पीएम मोदी के जन्मदिन पर विवादास्पद वीडियो का मामला
पटना, 17 सितंबर 2025: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन और उनकी दिवंगत मां हीराबेन मोदी के पितृपक्ष अनुष्ठान के अवसर पर पटना उच्च न्यायालय ने कांग्रेस पार्टी को एक कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित वीडियो को तत्काल सोशल मीडिया से हटाने का सख्त आदेश दिया है। बिहार कांग्रेस कमेटी के आधिकारिक एक्स (पूर्व ट्विटर) हैंडल पर 10 सितंबर को पोस्ट किया गया यह 36 सेकंड का वीडियो प्रधानमंत्री मोदी को सपने में अपनी मां के साथ दिखाता है, जहां मां उनकी राजनीतिक नीतियों पर कथित रूप से नाराजगी जाहिर करती हैं। अदालत ने इसे संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत निजता का अधिकार और प्रतिष्ठा का उल्लंघन माना, साथ ही इसे अपमानजनक और अरुचिकर करार दिया।
वीडियो की सामग्री और राजनीतिक संदर्भ
वीडियो में प्रधानमंत्री मोदी को बिहार चुनावों से जुड़े मुद्दों पर अपनी मां से डांट सुनते दिखाया गया है, जिसमें नोटबंदी जैसी नीतियों की आलोचना का दावा किया गया है। कांग्रेस ने इसे “साहब के सपनों में आई मां” कैप्शन के साथ साझा किया था, जो सरकारी नीतियों पर व्यंग्य के रूप में पेश किया गया। अदालत ने कहा कि यह सामग्री न केवल व्यक्तिगत अपमान है, बल्कि राजनीतिक विमर्श के लिए अस्वीकार्य है। यह वीडियो वायरल होने के बाद भाजपा ने इसे पीएम और उनके परिवार पर निजी हमला बताया, जबकि कांग्रेस ने इसका बचाव करते हुए कहा कि इसमें कोई अपमान नहीं है, बल्कि यह राजनीतिक आलोचना का माध्यम है।
अदालत का अंतरिम आदेश और नोटिस
पटना हाईकोर्ट की एक डिवीजन बेंच—अभिनव मुख्य न्यायाधीश पीबी बाजांत्री और न्यायमूर्ति आलोक कुमार सिन्हा—ने वकील विवेकानंद सिंह की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश जारी किया। अदालत ने वीडियो के आगे प्रसार पर रोक लगा दी और सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से इसे हटाने का निर्देश दिया। साथ ही, केंद्र सरकार, बिहार सरकार, बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी, चुनाव आयोग और राहुल गांधी को नोटिस जारी किया गया है। याचिका में कहा गया कि यह वीडियो सर्वोच्च न्यायालय द्वारा मान्य नोटबंदी जैसी नीतियों पर भी अपमानजनक टिप्पणी करता है, जो प्रधानमंत्री पर सबसे खराब प्रकार की मानहानि है।
भाजपा की एफआईआर और कानूनी कार्रवाई
भाजपा ने इस वीडियो के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की। दिल्ली चुनाव सेल के संयोजक संकेत गुप्ता ने 13 सितंबर को नॉर्थ एवेन्यू थाने में शिकायत दर्ज कराई, जिसमें कांग्रेस और उसके आईटी सेल पर जालसाजी, मानहानि और आपराधिक साजिश के आरोप लगाए गए। एफआईआर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराओं 18(2), 336(3), 336(4), 340(2), 352, 356(2) और 61(2) के तहत दर्ज की गई। भाजपा नेताओं ने इसे महिलाओं की गरिमा और मातृत्व का अपमान बताया, जबकि कांग्रेस ने कहा कि वीडियो में हीराबेन मोदी का सम्मान ही किया गया है।
राजनीतिक विवाद का विस्तार
यह वीडियो कांग्रेस के लिए दूसरी बड़ी मुसीबत साबित हुआ है। इससे पहले 27 अगस्त को दरभंगा में कांग्रेस-आरजेडी की ‘मतदाता अधिकार यात्रा’ के मंच पर एक अज्ञात व्यक्ति द्वारा पीएम मोदी और उनकी मां को गालियां देने वाला वीडियो वायरल हो चुका था। भाजपा और एनडीए सहयोगियों ने कांग्रेस पर हमला बोला, इसे राजनीतिक नैतिकता का हनन बताया। सोशल मीडिया पर भी प्रतिक्रियाएं तेज हैं, जहां कई यूजर्स ने अदालत के फैसले को न्यायिक जीत करार दिया।
आगे की सुनवाई और एआई मुद्दे
मामले की अगली सुनवाई में एआई-जनित सामग्री के राजनीतिक उपयोग, डीपफेक वीडियो के खतरे और पार्टियों की जवाबदेही पर गहन चर्चा होने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला डिजिटल राजनीति में नैतिक सीमाओं को परिभाषित करने का महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। कांग्रेस ने अदालत के आदेश का पालन करने की बात कही है, लेकिन राजनीतिक आलोचना के अधिकार पर जोर दिया।
प्रशांत किशोर का बयान
इस बीच, राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने पीएम मोदी, राहुल गांधी और तेजस्वी यादव पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि ये तीनों नेता ‘एक्सपायरी दवा’ की तरह हैं, जो भ्रष्टाचार और बेरोजगारी जैसी समस्याओं का समाधान नहीं कर सकते। किशोर का यह बयान बिहार चुनावों के संदर्भ में आया है, जो विवाद को और भड़ा सकता है।