देहरादून, 06 अक्टूबर 2025 उत्तराखंड सरकार ने बच्चों के स्वास्थ्य और सार्वजनिक कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए प्रतिबंधित कफ सिरप तथा संदिग्ध दवाओं के खिलाफ राज्यव्यापी सघन अभियान तेज कर दिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी तथा स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के कड़े निर्देशों पर खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफ.डी.ए.) की टीमें सभी जिलों में मेडिकल दुकानों, थोक विक्रेताओं तथा अस्पतालों की फार्मेसियों पर छापेमारी चला रही हैं। राजस्थान, मध्य प्रदेश, केरल तथा तमिलनाडु में कफ सिरप के सेवन से 20 से अधिक बच्चों की मौत की घटनाओं के बाद केंद्र सरकार की सलाह को तुरंत अमल में लाते हुए राज्य ने 63 औषधियों के नमूने जांच हेतु भेजे हैं। एफ.डी.ए. आयुक्त डॉ. आर. राजेश कुमार ने चिकित्सकों से अपील की है कि दो वर्ष से कम आयु के बच्चों को बिना सलाह कोई खांसी की दवा न दें। अपर आयुक्त ताजबर सिंह जग्गी ने सोमवार को पत्रकार वार्ता में अभियान की प्रगति बताते हुए कहा कि निर्माण इकाइयों से भी कच्चे माल के सैंपल लिए जा रहे हैं, ताकि उत्पादन स्तर पर गुणवत्ता सुनिश्चित हो।
केंद्र की सलाह का त्वरित कार्यान्वयन: विषैली दवाओं पर रोक, जनजागरूकता अभियान
केंद्र सरकार ने 4 अक्टूबर को जारी सलाह में डायथाइलीन ग्लाइकॉल जैसे विषैले रसायनों युक्त कफ सिरपों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया है। इसमें दो वर्ष से कम उम्र के बच्चों को बिना चिकित्सक की सलाह कोई खांसी-जुकाम की दवा न देने तथा पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों में इनका सामान्य उपयोग न करने का निर्देश है। केवल विशेषज्ञ की सलाह पर, सही खुराक और न्यूनतम अवधि के लिए ही उपयोग की अनुमति है।
स्वास्थ्य सचिव एवं एफ.डी.ए. आयुक्त डॉ. आर. राजेश कुमार ने सभी मुख्य चिकित्सा अधिकारियों (सीएमओ) को तत्काल आदेश जारी किया। उन्होंने कहा, “बच्चों की सुरक्षा और जनस्वास्थ्य से बड़ा कोई मुद्दा नहीं। औषधि निरीक्षकों को चरणबद्ध सैंपलिंग और लैब जांच का निर्देश है। दोषपूर्ण दवाएं बाजार से तुरंत हटाई जाएंगी।” कुमार ने चिकित्सकों से अपील की कि वे सलाह का पालन करें, क्योंकि डॉक्टरों द्वारा लिखी गई दवा दुकानदार बेचते हैं। “डॉक्टरों की जिम्मेदारी से अभियान सफल होगा,” उन्होंने जोर दिया।
राज्य सरकार ने जनजागरूकता अभियान भी शुरू किया है, जिसमें अभिभावकों को घरेलू उपचार (भाप, शहद) और डॉक्टर सलाह पर जोर दिया जा रहा है।
सघन छापेमारी का दायरा: 63 सैंपल लैब भेजे, निर्माण इकाइयों पर नजर
अपर आयुक्त एवं ड्रग कंट्रोलर ताजबर सिंह जग्गी के नेतृत्व में टीमें सक्रिय हैं। जग्गी ने पत्रकार वार्ता में बताया कि सोमवार तक 63 औषधियों के नमूने एकत्र हो चुके हैं, जिनकी जांच प्रगति पर है। छापे मेडिकल स्टोर्स, थोक विक्रेताओं और अस्पताल फार्मेसियों पर हो रहे हैं। निर्माण कंपनियों से पॉलीइथाइलीन ग्लाइकॉल, सॉर्बिटॉल जैसे कच्चे माल के सैंपल लिए जा रहे हैं।
“राजस्थान-मध्य प्रदेश की घटनाओं के बाद एहतियाती कार्रवाई है। हर जिले में टीमें सक्रिय हैं, और दोषी पाए जाने पर आईपीसी धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज होगा,” जग्गी ने कहा। ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स रूल्स 1945 के तहत 10 वर्ष तक की कैद और जुर्माने की सजा हो सकती है। प्रारंभिक जांच में कुछ दुकानों पर प्रतिबंधित दवाएं मिली हैं, और अब तक 50 से अधिक सैंपल लैब भेजे गए हैं।
अभिभावकों और चिकित्सकों के लिए दिशानिर्देश: घरेलू उपचार पर जोर, पुरानी दवाओं का निपटान
अपर आयुक्त जग्गी ने अभिभावकों से अपील की कि बिना डॉक्टर सलाह के बच्चों को कोई कफ सिरप न दें। “घरों में पुरानी या खुली दवाएं नष्ट करें, क्योंकि वे प्रभावहीन होकर हानिकारक साबित हो सकती हैं। दवाओं की एक्सपायरी डेट जांचें,” उन्होंने कहा। यदि लक्षण दिखें, तो योग्य चिकित्सक से परामर्श लें।
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा, “बच्चों की दवाओं से लापरवाही बर्दाश्त नहीं। डॉक्टर और विक्रेता प्रतिबंधित सिरप न लिखें या बेचें।” यह अभियान जनहित में आवश्यक है। केंद्र स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिल श्रीवास्तव ने सभी राज्यों के साथ हाई-लेवल बैठक में सख्ती पर जोर दिया।
मुख्यमंत्री का संकल्प: गुणवत्ता निगरानी मजबूत, कोई समझौता नहीं
मुख्यमंत्री धामी ने कहा, “बच्चों की सुरक्षा और जनस्वास्थ्य से कोई खिलवाड़ नहीं। हर दवा सुरक्षित हो, यह सुनिश्चित करना हमारी प्राथमिकता है।” राज्य औषधि गुणवत्ता निगरानी प्रणाली को मजबूत करने का प्रयास कर रहा है। एफ.डी.ए. ने दीपावली से पहले मिलावटी खाद्य पदार्थों पर भी विशेष अभियान शुरू किया है। जग्गी ने कहा, “मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री और आयुक्त अभियान की अपडेट ले रहे हैं। हर घर की थाली शुद्ध रहेगी।”