मी और माँ सरस्वती के रूप में हम नारी के साहस, समृद्धि और ज्ञान का वंदन करते हैं। उन्होंने रानी लक्ष्मीबाई, सावित्रीबाई फुले, कल्पना चावला, तीलू रौतेली, रानी जिया रानी और चिपको आंदोलन की अग्रणी गौरा देवी जैसे उदाहरणों का जिक्र करते हुए कहा कि नारी अब केवल सहभागिता तक सीमित नहीं है, बल्कि नेतृत्व की भूमिका निभा रही है।

नारी शक्ति वंदन अधिनियम को युगांतकारी कदम बताया

सीएम धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2023 में नारी शक्ति वंदन अधिनियम लाकर महिलाओं को लोकसभा और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण देने का ऐतिहासिक कदम उठाया था। यह बिल केवल संख्या बढ़ाने का नहीं, बल्कि नीति निर्माण में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने का युगांतकारी कदम था। उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाते हुए कहा कि संख्या बल के कारण बिल लोकसभा में पारित नहीं हो सका और विपक्षी नेता तालियां बजा रहे थे। इस दृश्य की तुलना उन्होंने महाभारत की द्रौपदी की सभा से की।

विपक्ष पर भ्रम फैलाने का आरोप

मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्ष महिला आरक्षण जैसे संवेदनशील मुद्दे पर लोगों को भ्रमित करने का प्रयास कर रहा है। जबकि गृह मंत्री अमित शाह ने स्पष्ट किया था कि परिसीमन के बाद किसी राज्य के साथ भेदभाव नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि दशकों तक सत्ता में रहने के बावजूद विपक्ष ने महिलाओं को उनका हक देने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया।

केंद्र सरकार के महिला सशक्तिकरण प्रयास

धामी ने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में पिछले 11 वर्षों में महिला सशक्तिकरण के लिए किए गए कार्यों का उल्लेख किया:

  • जेंडर बजट में पांच गुना वृद्धि
  • 2026-27 में महिलाओं के कल्याण के लिए 5 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान
  • बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान से लिंगानुपात में सुधार
  • सुकन्या समृद्धि योजना के तहत 4 करोड़ से अधिक खाते
  • तीन तलाक पर कानून बनाकर मुस्लिम महिलाओं को सुरक्षा
  • स्वच्छ भारत मिशन से महिलाओं को गरिमा और सुरक्षा

उत्तराखंड सरकार के प्रयास

मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तराखंड सरकार भी महिला सशक्तिकरण के प्रति पूरी तरह संकल्पबद्ध है। इस वर्ष जेंडर बजट में लगभग 20 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

  • सशक्त बहना उत्सव योजना
  • मुख्यमंत्री महिला स्वयं सहायता समूह सशक्तिकरण योजना
  • महिला समूहों को 5 लाख तक ब्याज मुक्त ऋण
  • एकल महिला स्वरोजगार योजना
  • 2 लाख 65 हजार से अधिक महिलाएं बन चुकी हैं ‘लखपति दीदी’
  • सरकारी सेवाओं में 30% और सहकारी समितियों में 33% आरक्षण
  • लोहाघाट में 256 करोड़ रुपये की लागत से महिला स्पोर्ट्स कॉलेज

समान नागरिक संहिता का जिक्र

धामी ने कहा कि उत्तराखंड देश का पहला राज्य है जिसने समान नागरिक संहिता (UCC) लागू की। इससे मुस्लिम महिलाओं को हलाला, इद्दत, बहुविवाह, बाल विवाह और तीन तलाक जैसी कुरीतियों से मुक्ति मिली है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विपक्ष से अपील की कि मातृशक्ति के सशक्तिकरण जैसे महत्वपूर्ण विषय पर दलगत राजनीति से ऊपर उठकर सकारात्मक रुख अपनाया जाए, ताकि देश की आधी आबादी को उनका उचित अधिकार मिल सके।

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