“मासिक धर्म कोई शर्म नहीं, समझ जरूरी है” – मासिक धर्म स्वच्छता दिवस पर डॉ. सुजाता संजय का संदेश

28 मई को मनाया गया मासिक धर्म स्वच्छता दिवस

हर वर्ष 28 मई को दुनिया भर में मासिक धर्म स्वच्छता दिवस मनाया जाता है। वर्ष 2025 की थीम रही — “एक साथ #पीरियडफ्रेंडली वर्ल्ड”, जो इस दिशा में सामाजिक जागरूकता को बढ़ावा देने का आह्वान करती है। इस दिवस की शुरुआत 2014 में की गई थी और तब से यह महिलाओं और किशोरियों के लिए एक अहम वैश्विक अभियान बन चुका है।


वेबिनार में छात्रों को किया गया जागरूक

देहरादून से डॉ. सुजाता संजय ने एक वेबिनार के माध्यम से कई नर्सिंग छात्रों व छात्राओं को संबोधित करते हुए मासिक धर्म से जुड़ी भ्रांतियों पर प्रकाश डाला और उनसे खुलकर संवाद किया। उन्होंने कहा कि मासिक धर्म नारी शरीर की एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, जिसे समझने की जरूरत है, न कि शर्म से छिपाने की।


“माहवारी को कलंक नहीं, शिक्षा का विषय बनाएं” – डॉ. सुजाता

डॉ. संजय ने कहा कि लड़कियों के लिए यह समय उनके जीवन में शारीरिक और मानसिक बदलावों का दौर होता है। इस संक्रमण काल में परिवार, शिक्षकों और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं का सहयोग अत्यंत आवश्यक होता है। यदि किशोरियों को समय पर सही जानकारी न मिले, तो वे स्कूल जाना बंद कर देती हैं और आत्मविश्वास की कमी का शिकार हो जाती हैं।


भारत में किशोरियों की बड़ी आबादी जानकारी के अभाव में

भारत में लगभग 11 करोड़ किशोर लड़कियाँ हैं, जिनमें से अधिकांश को मासिक धर्म स्वच्छता और निस्तारण के तरीकों की जानकारी नहीं है। यह उनकी शिक्षा, स्वास्थ्य और मानसिक स्थिति को गंभीर रूप से प्रभावित करता है।


“मासिक धर्म बीमारी नहीं, सामान्य प्रक्रिया है”

डॉ. सुजाता संजय ने जोर देते हुए कहा कि मासिक धर्म को बीमारी नहीं बल्कि जैविक प्रक्रिया के रूप में समझा जाए। उन्होंने बताया कि उनके क्लीनिक में कई किशोरियाँ केवल इस कारण से संक्रमण और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से जूझती हैं क्योंकि वे सही स्वच्छता उपाय नहीं अपनातीं — जैसे कि सैनिटरी पैड्स को समय पर न बदलना या गंदे कपड़े का उपयोग करना।


“माताएं भी खुलकर करें संवाद”

उन्होंने चिंता जताई कि कई बार माताएं भी इस विषय पर बात करने में संकोच करती हैं, जिससे किशोरियाँ मानसिक तनाव का शिकार हो जाती हैं। उन्होंने अभिभावकों से आह्वान किया कि बेटियों को माहवारी के बारे में खुलकर जानकारी दें, ताकि वे आत्मविश्वास के साथ इस दौर से गुजर सकें।


मासिक धर्म से जुड़े मुद्दों से आगे बढ़ेगी सामाजिक चेतना

डॉ. सुजाता संजय ने कहा कि माहवारी पर खुलकर बात करने से केवल पीरियड से जुड़ी भ्रांतियाँ ही नहीं टूटेंगी, बल्कि इससे बाल विवाह, पोषण, शिक्षा और आत्मनिर्भरता जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी समाज में जागरूकता फैलेगी।


सभी के लिए एक बेहतर, जागरूक और पीरियड-फ्रेंडली समाज की अपील

अंत में डॉ. सुजाता संजय ने कहा कि यह हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है कि माहवारी को सामान्य विषय बनाएं, स्वच्छता की जानकारी हर किशोरी तक पहुंचाएं और एक ऐसा वातावरण बनाएं जहाँ हर लड़की सम्मान, स्वास्थ्य और आत्मविश्वास के साथ जी सके।

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