पर्यटन सीजन के बीच कूड़े के ढेरों से बिगड़ रही शहर की सूरत, मानसून से पहले जलभराव और आपदा का बढ़ा खतरा
मसूरी। पर्यटन सीजन के चरम पर पहुंचने के साथ ही पहाड़ों की रानी मसूरी की सफाई व्यवस्था सवालों के घेरे में आ गई है। एक ओर शहर में बड़ी संख्या में पर्यटकों की आमद हो रही है, वहीं दूसरी ओर जगह-जगह लगे कूड़े के ढेर, चोक नाले और अव्यवस्थित सफाई व्यवस्था स्थानीय लोगों एवं पर्यटकों के लिए परेशानी का कारण बन रही है। बढ़ती गर्मी के बीच कूड़े से उठ रही दुर्गंध और नालों में जमा गंदगी शहर की छवि को प्रभावित कर रही है।
पर्यटन सीजन में कूड़े के ढेरों से बढ़ी परेशानी
इन दिनों मसूरी में पर्यटकों की भारी भीड़ उमड़ रही है, लेकिन शहर के कई क्षेत्रों में कूड़ा समय पर नहीं उठाए जाने से हालात बिगड़ते नजर आ रहे हैं। सड़क किनारे जमा कूड़े के ढेर न केवल शहर की सुंदरता को प्रभावित कर रहे हैं, बल्कि दुर्गंध और संक्रमण की आशंका भी बढ़ा रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले वर्ष कूड़ा प्रबंधन का कार्य संभाल रही संस्था के कार्यकाल में ऐसी समस्याएं कम देखने को मिली थीं, लेकिन वर्तमान में कार्य कर रही एजेंसी पर पर्याप्त ध्यान न देने के आरोप लग रहे हैं। लोगों का कहना है कि अधिक भुगतान के बावजूद सफाई व्यवस्था अपेक्षित स्तर पर नहीं पहुंच पा रही है।
नालों में डाला जा रहा कूड़ा, बरसात में बढ़ सकता है संकट
शहर के विभिन्न क्षेत्रों में नालों और खालों की स्थिति भी चिंताजनक बनी हुई है। कई स्थानों पर सफाई कर्मियों द्वारा कूड़ा नालों के किनारे अथवा भीतर ही डाल दिया जाता है, जिससे अधिकांश नाले गंदगी से पट गए हैं।
विशेषज्ञों और स्थानीय नागरिकों का मानना है कि यदि समय रहते इन नालों की सफाई नहीं की गई तो मानसून के दौरान जलभराव, सड़क क्षति और बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ सकता है।
प्री-मानसून बारिश ने खोली व्यवस्थाओं की पोल
हाल के दिनों में हुई बारिश और ओलावृष्टि ने शहर की जल निकासी व्यवस्था की कमजोरियों को उजागर कर दिया है। कई स्थानों पर बंद पड़े नालों का पानी और मलबा सड़कों पर बहता दिखाई दिया। माल रोड सहित कई प्रमुख मार्गों पर जलभराव की स्थिति बनी, जिससे राहगीरों और पर्यटकों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।
कई स्थानों पर सड़कों पर बहता पानी अस्थायी नालों का रूप ले चुका है, जिससे पैदल चलना भी मुश्किल हो रहा है।
अतिक्रमण और मलबा बने बड़ी समस्या
नगर पालिका ने पूर्व में नाले-खालों को अतिक्रमण मुक्त करने की घोषणा की थी, लेकिन अब तक सीमित कार्रवाई ही हो सकी है। शहर के अनेक नालों पर अतिक्रमण होने के साथ-साथ उनमें निर्माण सामग्री और मलबा भी डाला जा रहा है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि बरसात के दौरान यही मलबा बहकर सड़कों पर आता है और यातायात बाधित होने के साथ-साथ दुर्घटनाओं का कारण भी बनता है।
पिछले वर्ष की आपदा से नहीं लिया गया सबक
स्थानीय लोगों ने चिंता जताते हुए कहा कि पिछले वर्ष आई भीषण आपदा में निर्माण मलबे और अवरुद्ध जल निकासी व्यवस्था की बड़ी भूमिका रही थी। बारिश का पानी मलबे को साथ लेकर बहा और कई क्षेत्रों में नुकसान पहुंचा।
लोगों का आरोप है कि आपदा के बाद स्थायी समाधान की दिशा में अपेक्षित कार्य नहीं किए गए और केवल मलबा हटाकर औपचारिकता पूरी कर दी गई। ऐसे में आगामी मानसून के दौरान फिर से खतरे की आशंका बनी हुई है।
ब्रिटिश कालीन नाले हुए चोक
मसूरी में ब्रिटिश काल के दौरान निर्मित कई नाले आज भी जल निकासी का प्रमुख आधार हैं, लेकिन वर्षों से पर्याप्त सफाई और रखरखाव नहीं होने के कारण इनमें से अधिकांश चोक हो चुके हैं।
स्थानीय लोगों का सुझाव है कि नगर पालिका को ईको टैक्स और अन्य स्रोतों से प्राप्त राजस्व का उपयोग कर इन ऐतिहासिक जल निकासी तंत्रों को पुनर्जीवित करना चाहिए, जिससे शहर को जलभराव की समस्या से राहत मिल सके।
पालिकाध्यक्ष और विभागों ने दिया कार्रवाई का आश्वासन
नगर पालिका अध्यक्ष मीरा सकलानी ने कहा कि शहर में जाम की स्थिति के कारण कूड़ा ढोने वाले वाहन समय पर डंपिंग स्थल तक नहीं पहुंच पा रहे हैं, जिससे कुछ क्षेत्रों में कूड़ा उठाने में देरी हो रही है। उन्होंने संबंधित संस्था को सफाई व्यवस्था सुधारने के निर्देश देने की बात कही।
उन्होंने यह भी बताया कि कई नालों में जल संस्थान और जल निगम की पाइपलाइनें बिछी होने के कारण सफाई कार्य में तकनीकी दिक्कतें आ रही हैं। इस संबंध में संबंधित विभागों के साथ लगातार पत्राचार किया जा रहा है।
वहीं लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता राजेश कुमार ने कहा कि जल्द ही नालों की व्यापक सफाई शुरू की जाएगी। उन्होंने बताया कि माल रोड सहित प्रमुख क्षेत्रों के नालों को बिना सड़क खोदे साफ करने की योजना पर कार्य किया जा रहा है ताकि आम जनता को असुविधा न हो।