एशिया कप 2025: भारत ने पाकिस्तान से हाथ क्यों नहीं मिलाया? गौतम गंभीर की सलाह और पहलगाम हमले की छाया

दुबई में भारत-पाक मुकाबला: जीत के बाद ‘हैंडशेक’ विवाद

दुबई, 15 सितंबर 2025: एशिया कप 2025 के ग्रुप ए मैच में भारत ने पाकिस्तान को 7 विकेट से करारी शिकस्त दी, लेकिन मैच के बाद भारतीय खिलाड़ियों का पाकिस्तानी टीम से हाथ न मिलाना सुर्खियों में छा गया। कप्तान सूर्यकुमार यादव ने न तो टॉस के समय और न ही मैच के बाद पाकिस्तानी कप्तान सलमान अली आगा से हाथ मिलाया। जब पाकिस्तानी खिलाड़ी भारतीय ड्रेसिंग रूम पहुंचे, तो दरवाजा उनके सामने बंद कर दिया गया। यह फैसला मुख्य कोच गौतम गंभीर की सलाह पर लिया गया, जिसका मकसद पहलगाम आतंकी हमले के शिकारों के प्रति एकजुटता दिखाना और पाकिस्तान को कड़ा राजनीतिक संदेश देना था।

गौतम गंभीर का निर्देश: ‘पहलगाम को मत भूलो’

टेलीकॉम एशिया स्पोर्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार, गंभीर ने मैच से पहले टीम मीटिंग में खिलाड़ियों को स्पष्ट निर्देश दिए: “सोशल मीडिया का शोर बंद करो, हाथ मत मिलाओ, बातचीत मत करो—बस मैदान पर जाओ, अपना सर्वश्रेष्ठ दो और भारत के लिए जीतो। पहलगाम में जो हुआ, उसे मत भूलना।” यह निर्देश अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले की पृष्ठभूमि में था, जिसमें 26 नागरिक मारे गए थे और जिसके लिए भारत ने पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद को जिम्मेदार ठहराया था। गंभीर ने जीत को भारतीय सशस्त्र बलों और पहलगाम के शिकारों को समर्पित किया।

पहलगाम हमले का प्रभाव: खेल में कूटनीति

पहलगाम हमले के बाद भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत 7 मई 2025 को पाकिस्तान के मुरिदके में लश्कर-ए-तैयबा के ठिकानों पर सैन्य कार्रवाई की थी। इस हमले ने दोनों देशों के बीच तनाव को चरम पर पहुंचा दिया। गंभीर ने इस घटना को केंद्र में रखते हुए खिलाड़ियों से कहा कि यह केवल क्रिकेट नहीं, बल्कि राष्ट्रीय गौरव और शहीदों के प्रति सम्मान का सवाल है। सूर्यकुमार ने प्रेजेंटेशन समारोह में कहा, “हम पहलगाम के पीड़ितों के साथ हैं। यह जीत भारतीय सशस्त्र बलों को समर्पित है।” इस कदम को भारत की ओर से खेल के मैदान पर कूटनीतिक संदेश देने की कोशिश माना जा रहा है।

मैच का सारांश: भारत की एकतरफा जीत

दुबई इंटरनेशनल स्टेडियम में खेले गए इस मैच में पाकिस्तान ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 127/9 रन बनाए। भारत ने सूर्यकुमार यादव (47* रन, 37 गेंद) और शिवम दुबे (35* रन) की शानदार पारियों की बदौलत 15.5 ओवर में 3 विकेट खोकर लक्ष्य हासिल कर लिया। अर्शदीप सिंह (3/19) और हार्दिक पांड्या (2/15) ने गेंदबाजी में कमाल दिखाया। हालांकि, क्रिकेट से ज्यादा चर्चा ‘नो हैंडशेक’ विवाद की रही।

