देहरादून शहर में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने एक विशेष अभियान शुरू किया है। ‘सेफ ड्रग, सेफ लाइफ’ के स्लोगन के तहत यह निरीक्षण ड्रग विभाग के सहयोग से आयोजित किया गया, जिसका मुख्य लक्ष्य मेडिकल स्टोरों पर दवाओं के सुरक्षित भंडारण, फार्मासिस्ट की उपस्थिति और अन्य नियमों का पालन सुनिश्चित करना है। उत्तराखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, नैनीताल और जिला न्यायाधीश प्रेम सिंह खिमाल के निर्देश पर यह कार्रवाई की गई, जो आम जनता को नकली या एक्सपायरी दवाओं से बचाने के उद्देश्य से की गई। इस अभियान से यह स्पष्ट होता है कि प्रशासन दवा व्यवसाय में अनियमितताओं के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति अपना रहा है।
निरीक्षण का विवरण: टीम और क्षेत्र
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव सीमा डंगराकोटी के नेतृत्व में एक संयुक्त टीम ने पटेलनगर क्षेत्र के विभिन्न मेडिकल स्टोरों का दौरा किया। टीम में वरिष्ठ औषधि निरीक्षक मनेंद्र सिंह राणा, औषधि निरीक्षक विनोद जगुड़ी और निधि रतूड़ी शामिल थे। निरीक्षण के दौरान लाइसेंस की वैधता, फार्मासिस्ट के दस्तावेज, कोल्ड स्टोरेज की सुविधा, समाप्त हो चुकी दवाओं के निपटान की प्रक्रिया, नशीली दवाओं (नारकोटिक्स) से संबंधित जानकारी और बिक्री के बिलों की जांच की गई। यह अभियान 7 जुलाई 2025 को शुरू हुआ, जो स्वास्थ्य सुरक्षा को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। टीम ने स्टोर मालिकों को नियमों का उल्लंघन न करने की सख्त हिदायतें दीं, ताकि उपभोक्ताओं का स्वास्थ्य खतरे में न पड़े।
प्रमुख खामियां और कार्रवाई: एक स्टोर पर तत्काल प्रभाव
निरीक्षण के दौरान कई स्टोरों में गंभीर कमियां सामने आईं, जिनमें फार्मासिस्ट की अनुपस्थिति, समाप्त दवाओं का स्टॉक, कोल्ड स्टोरेज का अनुचित तापमान और सीसीटीवी की कमी शामिल हैं। सबसे गंभीर मामला एक्रवन फार्मेसी (पश्चिम पटेलनगर) का था, जहां फार्मासिस्ट प्रीति गोयल अनुपस्थित पाई गईं। उनके स्थान पर मात्र कक्षा 10वीं पास आशिष देवी लाल को प्रभारी पाया गया, जिस पर टीम ने कड़ी नाराजगी जताई। स्टोर में दो सीसीटीवी कैमरे तो थे, लेकिन फ्रीज का तापमान डिस्प्ले 17 डिग्री पर अटका हुआ था, जो दवाओं के भंडारण के लिए असुरक्षित है। टीम ने तत्काल तापमान सुधारने के आदेश दिए और अनियमितताओं के कारण स्टोर को उसी वक्त बंद करा दिया। स्टोर मालिक को स्पष्टीकरण ड्रग विभाग को जल्द प्रस्तुत करने का नोटिस जारी किया गया। इसी तरह, अन्य स्टोरों में भी एक्सपायरी दवाओं का स्टोरेज पाया गया, जिसके निपटान पर जोर दिया गया।
स्टोर-वार विश्लेषण: सुधार के निर्देश
निरीक्षण में शामिल अन्य स्टोरों की स्थिति भी चिंताजनक रही, हालांकि सभी पर तत्काल बंदी नहीं लगी। खालसा मेडिकल स्टोर (पश्चिम पटेलनगर) में फार्मासिस्ट संदीप पाल मौजूद थे, दो सीसीटीवी और फ्रीज तापमान डिस्प्ले उपलब्ध थे, लेकिन समाप्त दवाओं का स्टॉक और बिक्री बिलों में अनियमितताएं मिलीं। नशीली दवाओं का विक्रय नहीं होने की पुष्टि हुई, जबकि कफ सिरप को अलग रखा गया था। टीम ने स्टोर की सफाई और रखरखाव पर सख्त निर्देश दिए। एमपीएस मेडिकोज (निकट महंत इंद्रेश अस्पताल, पटेलनगर) में फार्मासिस्ट मनोज तिवारी उपस्थित थे, फ्रीज तापमान ठीक था और बिक्री बिल दिखाए गए। यहां नारकोटिक्स दवाओं का विक्रय होता है, लेकिन बिक्री रजिस्टर अव्यवस्थित पाया गया। टीम ने रजिस्टर को व्यवस्थित करने और एक्सपायरी दवाओं के निपटान के आदेश दिए। एक्रवन फार्मेसी (निकट महंत इंद्रेश अस्पताल) में फार्मासिस्ट अंजुम मौजूद थीं, तीन सीसीटीवी, फ्रीज डिस्प्ले और कंप्यूटर पर रिकॉर्ड उपलब्ध थे। नारकोटिक्स रजिस्टर और बिक्री फाइलें ठीक पाई गईं, लेकिन एक्सपायरी स्टॉक की समस्या बनी रही। यहां भी उचित दिशा-निर्देश जारी किए गए। कुल मिलाकर, सात मेडिकल स्टोरों में बड़ी अनियमितताएं पाई गईं, जिन पर सुधारात्मक कदम उठाए गए।
प्रभाव और आगे की योजना: जन स्वास्थ्य की रक्षा
यह निरीक्षण अभियान देहरादून के निवासियों के लिए एक सकारात्मक संदेश है कि प्रशासन दवा बाजार की निगरानी में सक्रिय है। अनियमितताओं से उपभोक्ताओं को नुकसान हो सकता है, जैसे एक्सपायरी दवाओं से बीमारियां बढ़ना या नकली दवाओं से जान का खतरा। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में ऐसे निरीक्षण नियमित होंगे और उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई होगी, जिसमें जुर्माना या लाइसेंस रद्द करना शामिल है। ड्रग विभाग ने भी सहयोग का वादा किया है। यह कदम न केवल स्वास्थ्य सुरक्षा को मजबूत करेगा, बल्कि दवा व्यापारियों को नियमों का पालन करने के लिए प्रेरित करेगा। स्थानीय निवासियों से अपील है कि वे शिकायत दर्ज कराएं यदि कोई अनियमितता दिखे।