परमवीर सिंह सैनी केस के फैसले का पालन: RTI से खुलासा
देहरादून, 2 नवंबर 2025: सुप्रीम कोर्ट के परमवीर सिंह सैनी मामले (2020) के आदेशों का पालन करते हुए उत्तराखंड के सभी 166 पुलिस थानों में कुल 996 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। इन कैमरों की रिकॉर्डिंग क्षमता कम से कम एक वर्ष की है और ऑडियो-वीडियो सुविधा से लैस हैं। यह जानकारी सूचना अधिकार (RTI) कार्यकर्ता नदीमुद्दीन (एडवोकेट) की प्रार्थना पर पुलिस मुख्यालय ने प्रदान की है। काशीपुर निवासी नदीमुद्दीन ने थानों में सीसीटीवी स्थापना, रखरखाव और निगरानी पर जानकारी मांगी थी। मुख्यालय के लोक सूचना अधिकारी पुलिस अधीक्षक (का.व्य.) कमलेश उपाध्याय (पत्रांक 579) और महानिरीक्षक पुलिस दूर संचार के पीयू (पु.दूर.) सतेन्द्र सिंह नेगी (पत्रांक 126) ने विवरण, एसओपी और प्रमाण पत्र उपलब्ध कराए।
थानों में कैमरे वितरण: जिलेवार आंकड़े
हर जिले में 6 कैमरे प्रति थाना
सुप्रीम कोर्ट के 2 दिसंबर 2020 के आदेश (परमवीर सिंह सैनी बनाम बलजीत सिंह) के अनुपालन में राज्य के प्रत्येक थाने में 6 कैमरे लगाए गए हैं। जिलेवार विवरण:
- अल्मोड़ा: 12 थाने, 72 कैमरे
- बागेश्वर: 6 थाने, 36 कैमरे
- चमोली: 10 थाने, 60 कैमरे
- चंपावत: 8 थाने, 48 कैमरे
- देहरादून: 23 थाने, 138 कैमरे
- हरिद्वार: 19 थाने, 114 कैमरे
- नैनीताल: 16 थाने, 96 कैमरे
- पौड़ी गढ़वाल: 14 थाने, 84 कैमरे
- पिथौरागढ़: 16 थाने, 96 कैमरे
- रुद्रप्रयाग: 5 थाने, 30 कैमरे
- टिहरी गढ़वाल: 12 थाने, 72 कैमरे
- उधम सिंह नगर: 18 थाने, 108 कैमरे
- उत्तरकाशी: 7 थाने, 42 कैमरे
कुल थाने: 166, कैमरे: 996। कैमरे एंट्री/एक्जिट, मुख्य गेट, लॉक-अप, वॉशरूम, क्वेश्चनिंग रूम, पार्किंग आदि कवर करते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने 2020 में सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को थानों और जांच एजेंसियों (CBI, ED, NIA आदि) में कैमरे लगाने का आदेश दिया था, जो कस्टोडियल हिंसा रोकने का माध्यम है। 2023 में कोर्ट ने अनुपालन रिपोर्ट मांगी, और 2025 में हिरासत में मौतों पर स्वत: संज्ञान लिया।
निगरानी व्यवस्था: राज्य और जिला स्तर पर समितियां
राज्य स्तरीय निरीक्षण समिति
राज्य स्तर पर गृह विभाग के सचिव (अध्यक्ष), वित्त विभाग के सचिव, पुलिस महानिदेशक तथा राज्य महिला आयोग के अध्यक्ष/सदस्य शामिल हैं। वे फुटेज की समीक्षा और पर्यवेक्षण करेंगे।
जनपद स्तरीय निरीक्षण समिति
मंडलायुक्त (अध्यक्ष), जिलाधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक/पुलिस अधीक्षक, महापौर (शहरी क्षेत्र) और जिला पंचायत अध्यक्ष (ग्रामीण क्षेत्र) सदस्य हैं। वे स्थानीय स्तर पर निगरानी सुनिश्चित करेंगे।
रखरखाव की जिम्मेदारी: एसओपी के अनुसार कर्तव्य
कर्मचारी के दायित्व
- ड्यूटी शुरू होने से पहले कैमरों/उपकरणों की जांच, थानाध्यक्ष को सूचना और रजिस्टर में प्रविष्टि।
- रात्रि रिकॉर्डिंग चेक करना, थानाध्यक्ष को आख्या देना।
- खराबी पर थानाध्यक्ष के माध्यम से जनपद निरीक्षक (पु.दूर.) को सूचना।
- प्रशिक्षण प्रदान।
थानाध्यक्ष/प्रभारी के कर्तव्य
- हेड कांस्टेबल/अपर सब इंस्पेक्टर को नोडल नियुक्ति।
- प्रतिदिन प्रात: 8 बजे रिकॉर्डिंग चेक, रजिस्टर में अंकन।
- छेड़छाड़ पर जिम्मेदारी, हार्ड डिस्क बदलने पर जनपद समिति को सूचना।
- निगरानी कक्ष में कैमरों का संचालन।
जनपद निरीक्षक (पु.दूर.)/प्रभारी के दायित्व
- जनपद स्तर पर रखरखाव जिम्मेदारी।
- थानों से नामित कर्मचारियों की सूची प्राप्ति।
- मासिक निरीक्षण।
- 2 घंटे में कैमरों की कार्यशीलता चेक, न्यूनतम डाउन टाइम।
- AMC समाप्ति से 3 माह पहले कार्रवाई।
- थाना कर्मचारियों को प्रशिक्षण।
शॉर्ट सर्किट, पावर फेलियर आदि पर तत्काल मरम्मत। फुटेज 6 महीने से 1 वर्ष तक सुरक्षित रखना।
सुप्रीम कोर्ट आदेश का महत्व: कस्टोडियल हिंसा रोकथाम
सुप्रीम कोर्ट ने 2020 में (परमवीर सिंह सैनी बनाम बलजीत सिंह) में सभी थानों में कैमरे लगाने का आदेश दिया, जिसमें एंट्री/एक्जिट, लॉक-अप, क्वेश्चनिंग रूम आदि कवर हों। 2023 में अनुपालन रिपोर्ट मांगी गई और 2025 में हिरासत मौतों पर स्वत: संज्ञान लिया। उत्तराखंड ने 2020-2021 में ही 158 थानों में कैमरे लगाए, शेष 2023 तक पूरे किए। यह कदम पारदर्शिता बढ़ाता है।
RTI कार्यकर्ता की भूमिका: पारदर्शिता का माध्यम
नदीमुद्दीन की RTI ने व्यवस्था की मजबूती साबित की। उन्होंने कहा कि यह जानकारी नागरिकों को जागरूक करेगी।