मालरोड पर बोलार्ड लगाने की योजना का विरोध, रिक्शा चालकों की रोजी-रोटी पर संकट की आशंका

मजदूर संघ ने नगर पालिका से योजना पर पुनर्विचार करने की मांग की, पालिकाध्यक्ष मीरा सकलानी को सौंपा ज्ञापन; श्रमिकों के हितों की अनदेखी होने पर आंदोलन की चेतावनी

मसूरी। पर्यटन नगरी मसूरी की मालरोड पर यातायात व्यवस्था को नियंत्रित करने के लिए अंबेडकर चौक सहित अन्य स्थानों पर बोलार्ड लगाने की प्रस्तावित योजना को लेकर विरोध शुरू हो गया है। मजदूर संघ ने इस योजना पर आपत्ति जताते हुए कहा है कि इससे झूलाघर से लाइब्रेरी के बीच साइकिल रिक्शा चलाकर परिवार का भरण-पोषण करने वाले श्रमिकों की आजीविका प्रभावित हो सकती है। संघ ने नगर पालिका प्रशासन से मांग की है कि यातायात व्यवस्था में सुधार के साथ-साथ रिक्शा चालकों के रोजगार और हितों को भी ध्यान में रखा जाए।

इस संबंध में मजदूर संघ के प्रतिनिधियों ने नगर पालिका अध्यक्ष मीरा सकलानी को ज्ञापन सौंपकर अंबेडकर चौक पर बोलार्ड लगाने की प्रस्तावित योजना को स्थगित करने तथा इस पर दोबारा विचार करने का आग्रह किया। संघ का कहना है कि यातायात नियंत्रण के लिए ऐसी व्यवस्था बनाई जानी चाहिए, जिससे पर्यटकों और स्थानीय नागरिकों को सुविधा मिलने के साथ श्रमिकों की रोजी-रोटी भी सुरक्षित रह सके।

बोलार्ड लगने से रिक्शा संचालन प्रभावित होने की आशंका

मजदूर संघ के अनुसार, मालरोड पर साइकिल रिक्शा चलाने वाले अनेक श्रमिक पर्यटकों को आवागमन की सुविधा उपलब्ध कराकर अपनी आजीविका अर्जित करते हैं। झूलाघर से लाइब्रेरी तक का मार्ग उनके कामकाज के लिहाज से महत्वपूर्ण है। ऐसे में अंबेडकर चौक पर बोलार्ड लगाए जाने से रिक्शा चालकों के आवागमन और यात्रियों को ले जाने की व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका है।

संघ का कहना है कि रिक्शा संचालन से होने वाली आय पर कई श्रमिकों के परिवार निर्भर हैं। यदि प्रस्तावित व्यवस्था के कारण उनके काम करने के अवसर सीमित होते हैं, तो इसका सीधा असर उनकी दैनिक आमदनी पर पड़ सकता है।

मजदूर संघ ने प्रशासन से आग्रह किया है कि किसी भी नई यातायात व्यवस्था को लागू करने से पहले उससे प्रभावित होने वाले श्रमिकों की समस्याओं और जरूरतों का आकलन किया जाए।

यातायात व्यवस्था सुधरे, लेकिन श्रमिकों के हित भी रहें सुरक्षित

मजदूर संघ ने स्पष्ट किया कि वह यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के प्रयासों के विरोध में नहीं है, लेकिन इसके लिए अपनाए जाने वाले उपायों में रोजगार और आजीविका से जुड़े पहलुओं को भी महत्व दिया जाना चाहिए।

संघ के प्रतिनिधियों के अनुसार, मसूरी की मालरोड पर्यटन गतिविधियों का प्रमुख केंद्र है। यहां पर्यटकों की आवाजाही से रिक्शा चालकों सहित कई श्रमिकों की आय जुड़ी हुई है। ऐसे में यातायात नियंत्रण की योजना बनाते समय ऐसा व्यावहारिक विकल्प तलाशना जरूरी है, जिससे सड़क पर व्यवस्था बनी रहे और रिक्शा चालकों को अपना काम जारी रखने में अनावश्यक कठिनाइयों का सामना न करना पड़े।

ज्ञापन में नगर पालिका से अनुरोध किया गया है कि बोलार्ड लगाने की योजना पर फिलहाल रोक लगाकर संबंधित श्रमिकों के साथ चर्चा की जाए और उनकी समस्याओं को ध्यान में रखते हुए निर्णय लिया जाए।

योजना लागू हुई तो विरोध की चेतावनी

मजदूर संघ ने चेतावनी दी है कि यदि श्रमिकों के हितों की अनदेखी करते हुए अंबेडकर चौक पर बोलार्ड लगाए गए, तो इसका पुरजोर विरोध किया जाएगा। संघ का कहना है कि रिक्शा चालकों की आजीविका से जुड़े इस विषय पर नगर पालिका प्रशासन को संवेदनशीलता के साथ विचार करना चाहिए।

संघ ने उम्मीद जताई कि नगर पालिका प्रशासन श्रमिकों की समस्याओं को समझते हुए योजना के सभी पहलुओं की समीक्षा करेगा। साथ ही, ऐसा समाधान निकाला जाएगा, जिससे मालरोड पर यातायात प्रबंधन और श्रमिकों के रोजगार के बीच संतुलन बनाया जा सके।

पालिकाध्यक्ष को सौंपा ज्ञापन, एसडीएम को भी भेजी प्रतिलिपि

मजदूर संघ के प्रतिनिधियों ने नगर पालिका अध्यक्ष मीरा सकलानी को ज्ञापन सौंपकर अपनी मांगों से अवगत कराया। ज्ञापन की एक प्रतिलिपि उपजिलाधिकारी को भी भेजी गई है, ताकि इस विषय पर प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया जा सके।

ज्ञापन सौंपने वालों में मजदूर संघ के महामंत्री सोबन सिंह पंवार के साथ मिजान, उत्तम नेगी, खिलानंद नौटियाल, नीरज कुमार, राकेश कुमार, चंद्रपाल सिंह, अर्जुन कंडारी, भोपाल सिंह और अजय कुमार सहित अन्य श्रमिक शामिल रहे।

मजदूर संघ ने नगर पालिका प्रशासन से मांग की है कि प्रस्तावित योजना के संभावित प्रभावों की समीक्षा कर श्रमिकों के हितों को सुरक्षित रखा जाए। अब इस मामले में नगर पालिका प्रशासन की ओर से उठाए जाने वाले कदमों पर प्रभावित रिक्शा चालकों और मजदूर संघ की नजर रहेगी।

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