हरिद्वार में भव्य अंतरराष्ट्रीय संस्कृत सम्मेलन संपन्न

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने संस्कृत उत्थान के लिए उच्च स्तरीय आयोग गठन की घोषणा की

हरिद्वार/देहरादून

हरिद्वार के पतंजलि विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संस्कृत सम्मेलन का आज समापन हुआ। मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करने पहुंचे उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस अवसर पर संस्कृत भाषा के संरक्षण, संवर्धन एवं वैश्विक प्रचार-प्रसार के लिए एक उच्च स्तरीय राज्य आयोग के गठन की महत्वपूर्ण घोषणा की।

“भारतीय ज्ञान परंपरा में संस्कृत का वैश्विक योगदान” पर हुआ गहन चिंतन-मनन
सम्मेलन का मुख्य विषय “भारतीय ज्ञान परंपरा : वैश्विक ज्ञान के विकास में संस्कृत का योगदान” रहा। भारत सहित अमेरिका, जर्मनी, रूस, कनाडा, श्रीलंका आदि देशों के 200 से अधिक संस्कृत विद्वानों, शोधार्थियों एवं शिक्षाविदों ने वेद, उपनिषद, दर्शनशास्त्र, आयुर्वेद, ज्योतिष, गणित, योग एवं नीतिशास्त्र जैसे विविध क्षेत्रों में संस्कृत की अपराजेय भूमिका पर अपने शोध-पत्र प्रस्तुत किए।

संस्कृत केवल भाषा नहीं, समग्र जीवन दर्शन है – मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री ने अपने भावपूर्ण उद्बोधन में कहा कि संस्कृत केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, सभ्यता, विज्ञान, दर्शन और मानवीय मूल्यों का मूल आधार है। उन्होंने स्वयं कक्षा 9 तक संस्कृत पढ़ने के अपने निजी अनुभव साझा करते हुए कहा कि आज भी पाणिनि के व्याकरण के सूत्र और सुभाषित उनके मन-मस्तिष्क में जीवंत हैं।
उन्होंने तक्षशिला, नालंदा, विक्रमशिला जैसे प्राचीन विश्वविद्यालयों का स्मरण कराया और आर्यभट्ट, चरक, सुश्रुत, चाणक्य, भास्कराचार्य जैसे महान ऋप्तों को संस्कृत की ही देन बताया।

केंद्र व राज्य सरकार की संस्कृत प्रोत्साहन योजनाएँ
– नई शिक्षा नीति-2020 में संस्कृत को तीन भाषा फॉर्मूले में प्रमुखता
– ई-लर्निंग प्लेटफॉर्म, मोबाइल ऐप्स के माध्यम से संस्कृत को युवा पीढ़ी तक पहुँच
– लोकसभा में कार्यवाही का संस्कृत अनुवाद शुरू
– कर्नाटक के मट्टूरु गाँव की तरह बोलचाल की भाषा बनाने का संकल्प

उत्तराखंड सरकार की पहलें सराहनीय

मुख्यमंत्री ने राज्य में संस्कृत के लिए चल रही योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी:
– गार्गी पुरस्कार : संस्कृत स्कूलों की बालिकाओं को ₹251 प्रतिमाह छात्रवृत्ति
– डॉ. अंबेडकर योजना : एससी/एसटी संस्कृत छात्रों को समान सहायता
– संस्कृत छात्र प्रतिभा सम्मान : हाईस्कूल-इंटर टॉपर को ₹5100 तक नकद पुरस्कार
– प्रत्येक जिले में एक-एक “आदर्श संस्कृत ग्राम” स्थापित करने का लक्ष्य
– उत्तराखंड संस्कृत अकादमी द्वारा निरंतर शोध सम्मेलन, वेद सम्मेलन, शिक्षक प्रशिक्षण कार्यशालाएँ

भविष्य का संकल्प : संस्कृत बने जन-जन की भाषा
मुख्यमंत्री ने अंत में आशा व्यक्त की कि जिस देवभूमि उत्तराखंड ने वेद-उपनिषदों को जन्म दिया, उसी पावन भूमि से संस्कृत पुनः जनसामान्य की बोलचाल की भाषा बनेगी। उन्होंने कहा, “संस्कृत केवल मंत्र-पाठ की भाषा नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला और वैश्विक बंधुत्व का संदेश है।”

कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’, विधायक आदेश चौहान, स्वामी यतीश्वरानंद, विदेश मंत्रालय की सचिव मीना मल्होत्रा, संस्कृत विश्वविद्यालयों के कुलपति एवं सैकड़ों विद्वान उपस्थित रहे।

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