NEET मुद्दे और छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के विरोध में प्रधानमंत्री आवास की ओर बढ़ा विपक्ष, दिल्ली पुलिस ने रोका प्रदर्शन
नई दिल्ली, आजखबर। राष्ट्रीय राजधानी में मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सरकारी आवास 7, लोक कल्याण मार्ग के बाहर उस समय राजनीतिक हलचल तेज हो गई, जब कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में निकाला गया यह विरोध मार्च छात्रों के आंदोलन और संसद मार्च के दौरान पुलिस कार्रवाई के विरोध में आयोजित किया गया था। हालांकि, प्रदर्शनकारियों को प्रधानमंत्री आवास तक पहुंचने से पहले ही दिल्ली पुलिस ने रोक दिया और राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव सहित कई नेताओं को हिरासत में ले लिया।
विपक्ष के शीर्ष नेताओं ने संभाली प्रदर्शन की कमान
प्रदर्शन में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा, वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा, पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा, कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार सहित अनेक वरिष्ठ नेता शामिल हुए। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव भी विरोध स्थल पर पहुंचे और कांग्रेस के आंदोलन का समर्थन किया।
राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर छात्रों की आवाज दबाने का आरोप लगाते हुए कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन कर रहे युवाओं पर पुलिस बल का प्रयोग स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की मांग की।
प्रधानमंत्री आवास के बाहर भारी सुरक्षा व्यवस्था
प्रधानमंत्री आवास के आसपास बड़ी संख्या में पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई थी। जैसे ही कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता प्रधानमंत्री आवास की ओर बढ़ने लगे, दिल्ली पुलिस ने उन्हें रोक दिया। बैरिकेडिंग कर प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोका गया, जिसके बाद मौके पर धक्का-मुक्की और नारेबाजी का माहौल बन गया।
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने राहुल गांधी, अखिलेश यादव और अन्य नेताओं को हिरासत में लेकर वहां से हटाया। पूरे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई ताकि किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो।
राहुल गांधी ने उठाई तीन प्रमुख मांगें
प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी ने कहा कि सरकार छात्रों के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर गंभीर नहीं है। उन्होंने तीन प्रमुख मांगें रखीं—
- संसद में NEET परीक्षा और छात्रों से जुड़े मुद्दों पर विस्तृत चर्चा कराई जाए।
- केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दें।
- छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
राहुल गांधी ने कहा कि लोकतंत्र में छात्रों की आवाज दबाना सरकार की असफलता का प्रमाण है और विपक्ष इस मुद्दे को संसद से लेकर सड़क तक उठाता रहेगा।
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने की बातचीत
प्रदर्शन के दौरान केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने राहुल गांधी से मुलाकात कर धरना समाप्त करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आवास के बाहर प्रदर्शन के लिए अनुमति नहीं है और इससे आम जनता को भी असुविधा हो रही है।
डॉ. सिंह के अनुसार, सरकार ने विपक्ष को आश्वस्त किया कि संसद में NEET और छात्रों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा कराने के लिए सकारात्मक पहल की जाएगी। उन्होंने बताया कि सरकार के शीर्ष नेतृत्व से बातचीत के बाद यह भरोसा दिया गया, लेकिन राहुल गांधी ने इसके साथ केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की अतिरिक्त मांग भी रख दी और दोनों मांगें पूरी होने तक आंदोलन समाप्त करने से इनकार कर दिया।
AAP ने भाजपा और कांग्रेस पर साधा निशाना
इस घटनाक्रम के बीच आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस और भाजपा दोनों पर सवाल उठाए। दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री एवं वरिष्ठ आप नेता आतिशी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर आरोप लगाया कि केंद्र सरकार कांग्रेस के साथ अलग व्यवहार कर रही है।
उन्होंने कहा कि सोनम वांगचुक और छात्रों से जुड़े संगठनों ने जंतर-मंतर पर लगभग एक महीने तक शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया, लेकिन सरकार ने उनसे बातचीत नहीं की। वहीं, राहुल गांधी के प्रधानमंत्री आवास के बाहर प्रदर्शन शुरू करने के कुछ ही समय बाद सरकार बातचीत के लिए तैयार हो गई। आतिशी ने इसे भाजपा और कांग्रेस के बीच “जुगलबंदी” बताते हुए दोनों दलों पर राजनीतिक समझौते का आरोप लगाया।
राजनीतिक माहौल हुआ गर्म
प्रधानमंत्री आवास के बाहर हुए इस प्रदर्शन के बाद राष्ट्रीय राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। कांग्रेस जहां इसे छात्रों के अधिकारों और लोकतांत्रिक मूल्यों की लड़ाई बता रही है, वहीं भाजपा का कहना है कि विपक्ष केवल राजनीतिक लाभ लेने के लिए संवेदनशील मुद्दों का इस्तेमाल कर रहा है।
अब इस पूरे घटनाक्रम के बाद संसद के आगामी सत्र में NEET परीक्षा, छात्रों के आंदोलन और शिक्षा व्यवस्था को लेकर तीखी बहस होने की संभावना बढ़ गई है।