टॉस से ही तनाव: कोई आंखें नहीं मिलीं

टॉस के दौरान सूर्यकुमार और सलमान अली आगा के बीच कोई हैंडशेक या आंखों का संपर्क तक नहीं हुआ। सलमान ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी चुनी, लेकिन दोनों कप्तानों की ठंडी प्रतिक्रिया ने माहौल को पहले ही गर्म कर दिया। फील्डिंग कोच रयान टेन डोशेट ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में खुलासा किया कि इस मुद्दे पर सुबह ही चर्चा हो गई थी। गंभीर ने कहा था, “बाहरी शोर से परे रहो, जो नियंत्रण में न हो उसकी चिंता मत करो।”

पाकिस्तान की नाराजगी: ड्रेसिंग रूम का अपमान

मैच के बाद पाकिस्तानी खिलाड़ी भारतीय ड्रेसिंग रूम पहुंचे, लेकिन दरवाजा बंद होने से उन्हें अपमानित महसूस हुआ। पाकिस्तान के कोच जेसन गिलेस्पी ने इसे “खेल भावना के खिलाफ” बताया, जबकि कप्तान सलमान अली आगा ने पोस्ट-मैच प्रेजेंटेशन का बहिष्कार कर दिया। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) चेयरमैन मोहसिन नकवी ने एक्स पर लिखा, “यह क्रिकेट नहीं, अनावश्यक तनाव पैदा करना है।” कुछ पाकिस्तानी फैंस ने इसे “शर्मनाक” करार दिया, जबकि अन्य ने भारतीय टीम के रुख को समझने की कोशिश की।

सोशल मीडिया पर तीखी बहस: राष्ट्रवाद बनाम खेल भावना

एक्स पर यह मुद्दा वायरल हो गया। भारतीय फैंस ने इसे राष्ट्रीय गौरव और पहलगाम शहीदों के प्रति सम्मान का प्रतीक बताया। एक यूजर ने लिखा, “गंभीर ने सही किया। आतंकवाद का समर्थन करने वालों से हाथ क्यों मिलाएं?” वहीं, कुछ ने खेल भावना पर सवाल उठाए। पूर्व क्रिकेटर मनोज तिवारी ने गंभीर की आलोचना करते हुए कहा, “अगर पाकिस्तान से खेलना गलत है, तो गंभीर कोच क्यों बने? इस्तीफा दें।” हालांकि, अधिकांश भारतीय फैंस ने गंभीर और सूर्यकुमार के फैसले का समर्थन किया।

गंभीर का पुराना रुख: पाकिस्तान से क्रिकेट न खेलें

गंभीर लंबे समय से भारत-पाक क्रिकेट के खिलाफ रहे हैं। पहलगाम हमले के बाद उन्होंने कहा था, “जब तक पाकिस्तान आतंकवाद को बढ़ावा देता है, क्रिकेट नहीं खेलना चाहिए।” तिवारी ने इसे “पाखंड” कहा, क्योंकि गंभीर अब कोच के रूप में एशिया कप में हिस्सा ले रहे हैं। गंभीर ने जवाब में स्पष्ट किया कि यह फैसला पूरी टीम का था और राष्ट्रीय भावना से प्रेरित था।

बीसीसीआई और सरकार का रुख

फील्डिंग कोच रयान टेन डोशेट ने कहा कि बीसीसीआई ने सरकार के निर्देशों का पालन किया। भारत सरकार ने पहलगाम हमले के बाद स्पष्ट किया था कि क्रिकेट जैसे मंचों का इस्तेमाल कूटनीतिक संदेश देने के लिए किया जाएगा। बीसीसीआई सचिव जय शाह ने कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया, लेकिन सूत्रों के मुताबिक, बोर्ड ने गंभीर के फैसले का समर्थन किया।

क्रिकेट में राष्ट्रवाद का नया अध्याय

यह ‘नो हैंडशेक’ विवाद क्रिकेट के मैदान पर राष्ट्रवाद और कूटनीति का प्रतीक बन गया है। गंभीर के नेतृत्व में भारतीय टीम ने खेल को केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे राष्ट्रीय सम्मान और शहीदों के प्रति एकजुटता दिखाने का मंच बनाया। हालांकि, यह कदम भारत-पाक क्रिकेट संबंधों को और तनावपूर्ण बना सकता है, खासकर तब जब दोनों टीमें अगले चरण में फिर आमने-सामने हो सकती हैं।

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