डॉ. कुमार विश्वास पहुंचे दून के लेखक गांव, कविता और संस्कृति से युवाओं को किया प्रेरित

“मैं तुम्हें सपने देने आया हूं, बेचने नहीं” — डॉ. कुमार विश्वास

देहरादून। प्रख्यात कवि एवं कथावाचक डॉ. कुमार विश्वास ने देहरादून के थानो स्थित देश के पहले “लेखक गांव” में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में युवाओं को साहित्य, संस्कृति और भारतीय संवेदनाओं से जुड़ने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि लेखक गांव केवल एक भौतिक स्थान नहीं, बल्कि भारतीय साहित्य और संस्कृति का जीवंत केंद्र बनता जा रहा है, जहां नई पीढ़ी अपनी जड़ों से जुड़ना सीख रही है।

डॉ. कुमार विश्वास ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा, “मैं तुम्हें सपने देने आया हूं, बेचने नहीं। लेखक गांव जैसे स्थान ही उन सपनों को संस्कार और दिशा देते हैं।”

सुमित्रानंदन पंत जयंती पर आयोजित हुई राष्ट्रीय संगोष्ठी

प्रकृति के सुकुमार कवि एवं छायावाद के प्रमुख स्तंभ सुमित्रानंदन पंत की जयंती के अवसर पर लेखक गांव स्थित नालंदा पुस्तकालय और अटल प्रेक्षागृह में “सुमित्रानंदन पंत साहित्य पर्यटन पथ” विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया।

यह कार्यक्रम उत्तराखंड भाषा संस्थान, उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय एवं लेखक गांव के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुआ।

बाल कवियों ने किया भावपूर्ण काव्य पाठ

कार्यक्रम के प्रथम सत्र का आयोजन नालंदा पुस्तकालय में किया गया, जहां बाल कवियों द्वारा सुमित्रानंदन पंत की कविताओं का भावपूर्ण पाठ प्रस्तुत किया गया। इसके बाद अटल प्रेक्षागृह में आयोजित द्वितीय सत्र का शुभारंभ दीप प्रज्वलन और बच्चों द्वारा लेखक गांव के कुलगीत “लेखक गांव हमारा है” के सामूहिक गायन से हुआ।

इस दौरान “सुमित्रानंदन पंत साहित्य पर्यटन पथ” पर आधारित एक लघु वृत्तचित्र का प्रदर्शन भी किया गया, जिसने उपस्थित साहित्य प्रेमियों को विशेष रूप से प्रभावित किया।

“एक कविता लिखने से पहले हजार कविताएं पढ़िए”

मुख्य अतिथि डॉ. कुमार विश्वास ने अपने संबोधन में युवाओं को साहित्य पढ़ने की प्रेरणा देते हुए कहा, “यदि आपको एक कविता लिखनी है तो पहले हजार कविताएं पढ़नी होंगी।”

उन्होंने मोबाइल और सोशल मीडिया पर अत्यधिक समय बिताने की प्रवृत्ति पर चिंता व्यक्त करते हुए युवाओं से पुस्तकों और साहित्य के साथ अधिक समय बिताने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आज बड़ी संख्या में युवा भारतीय संस्कृति और साहित्य की ओर लौट रहे हैं और लेखक गांव इस सकारात्मक परिवर्तन का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभर रहा है।

“पंत जी ने प्रकृति को केवल देखा नहीं, जिया”

सुमित्रानंदन पंत को स्मरण करते हुए कुमार विश्वास ने कहा कि पंत जी ने अपनी कविताओं में प्रकृति को केवल देखा नहीं, बल्कि उसे जिया है। उन्होंने कहा कि प्रयाग में रहने के बावजूद पंत जी के भीतर उत्तराखंड हिमालय की आत्मा सदैव जीवित रही।

उन्होंने लेखक गांव द्वारा पंत जी की साहित्यिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के प्रयास को अत्यंत सराहनीय बताया।

“लेखक गांव साहित्यिक पर्यटन का नया केंद्र”

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं लेखक गांव के संस्थापक डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने कहा कि सुमित्रानंदन पंत का साहित्य भारतीय चिंतन, प्रकृति और मानवीय मूल्यों का जीवंत दस्तावेज है।

उन्होंने कहा कि पंत जी की रचनाओं में हिमालय की चेतना, प्रकृति की पवित्रता और भारतीय संस्कृति की आत्मा समाहित है। लेखक गांव उसी साहित्यिक परंपरा को आगे बढ़ाने का सशक्त प्रयास है।

निशंक ने कहा कि “सुमित्रानंदन पंत साहित्य पर्यटन पथ” केवल पर्यटन परियोजना नहीं, बल्कि भारतीय साहित्यिक धरोहर को जन-जन तक पहुंचाने का अभिनव अभियान है।

साहित्य और प्रकृति का गहरा संबंध

विशिष्ट अतिथि एवं पर्यावरणविद् कल्याण सिंह रावत ने कहा कि साहित्य और प्रकृति का संबंध अत्यंत गहरा है तथा उत्तराखंड की सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत के संरक्षण में साहित्यकारों की महत्वपूर्ण भूमिका है।

वहीं, डॉ. मायावती ढकरियाल ने बच्चों से पंत जी के जीवन से प्रेरणा लेकर अध्ययन, साहित्य और रचनात्मकता के क्षेत्र में आगे बढ़ने का आह्वान किया।

काव्य पाठ ने बांधा समां

कार्यक्रम के तृतीय सत्र में काव्य पाठ आयोजित किया गया, जिसमें भारती मिश्र, डॉ. समा कौशिक, यामा शर्मा, डॉ. उषा झा, मणिक अग्रवाल, विजय तौरी, प्रीति मनराल, हरेन्द्र नेगी ‘तेजांश’ और डॉ. दिनेश शर्मा सहित कई कवियों ने अपनी रचनाओं की प्रस्तुति दी।

इस अवसर पर डॉ. कमला पंत, डॉ. विद्या सिंह, डॉ. शशांक शुक्ला और संजय महर ने भी बच्चों को संबोधित करते हुए सुमित्रानंदन पंत की साहित्यिक विरासत को याद किया।

देशभर से साहित्यकारों और शिक्षाविदों ने की सहभागिता

कार्यक्रम का संयोजन पूजा पोखरियाल ने किया जबकि संचालन डॉ. बीना बेंजवाल और मोनिका शर्मा द्वारा किया गया।

इस अवसर पर भारतीय अभिनेत्री एवं फिल्म निर्माता डॉ. आरुषि निशंक, राज्य मंत्री ओमप्रकाश जमदग्नि, प्रो. प्रदीप भारद्वाज, डॉ. राकेश सुन्दरियाल, डॉ. बेचैन कंडियाल और अनिल शर्मा सहित देशभर से साहित्यकारों, शिक्षाविदों और युवा रचनाकारों ने सहभागिता की।

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