रुद्रप्रयाग में यूसीसी भी बाल विवाह पर रोक नहीं लगा पा रहा, दो दिनों में दूसरा मामला रोका

रुद्रप्रयाग: उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में बाल विवाह की कुप्रथा अभी भी पूरी तरह थम नहीं पाई है। व्यापक जागरूकता अभियानों, कानूनी प्रावधानों और समान नागरिक संहिता (यूसीसी) जैसे सख्त कानून के बावजूद इस समस्या ने जिला प्रशासन और महिला एवं बाल विकास विभाग की चिंता बढ़ा दी है। महज दो दिनों के अंदर बाल विवाह का दूसरा मामला सामने आया, जिसे विभाग की त्वरित कार्रवाई से समय रहते रोक दिया गया।

ताजा मामला और विभाग की तत्परता

इस बार खुद नाबालिग बालिका ने साहस दिखाते हुए चाइल्ड हेल्पलाइन पर फोन कर अपने विवाह की सूचना दी। सूचना मिलते ही महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग की टीम अलर्ट हो गई। जिला कार्यक्रम अधिकारी अखिलेश कुमार मिश्रा के निर्देश पर वन स्टॉप सेंटर, बाल कल्याण समिति और चाइल्ड हेल्पलाइन की संयुक्त टीम तुरंत मौके पर पहुंची।

टीम में शामिल प्रमुख सदस्य:

  • केंद्र प्रशासक रंजना गैरोला भट्ट
  • बाल कल्याण समिति अध्यक्ष रंजू खन्ना
  • सदस्य ममता शैली, दलवीर सिंह रावत
  • केस वर्कर अखिलेश, सामाजिक कार्यकर्ता पूजा भंडारी
  • तिलवाड़ा चौकी से कांस्टेबल डीसी पुरोहित

शुरुआत में परिजनों ने टीम को गुमराह करने की कोशिश की, लेकिन सख्त पूछताछ के बाद सच्चाई सामने आ गई। बालिका की मां ने बताया कि देहरादून में रहने वाले पड़ोसी युवक से लड़की का प्रेम प्रसंग था। युवक की नशे की लत और लड़की द्वारा घर से भागने की धमकी के चलते परिवार ने जल्दबाजी में विवाह तय कर दिया था। विवाह उसी रात गुपचुप तरीके से सीमित लोगों के बीच प्रस्तावित था।

कानूनी चेतावनी और विवाह रुकवाया

टीम ने परिजनों को बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम की जानकारी दी और स्पष्ट किया कि इस अपराध में 2 वर्ष तक की कैद तथा 1 लाख रुपये तक का जुर्माना लग सकता है। साथ ही समान नागरिक संहिता (UCC) के प्रावधानों की भी जानकारी दी गई। इसके बाद परिजनों ने लड़के के पक्ष से संपर्क कर बारात न भेजने का फैसला लिया और विवाह रोक दिया गया।

जिले में चिंताजनक आंकड़े

  • इस साल अब तक 26 बाल विवाह रोके जा चुके हैं।
  • पहाड़ी जिलों में यह समस्या विशेष रूप से गंभीर है।
  • रुद्रप्रयाग और पिथौरागढ़ में बाल विवाह के मामले सबसे अधिक दर्ज किए जा रहे हैं।

बाल विवाह के दुष्परिणाम

बाल विवाह से नाबालिग लड़कियां शारीरिक, मानसिक और सामाजिक रूप से गंभीर समस्याओं का सामना करती हैं। अपरिपक्व उम्र में विवाह के कारण शिक्षा छूटना, स्वास्थ्य समस्याएं, घरेलू हिंसा और कई अन्य जटिलताएं उत्पन्न होती हैं।

विभागीय अधिकारियों ने कहा कि जागरूकता अभियान और कानूनी सख्ती के बावजूद सामाजिक सोच में बदलाव लाने की जरूरत है। उन्होंने आमजन से अपील की कि बाल विवाह की किसी भी सूचना पर तुरंत चाइल्ड हेल्पलाइन (1098) या स्थानीय प्रशासन से संपर्क करें।

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