मुख्यमंत्री के निर्देशों पर औषधि विभाग की सख्ती
देहरादून, 15 अक्टूबर 2025: उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के मार्गदर्शन में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन द्वारा निम्न स्तर की दवाओं के विरुद्ध व्यापक निरीक्षण अभियान चलाया जा रहा है। स्वास्थ्य सचिव एवं आयुक्त डॉ. आर. राजेश कुमार के आदेश पर अपर आयुक्त (एफडीए) और ड्रग कंट्रोलर ताजबर सिंह जग्गी के नेतृत्व में सभी जिलों में औषधि निरीक्षक टीमें सक्रिय हैं। अब तक 370 से अधिक नमूने गुणवत्ता जांच के लिए एकत्रित हो चुके हैं। इस अभियान का उद्देश्य प्रतिबंधित कफ सिरप और घटिया दवाओं की बिक्री व भंडारण पर पूर्ण रोक लगाना है, ताकि जन स्वास्थ्य, विशेषकर बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित हो।
नैनीताल जिले में सघन कार्रवाई: मेडिकल स्टोर बंद, क्लीनिक से सैंपल जब्त
नैनीताल जनपद में 14 अक्टूबर को रामनगर के खताड़ी क्षेत्र में संयुक्त टीम ने औचक निरीक्षण किया। बच्चों के लिए कफ सिरप की गुणवत्ता जांच के दौरान गंभीर खामियां सामने आने पर एक मेडिकल स्टोर को तुरंत बंद कराया गया। दो अन्य स्टोरों को सुधार के निर्देश दिए गए, जबकि दो स्टोर लॉक पाए गए। एक क्लीनिक का भी दौरा किया गया, जहां से पांच दवा नमूने जांच के लिए लिए गए। सभी प्रतिष्ठानों को औषधि अधिनियम के नियमों का कड़ाई से पालन करने का आदेश जारी किया गया। इस अभियान में वरिष्ठ औषधि निरीक्षक मीनाक्षी बिष्ट (नैनीताल), नीरज कुमार (ऊधम सिंह नगर), अर्चना (नैनीताल), निधि शर्मा और शुभम कोटनाला (ऊधम सिंह नगर) शामिल रहे। यह कार्रवाई बच्चों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए की गई।
देहरादून में थोक विक्रेताओं पर नजर: दवाओं को सील किया
देहरादून में औषधि निरीक्षक मानेंद्र सिंह राणा के नेतृत्व वाली टीम ने दून मेडिकल कॉलेज के आसपास मेडिकल स्टोर और थोक दवा विक्रेताओं का निरीक्षण किया। जांच में बच्चों के लिए खांसी-जुकाम की प्रतिबंधित दवाएं अलग रखी और बेचने योग्य पाई गईं, जिन पर तत्काल रोक लगा दी गई। टीम ने इन दवाओं को मौके पर सील कर अग्रिम आदेश तक विक्रय न करने के निर्देश दिए। इसके अलावा, सेलाकुई की दवा विनिर्माण इकाइयों का भी दौरा किया गया, जहां से चार नमूने गुणवत्ता परीक्षण हेतु संग्रहित किए गए। यह कदम प्रतिबंधित दवाओं की चेन को तोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण है।
हरिद्वार के रुड़की में छापेमारी: बिना लाइसेंस दवाओं का अवैध कारोबार उजागर
हरिद्वार जिले के रुड़की क्षेत्र में गुप्त सूचना पर औषधि निरीक्षक हरीश सिंह और मेघा ने एम/एस फलख नाज (ग्राम सलीयर) पर छापा मारा। यहां बिना वैध लाइसेंस के सरकारी दवाओं का अवैध भंडारण और बिक्री पाई गई। टीम ने 12 प्रकार की एलोपैथिक दवाएं जब्त कीं, जिनमें राजस्थान और मध्य प्रदेश सरकार की आपूर्ति वाली दवाएं भी शामिल थीं। सभी दवाओं को सील कर फॉर्म 17/17ए के तहत नमूने लिए गए। आगे की कार्रवाई ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 के प्रावधानों के अनुसार होगी। यह घटना अवैध दवा व्यापार पर विभाग की सतर्कता को रेखांकित करती है।
नेताओं के बयान: बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट किया कि दो वर्ष से कम उम्र के बच्चों को प्रतिबंधित सिरप कदापि न दिए जाएं। उन्होंने कहा कि जन स्वास्थ्य और बच्चों की हिफाजत सरकार की शीर्ष प्राथमिकता है। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने जोर दिया कि विभागीय कार्रवाई निरंतर और सख्त रहेगी; किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा कि निरीक्षण अभियान बिना रुके चलेगा और उल्लंघनकर्ताओं पर कठोरतम कदम उठाए जाएंगे। अपर आयुक्त ताजबर सिंह जग्गी ने बताया कि अनधिकृत बिक्री, स्टोरेज या मिलावट में शामिल लोगों पर कोई ढील नहीं दी जाएगी। सरकार का लक्ष्य है कि नागरिकों, विशेष रूप से बच्चों को केवल प्रमाणित और सुरक्षित दवाएं उपलब्ध हों।
अभियान का व्यापक प्रभाव: गुणवत्ता सुनिश्चित करने की दिशा में कदम
यह राज्यव्यापी अभियान औषधि विभाग की सक्रियता का प्रतीक है, जो न केवल प्रतिबंधित कफ सिरप पर अंकुश लगाएगा, बल्कि निम्न गुणवत्ता वाली दवाओं के सर्कुलेशन को भी रोकेगा। जिलों में टीमें 24×7 अलर्ट मोड में हैं, और आने वाले दिनों में और अधिक छापेमारियां सुनिश्चित की जाएंगी। इससे दवा बाजार में पारदर्शिता बढ़ेगी और उपभोक्ता विश्वास मजबूत होगा। विभाग ने सभी मेडिकल स्टोर मालिकों से अपील की है कि वे नियमों का पालन करें, अन्यथा लाइसेंस रद्द और कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।