लंढौर कब्रिस्तान में प्रशासन ने की ध्वस्तीकरण की कार्रवाई, समुदाय विशेष ने जताया विरोध, एसडीएम बोले— बार-बार नोटिस के बावजूद नहीं मिले वैध दस्तावेज
मसूरी। मसूरी के टिहरी बाईपास रोड स्थित लंढौर कब्रिस्तान में नगर पालिका की भूमि पर अवैध रूप से निर्मित मजारनुमा धार्मिक संरचना को प्रशासन ने भारी पुलिस बल की मौजूदगी में ध्वस्त कर दिया। यह कार्रवाई एसडीएम के आदेश पर नगर पालिका, राजस्व विभाग और पुलिस प्रशासन की संयुक्त टीम द्वारा की गई। ध्वस्तीकरण के दौरान समुदाय विशेष के लोगों ने मौके पर पहुंचकर विरोध जताया और कार्रवाई को अनुचित बताया, जबकि प्रशासन का कहना है कि पर्याप्त समय और कई नोटिस देने के बावजूद संबंधित पक्ष कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका।
सुबह से ही सुरक्षा के कड़े इंतजाम
ध्वस्तीकरण अभियान के लिए रविवार सुबह से ही लंढौर कब्रिस्तान क्षेत्र में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए। मौके पर बड़ी संख्या में पुलिस बल, फायर सर्विस, राजस्व विभाग और नगर पालिका के अधिकारी तैनात रहे। नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी गौरव भसीन, नायब तहसीलदार उपेंद्र राणा, पुलिस क्षेत्राधिकारी (सीओ) जगदीश पंत तथा कोतवाल देवेंद्र चौहान की मौजूदगी में जेसीबी मशीनों की सहायता से मजारनुमा संरचना को ध्वस्त किया गया।
प्रशासन ने कार्रवाई के दौरान किसी भी व्यक्ति को ध्वस्तीकरण स्थल तक जाने की अनुमति नहीं दी। विरोध कर रहे लोगों को टिहरी बाईपास रोड पर ही रोक दिया गया, जिससे क्षेत्र में तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रित स्थिति बनी रही।
समुदाय विशेष ने जताया कड़ा विरोध
ध्वस्तीकरण के दौरान समुदाय विशेष के बड़ी संख्या में महिला और पुरुष मौके पर पहुंचे और प्रशासन के निर्णय का विरोध किया। उनका कहना था कि जिस निर्माण को मजार बताया जा रहा है, वह वास्तव में कब्रिस्तान में उपयोग होने वाले सामान को रखने के लिए बनाया गया कमरा था और यह कई दशकों से अस्तित्व में है।
स्थानीय निवासी इस्लाम अहमद ने दावा किया कि संबंधित भूमि और निर्माण के सभी दस्तावेज उनके पास उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि प्रशासन ने पहले निर्माण पर बने गुंबद को हटाने के लिए कहा था, जिसे हटाकर इसकी सूचना जिलाधिकारी और एसडीएम को दे दी गई थी। इसके बावजूद पूरी संरचना को तोड़ दिया गया।
ऐतिहासिक दस्तावेजों का दिया हवाला
समुदाय के प्रतिनिधि कामिल अली ने कहा कि लंढौर का यह कब्रिस्तान अत्यंत प्राचीन है और यहां महान स्वतंत्रता सेनानी अब्बास तैयब की कब्र भी स्थित है। उनके अनुसार प्रशासन को वर्ष 1929 के सर्वे ऑफ इंडिया के नक्शे सहित अनेक पुराने अभिलेख उपलब्ध कराए गए थे, जिनमें यह निर्माण दर्शाया गया है।
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन ने पहले आश्वासन दिया था कि केवल मीनार हटाई जाएगी और शेष निर्माण सुरक्षित रहेगा, लेकिन बाद में पूरी संरचना ध्वस्त कर दी गई।
वक्फ बोर्ड ने भी पेश किए पुराने अभिलेख
