उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की स्नातक स्तर भर्ती परीक्षा में प्रश्नपत्र लीक का खुलासा: मुख्य अभियुक्ता की बहन साबिया गिरफ्तार

देहरादून/हरिद्वार। उत्तराखंड में सरकारी नौकरियों की दौड़ में एक और काला अध्याय जुड़ गया है। उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (यूकेएसएसएससी) द्वारा आयोजित स्नातक स्तर की भर्ती परीक्षा के दौरान प्रश्नपत्र के तीन पृष्ठों के फोटो लीक होने का मामला सामने आया है। इस घटना ने न केवल उम्मीदवारों में आक्रोश पैदा किया है, बल्कि राज्य सरकार की परीक्षा प्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेष जांच दल (एसआईटी) की कार्रवाई में मुख्य अभियुक्त खालिद मलिक की बहन साबिया को नकल कराने के इरादे से प्रश्नपत्र के फोटो भेजने के आरोप में गिरफ्तार किया गया। यह गिरफ्तारी परीक्षा केंद्र से फोटो लीक होने की घटना को उजागर करती है, जहां अभियुक्ता ने अपने भाई की परीक्षा में सफलता सुनिश्चित करने के लिए कथित तौर पर अनुचित साधनों का सहारा लिया।

घटना का विवरण

परीक्षा 22 सितंबर 2025 को आदर्श बाल सदन इंटर कॉलेज, बहादुरपुर जट, थाना पथरी, हरिद्वार में आयोजित की गई थी। मुख्य अभियुक्त खालिद मलिक ने कथित रूप से परीक्षा केंद्र के पीछे की दीवार फांदकर प्रवेश किया और मुख्य द्वार पर होने वाली जांच से बच गया। उसके जुराब में छिपाकर लाया गया पतला मोबाइल फोन परीक्षा कक्ष में ले जाकर उपयोग किया गया। वॉशरूम में जाकर उसने प्रश्नपत्र के तीन पृष्ठों की तस्वीरें लीं और उन्हें अपनी बहन साबिया के पास भेज दिया। साबिया ने इन फोटो को हल कराने के उद्देश्य से जनपद टिहरी में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर तैनात महिला सुमन को फॉरवर्ड किया। सुमन ने शक होने पर इन तस्वीरों के स्क्रीनशॉट लेकर एक अन्य व्यक्ति को भेजे, लेकिन आयोग या पुलिस को तुरंत सूचना नहीं दी। इसके बाद ये स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर वायरल हो गए, जिससे परीक्षा प्रक्रिया पर सनसनी फैल गई।

जांच की प्रक्रिया

यूकेएसएसएससी द्वारा शिकायत मिलते ही एसएसपी देहरादून ने एसआईटी का गठन किया। टीम ने सोशल मीडिया पर वायरल हुए फोटो के स्रोत की तलाश की, जिससे सुमन के पास फोटो भेजे जाने की जानकारी सामने आई। सुमन से पूछताछ में खुलासा हुआ कि फोटो खालिद के नंबर से साबिया ने भेजे थे। जांच में खालिद की एक अन्य बहन हिना की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई। एसआईटी की रिपोर्ट के आधार पर थाना रायपुर में मुकदमा संख्या 301/25 धारा 11(1), 11(2), 12(2) उत्तराखंड प्रतियोगी परीक्षा (भर्ती में अनुचित साधनों की रोकथाम एवं उपाय) अध्यादेश 2023 के तहत दर्ज किया गया। विवेचना पुलिस अधीक्षक ऋषिकेश जया बालुनी को सौंपी गई। उन्होंने घटनास्थल का निरीक्षण किया, परीक्षा केंद्र के प्रिंसिपल, कक्ष निरीक्षकों और अन्य गवाहों से गहन पूछताछ की। जांच में पाया गया कि परीक्षा कक्ष में जामर (सिग्नल ब्लॉकर) नहीं लगाया गया था, जबकि अन्य कक्षों में यह सुविधा उपलब्ध थी। इस लापरवाही की भी जांच चल रही है।

अभियुक्तों की भूमिका और गिरफ्तारी

अभियुक्ता साबिया (35 वर्ष) पुत्री शहजाद, निवासी सुल्तानपुर आदमपुर, थाना लक्सर, हरिद्वार ने अपने भाई खालिद को परीक्षा में शामिल होने की पूरी जानकारी होने के बावजूद प्रश्नपत्र के फोटो सुमन को भेजे। सुमन से प्राप्त उत्तरों को खालिद तक पहुंचाने का प्रयास किया गया। साक्ष्यों के आधार पर साबिया को गिरफ्तार किया गया। खालिद तीन दिनों तक फरार रहा, लेकिन मोबाइल लोकेशन ट्रैकिंग से 23 सितंबर को लक्सर क्षेत्र से पकड़ा गया। हिना और सुमन के खिलाफ भी कार्रवाई की जा रही है। सुमन ने आयोग को सूचना न देकर स्क्रीनशॉट वायरल करने वालों को जांच के दायरे में लाया। यदि समय रहते सूचना दी जाती, तो अभियुक्तों को केंद्र से ही पकड़ा जा सकता था। अन्य संलिप्त व्यक्तियों की तलाश में पुलिस टीमें सक्रिय हैं।

प्रभाव और प्रतिक्रियाएं

यह घटना यूकेएसएसएससी की ग्रेजुएट लेवल भर्ती परीक्षा को प्रभावित करती है, जिसमें हजारों उम्मीदवार शामिल हुए थे। आयोग के चेयरमैन गणेश सिंह मार्टोलिया ने इसे पूर्ण लीक न बताते हुए केवल तीन पृष्ठों तक सीमित बताया, लेकिन जांच एसएसपी और एसटीएफ को सौंपी गई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कड़े एक्शन का ऐलान किया, कहा कि परीक्षा में धांधली करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। विपक्षी दल कांग्रेस ने सरकार पर निशाना साधा, प्रदेश अध्यक्ष करण महरा ने कहा, “सबसे सख्त कानून बनाया, लेकिन लीक रुकने का नाम नहीं ले रहा।” देहरादून में छात्र संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किया, जिसमें एंटी-चीटिंग लॉ की प्रभावशीलता पर सवाल उठाए गए। यह मामला राज्य में पेपर लीक की बढ़ती प्रवृत्ति को दर्शाता है, जिससे युवाओं का भविष्य खतरे में पड़ रहा है।

उत्तराखंड पुलिस की त्वरित कार्रवाई से मुख्य अभियुक्त गिरफ्तार हो चुके हैं, लेकिन जांच जारी है। परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा मजबूत करने और जागरूकता अभियान की आवश्यकता है। उम्मीद है कि इस मामले से भविष्य में ऐसी घटनाओं पर अंकुश लगेगा, ताकि मेहनतकश युवाओं का हक सुरक्षित रहे।

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