चमोली/उत्तरकाशी : चारधाम यात्रा-2026 की तैयारियां जोरों पर हैं, लेकिन मौसम लगातार अड़ंगा डाल रहा है। बीते दिनों हुई भारी बारिश के बाद अब चटक धूप ने पहाड़ों को नई मुसीबत दे दी है। पहाड़ी ढहने और बर्फबारी के कारण सड़कें बंद हो रही हैं तथा निर्माण कार्य ठप पड़े हैं।
बदरीनाथ मार्ग पर भूस्खलन, यातायात ठप
शुक्रवार को चमोली जिले में बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर गोविंदघाट से पहले पिनौला के पास अचानक पहाड़ी का बड़ा हिस्सा टूटकर सड़क पर आ गिरा। इससे हाईवे पूरी तरह बंद हो गया। गनीमत रही कि इस घटना में कोई वाहन मलबे की चपेट में नहीं आया। प्रशासन ने तुरंत भारी मशीनें मौके पर पहुंचाईं और करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद मार्ग को यातायात के लिए सुचारु कर दिया गया।
जिलाधिकारी गौरव कुमार ने खुद घटनास्थल का निरीक्षण किया। कोतवाल देवेंद्र सिंह रावत ने बताया कि मार्ग अब आवाजाही के लिए खोल दिया गया है, लेकिन पहाड़ों में अभी भी चुनौतियां बनी हुई हैं।
केदारनाथ, गंगोत्री-यमुनोत्री में बर्फबारी से काम प्रभावित
- केदारनाथ धाम के पैदल मार्ग पर फिर से अच्छी खासी बर्फ जमा हो गई है। मजदूर बर्फ हटाने में जुटे हुए हैं।
- गंगोत्री और यमुनोत्री धाम में भी बर्फबारी के कारण निर्माण कार्य रुक गए हैं।
- धामों के आसपास और पैदल मार्गों पर बर्फ की मोटी परत जमी हुई है।
कपाट खुलने की तिथियां:
- 19 अप्रैल — गंगोत्री एवं यमुनोत्री धाम
- 22 अप्रैल — केदारनाथ धाम
- 23 अप्रैल — बदरीनाथ धाम
उत्तरकाशी में निर्माण कार्य पूरी तरह बाधित
गंगोत्री-यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने में अब मात्र नौ दिन शेष हैं, लेकिन मौसम की बेरुखी के कारण निर्माण कार्य ठप पड़े हैं। तीर्थ पुरोहितों ने चिंता जताते हुए कहा कि समय रहते काम पूरा न हुआ तो श्रद्धालुओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ेगा।
यमुनोत्री में बाधाएं:
- चेजिंग रूम, रसोई घर और अस्थायी पुलिया निर्माण कार्य रुके हुए।
- पैदल मार्ग सुधारीकरण का काम बंद।
तीर्थ पुरोहित मनमोहन उनियाल, पुरुषोत्तम उनियाल, गौरव उनियाल और प्रदीप उनियाल ने विभागों पर आरोप लगाया कि तय समय पर काम शुरू किया होता तो अब तक तैयारियां पूरी हो चुकी होतीं।
भूस्खलन जोन सक्रिय, सड़कें बदहाल
उत्तरकाशी से भटवाड़ी तक के 30 किमी क्षेत्र में 8 सक्रिय भूस्खलन जोन हैं, जिनका अभी तक कोई स्थायी उपचार नहीं किया गया। नेताला, लालढांग, बिशनपुर, नलूणा, भटवाड़ी, ओंगी आदि जगहों पर सड़कें धंस चुकी हैं या बह गई हैं। पहाड़ी पर झूल रहे बोल्डर भी बड़ी मुसीबत बने हुए हैं।
तीर्थ पुरोहितों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि मौसम साफ होते ही सभी कार्यों को तेज गति से पूरा किया जाए, ताकि यात्रा सुव्यवस्थित रूप से शुरू हो सके।