टिहरी स्मृति एवं विस्थापित एकता मंच ने प्रेस क्लब में इगास बग्वाल का धूमधाम से आयोजन किया

राज्य के 25 वर्ष पूरे होने पर लोक पर्व का भव्य समारोह

देहरादून, 3 नवंबर 2025: उत्तराखंड राज्य के गठन के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर टिहरी स्मृति एवं विस्थापित एकता मंच ने प्रेस क्लब देहरादून में इगास बग्वाल पर्व का उत्साहपूर्ण आयोजन किया। यह समारोह राज्य की समृद्ध लोक संस्कृति, परंपराओं और सामूहिक एकता को समर्पित रहा, जो आंदोलनकारी भावना और सांस्कृतिक धरोहर को जीवंत करने का माध्यम बना। मंच अध्यक्ष विनोद उनियाल की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम में टिहरी प्रतिकृति के निर्माता सुबोध बहुगुणा तथा श्री रामकृष्ण लीला समिति टिहरी 1952 के अध्यक्ष अभिनव थापर विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उत्तरांचल प्रेस क्लब के अध्यक्ष भूपेंद्र कंडारी ने भी अतिथि के रूप में शिरकत की। आयोजन ने राज्य की सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का संदेश दिया।

आयोजन का शुभारंभ: दीप प्रज्ज्वलन और पुष्पार्पण से स्वागत

पारंपरिक रूप से अर्घ्य अर्पण

कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन से हुई, जो इगास की पारंपरिक आस्था का प्रतीक बनी। इसके बाद सभी विशेष अतिथियों, मंच अध्यक्ष और अन्य गणमान्य व्यक्तियों को पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया गया। यह अनुष्ठान आयोजन को आध्यात्मिक और सांस्कृतिक गरिमा प्रदान करने वाला रहा। हिल फाउंडेशन की बालिकाओं द्वारा प्रस्तुत गणेश वंदना ने माहौल को भक्ति और उत्साह से भर दिया। नन्ही कलाकारों की सुरीली ध्वनियों ने दर्शकों के दिलों को छू लिया और कार्यक्रम को एक दिव्य शुरुआत दी।

मंच अध्यक्ष का स्वागत संदेश: सांस्कृतिक अस्मिता का प्रतीक

लोक परंपराओं का संरक्षण और एकता का संदेश

मंच अध्यक्ष एवं राज्यमंत्री विनोद उनियाल ने स्वागत भाषण में कहा कि इगास बग्वाल हमारी सांस्कृतिक पहचान का अभिन्न अंग है। यह पर्व हमें अपनी जड़ों से जोड़ता है और सामाजिक एकजुटता को मजबूत करता है। उन्होंने राज्य के 25 वर्षों की यात्रा को याद करते हुए कहा कि यह आयोजन आंदोलनकारी भावना और लोक धरोहर को संरक्षित करने का माध्यम है। उनियाल ने सभी से अपील की कि ऐसी परंपराओं को जीवित रखें ताकि आने वाली पीढ़ियां अपनी विरासत से परिचित हों।

सांस्कृतिक प्रस्तुतियां: तबला वादन ने मंत्रमुग्ध किया

निकुंज ध्यानी की मनमोहक प्रस्तुति

अतिथियों के स्वागत के बाद तबला वादक निकुंज ध्यानी ने अपनी कुशल प्रस्तुति से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनकी तालबद्ध ध्वनियों ने आयोजन को संगीतमय बना दिया और दर्शकों ने जोरदार तालियों से सराहना की। यह प्रदर्शन लोक पर्व की धुन को आधुनिक संगीत से जोड़ने का अनोखा प्रयास रहा।

अतिथियों के संबोधन: सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण

अभिनव थापर: लोक पर्व हमारी पहचान

श्री रामकृष्ण लीला समिति टिहरी 1952 के अध्यक्ष अभिनव थापर ने कहा कि लोक पर्व हमारी सांस्कृतिक पहचान हैं, जिन्हें पूरे उत्साह के साथ मनाना चाहिए। उन्होंने अपनी समिति द्वारा पुनर्जीवित टिहरी की प्राचीन रामलीला का उल्लेख किया, जो युवाओं को सांस्कृतिक धरोहर से जोड़ रही है। थापर ने कहा कि ऐसे आयोजन समाज को अपनी जड़ों से मजबूत करते हैं।

सुबोध बहुगुणा: टिहरी की विरासत का संवर्धन

टिहरी प्रतिकृति के निर्माता सुबोध बहुगुणा ने मंच के प्रयासों की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि यह आयोजन टिहरी की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। बहुगुणा ने जोर दिया कि सामूहिक प्रयासों से ही हम अपनी परंपराओं को जीवित रख सकते हैं।

कार्यक्रम में उपस्थित गणमान्य व्यक्ति

कार्यक्रम में पल्लवी पैन्यूली, नीलम कपलवान, रीना बहुगुणा, इंदू बहुगुणा, जोत सिंह बिष्ट, चंद्र स्वामी, प्रमोद बहुगुणा, विनोद बहुगुणा, विमल स्वरूप बहुगुणा सहित कई सामाजिक कार्यकर्ता और सांस्कृतिक प्रेमी शामिल रहे।

पुरस्कार वितरण और समापन: भेलो खेल और पारंपरिक जलपान

उत्कृष्ट प्रतिभागियों को सम्मान

सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के बाद उत्कृष्ट कलाकारों को पुरस्कार प्रदान किए गए। कार्यक्रम का संचालन प्राची जुयाल ने किया, जिन्होंने गरिमा और उत्साह के साथ आयोजन को जीवंत बनाया। समापन धन्यवाद ज्ञापन के बाद पारंपरिक “भेलो खेल” और स्वादिष्ट पहाड़ी व्यंजनों का आनंद लिया गया। यह समारोह उत्साह, उमंग और उत्तराखंडी संस्कृति की जीवंतता से परिपूर्ण रहा।

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