पहली बार पहाड़ों की रानी में राष्ट्रीय पक्षी की मौजूदगी से लोग हैरान
मसूरी। पहाड़ों की रानी मसूरी के कैमल बैक क्षेत्र के जंगलों में राष्ट्रीय पक्षी मोर दिखाई देने से स्थानीय लोग और पर्यटक हैरान हैं। आमतौर पर मैदानी और गर्म इलाकों में पाए जाने वाले मोर का मसूरी जैसे ऊंचे पहाड़ी क्षेत्र में दिखाई देना एक असामान्य घटना मानी जा रही है।
जानकारी के अनुसार, कैमल बैक रोड के जंगलों में मोर को दो अलग-अलग स्थानों पर देखा गया। वहीं, एक दिन पहले माल रोड से लगे एक होटल परिसर में भी मोर नजर आया था। इस घटना ने वन विभाग और पक्षी विशेषज्ञों का ध्यान अपनी ओर खींचा है।
जलवायु परिवर्तन को माना जा रहा प्रमुख कारण
विशेषज्ञों का मानना है कि मसूरी में मोर का दिखाई देना जलवायु परिवर्तन और लगातार बढ़ते तापमान का असर हो सकता है। देश के मैदानी क्षेत्रों में पड़ रही भीषण गर्मी के कारण अब वन्य जीव और पक्षी ठंडे इलाकों की ओर रुख कर रहे हैं।
जहां एक ओर गर्मी से राहत पाने के लिए बड़ी संख्या में पर्यटक मसूरी पहुंच रहे हैं, वहीं अब राष्ट्रीय पक्षी मोर ने भी ठंडे मौसम की तलाश में पहाड़ों का रुख कर लिया है।
“100 वर्षों में पहली बार देखा गया मोर”
इतिहासकार गोपाल भारद्वाज ने बताया कि उनका परिवार लगभग 100 वर्षों से मसूरी में रह रहा है, लेकिन पहली बार कैमल बैक के जंगलों में मोर देखा गया है।
उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में मसूरी सहित उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों के औसत तापमान में वृद्धि हुई है। पहले जहां अधिक ठंड मोरों के लिए प्रतिकूल थी, अब 6000 फीट से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भी उन्हें अनुकूल वातावरण मिलने लगा है।
देवदार और बांज के जंगल बन रहे सुरक्षित आश्रय
गोपाल भारद्वाज ने बताया कि मसूरी के घने बांज और देवदार के जंगल मोरों के लिए सुरक्षित आश्रय साबित हो सकते हैं। यहां उन्हें पर्याप्त भोजन भी आसानी से मिल जाता है।
उन्होंने कहा कि कीड़े-मकोड़े, बीज, छोटे सरीसृप और अनाज मोर का मुख्य भोजन हैं, जो इन जंगलों में उपलब्ध हैं। ऐसे में यह क्षेत्र उनके लिए उपयुक्त आवास बन सकता है।
वन विभाग ने शुरू की निगरानी
अमित कंवर ने बताया कि वन विभाग की टीम को मोर दिखाई देने वाले क्षेत्रों पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही स्थानीय लोगों को भी वन्यजीव संरक्षण को लेकर जागरूक किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि सामान्य रूप से मोर मैदानी क्षेत्रों में पाए जाते हैं और पहाड़ी क्षेत्र में उनका दिखाई देना पहली बार सामने आया है। फिलहाल केवल एक मोर देखे जाने की पुष्टि हुई है, लेकिन यह पता लगाने के लिए निगरानी की जा रही है कि कहीं आसपास और मोर या उनका झुंड तो मौजूद नहीं है।
अध्ययन के बाद ही स्पष्ट होगी स्थिति
डीएफओ अमित कंवर ने कहा कि प्रारंभिक तौर पर जलवायु परिवर्तन को इसका कारण माना जा रहा है, लेकिन वैज्ञानिक अध्ययन के बाद ही इस पर स्पष्ट रूप से कुछ कहा जा सकेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आने वाले समय में पहाड़ी क्षेत्रों में मोरों की संख्या बढ़ती है, तो यह पर्यावरणीय बदलावों का महत्वपूर्ण संकेत हो सकता है।