वक्फ बोर्ड के सचिव शाहित मंसूरी ने दावा किया कि उनके पास वर्ष 1914 के छावनी परिषद के नक्शे, वर्ष 1920 के ब्रिटिश शासनकाल के अभिलेख, वर्ष 1962 के सर्वे रिकॉर्ड तथा वक्फ बोर्ड से संबंधित प्रमाणपत्र मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि संबंधित संपत्ति वक्फ बोर्ड की संपत्ति का हिस्सा है और उसकी खरीद-फरोख्त से जुड़े दस्तावेज तथा रजिस्ट्री भी उपलब्ध हैं।
उनका कहना था कि प्रशासन को सभी दस्तावेज उपलब्ध कराए गए, लेकिन इसके बावजूद कार्रवाई की गई। उन्होंने संकेत दिया कि मामले को न्यायालय में चुनौती दी जाएगी।
“दो सौ वर्ष पुराना कब्रिस्तान”
मौलाना दानिश ने प्रशासन की कार्रवाई को उत्पीड़न बताते हुए कहा कि यह लगभग दो सौ वर्ष पुराना कब्रिस्तान है, जहां समुदाय के पूर्वजों की कब्रें मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन उनकी बात नहीं सुनता, तो न्यायालय की शरण लेना मजबूरी होगी।
प्रशासन का पक्ष: दो माह तक दिया गया अवसर
ध्वस्तीकरण के बाद एसडीएम राहुल आनंद ने स्पष्ट किया कि प्रशासन ने किसी भी प्रकार की जल्दबाजी नहीं की। उन्होंने बताया कि लगभग दो माह पूर्व कब्रिस्तान समिति के अध्यक्ष को नोटिस जारी कर संबंधित निर्माण के स्वामित्व एवं वैधता से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए थे।
उन्होंने कहा कि 21 मई को पहला नोटिस जारी किया गया था, लेकिन उसका कोई उत्तर प्राप्त नहीं हुआ। इसके बाद कई बार व्यक्तिगत रूप से संपर्क करने का प्रयास किया गया, फिर भी कोई वैध अभिलेख प्रस्तुत नहीं किए गए।
संयुक्त निरीक्षण में नगर पालिका की भूमि मिली
एसडीएम के अनुसार 23 जून को नगर पालिका, राजस्व विभाग तथा उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के प्रतिनिधियों द्वारा संयुक्त निरीक्षण किया गया। जांच में संबंधित भूमि नगर पालिका की सार्वजनिक संपत्ति पाई गई।
इसके बाद 24 जून को पुनः नोटिस जारी कर तीन दिन के भीतर स्वयं निर्माण हटाने के निर्देश दिए गए थे। नोटिस में स्पष्ट किया गया था कि यदि समिति स्वयं कार्रवाई नहीं करती, तो प्रशासन ध्वस्तीकरण करेगा और उसका पूरा खर्च संबंधित समिति से वसूला जाएगा।
सभी विभागों की जांच के बाद हुई कार्रवाई
एसडीएम राहुल आनंद ने बताया कि नगर पालिका, राजस्व विभाग, वन विभाग, छावनी परिषद और अन्य संबंधित विभागों ने संयुक्त रूप से भूमि का परीक्षण किया। जांच में यह सार्वजनिक भूमि पाई गई, जिसके आधार पर नियमानुसार ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई।
उन्होंने कहा कि संबंधित पक्ष को दो माह से अधिक समय दिया गया था, लेकिन कोई प्रमाणित दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए। ऐसे में प्रशासन के पास कार्रवाई करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा।
क्षेत्र में रही शांति
हालांकि कार्रवाई के दौरान विरोध और बहस का माहौल रहा, लेकिन भारी पुलिस बल की तैनाती के कारण स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में रही। प्रशासन ने किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए पूरे क्षेत्र की निगरानी की और ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया शांतिपूर्वक पूरी कराई।