रक्षा बजट में 15% की भारी बढ़ोतरी, पड़ोसियों पर साफ संदेश
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में रक्षा क्षेत्र को 7.8 लाख करोड़ रुपये का ऐतिहासिक आवंटन किया गया है। इसमें कैपिटल आउटले (नई खरीद और आधुनिकीकरण) में 21.84% की वृद्धि हुई है, जो पिछले साल के 1.80 लाख करोड़ से बढ़कर 2.19 लाख करोड़ हो गया। कुल रक्षा बजट में 15% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। विशेषज्ञों और रक्षा विश्लेषकों का कहना है कि यह बजट न केवल पाकिस्तान को बल्कि चीन को भी स्पष्ट संदेश देता है कि भारत अब किसी भी मोर्चे पर पीछे नहीं हटेगा।
रक्षा बजट की मुख्य बातें: नए हथियारों और तकनीक पर जोर
बजट में रक्षा मंत्रालय को मिले 7.8 लाख करोड़ में से सबसे ज्यादा फोकस आधुनिकीकरण पर है:
- फाइटर जेट्स: फिफ्थ जनरेशन विमान और राफेल जैसे विमानों की संख्या बढ़ाने पर खास ध्यान।
- हाइपरसोनिक मिसाइल्स: लंबी दूरी की सटीक मारक क्षमता वाली मिसाइलों की खरीद और स्वदेशी विकास।
- ड्रोन और साइबर युद्ध: ड्रोन स्ट्राइक, साइबर डिफेंस और एआई आधारित सिस्टम पर भारी निवेश।
- आईएसआर और सर्विलेंस: हाई एल्टीट्यूड लॉजिस्टिक्स, रडार और निगरानी सिस्टम को मजबूत करना।
- इंफ्रास्ट्रक्चर: हाई एल्टीट्यूड एयर बेस, सड़कें और 24×7 सैन्य स्टेशन बनाने पर फोकस।
यह बजट टू-फ्रंट वॉर (पाकिस्तान और चीन दोनों मोर्चों पर एक साथ) की तैयारी को ध्यान में रखकर बनाया गया है।
पाकिस्तान पर कसा शिकंजा: आर्थिक मदद मांगते सिर झुकाना पड़ा
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने हाल ही में खुलासा किया कि आर्थिक मदद मांगने के लिए उन्हें दूसरे देशों के सामने सिर झुकाना पड़ा। यह बयान पाकिस्तान की आर्थिक बदहाली का सबसे बड़ा कबूलनामा है। वहीं भारत ने बजट में पड़ोसी देशों के लिए मदद का ऐलान किया है। रक्षा बजट में 15% की बढ़ोतरी ने पाकिस्तान को और कमजोर दिखाया है। विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान अब भारत से रक्षा बजट में मुकाबला ही नहीं कर सकता।
चीन पर पूरा फोकस: हाई एल्टीट्यूड युद्ध की तैयारी
बजट में सबसे ज्यादा ध्यान चीन पर है। गलवान और आसपास के इलाकों में हाई एल्टीट्यूड युद्ध की संभावना को देखते हुए:
- हाई एल्टीट्यूड एयर बेस और लॉजिस्टिक्स मजबूत किए जा रहे हैं।
- हाइपरसोनिक मिसाइल्स और लंबी दूरी की तकनीक पर निवेश बढ़ाया गया।
- ड्रोन, साइबर और एआई युद्ध के नए आयामों पर जोर।
यह बजट साफ संदेश देता है कि भारत अब चीन को हर मोर्चे पर डिटरेंस (रोकथाम) पैदा करने की स्थिति में है।
ट्रंप और वैश्विक चुनौतियां: फ्यूचर वॉरफेयर पर नजर
बजट में आधुनिक युद्ध (मॉडर्न वॉरफेयर) पर खास फोकस है। हाल के युद्धों (ईरान-इजराइल, ऑपरेशन सिंदूर आदि) से सबक लेते हुए:
- ड्रोन स्ट्राइक से नागरिकों की सुरक्षा।
- हाइपरसोनिक मिसाइल्स से आयरन डोम जैसे सिस्टम तोड़ने की क्षमता।
- एयर स्पेस डोमिनेशन के लिए फाइटर जेट्स का जखीरा बढ़ाना।
यह बजट न केवल पाक-चीन, बल्कि वैश्विक स्तर की चुनौतियों (ट्रंप के कार्यकाल में बढ़ती अनिश्चितता) के लिए भी भारत को तैयार कर रहा है।
सुरक्षा का मजबूत कवच, विकसित भारत की मजबूत नींव
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश यह बजट देश की सुरक्षा का भविष्य तैयार करने वाला है। रक्षा बजट में 15% और कैपिटल आउटले में 21.84% की बढ़ोतरी से भारत की सैन्य ताकत नई ऊंचाइयों पर पहुंचेगी। पाकिस्तान की आर्थिक बदहाली और चीन की चुनौती के बीच यह बजट साफ संदेश देता है कि भारत अब किसी भी मोर्चे पर पीछे नहीं हटेगा।