लश्कर-ए-तैयबा का नया चेहरा: बाढ़ राहत के बहाने ध्वस्त मुख्यालय का पुनर्निर्माण

ऑपरेशन सिंदूर के बाद उजागर हुई साजिश

इस्लामाबाद/नई दिल्ली, सितंबर 2025: पाकिस्तान में हालिया बाढ़ की तबाही के बीच प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) ने एक बार फिर अपनी चालाकी का परिचय दिया है। भारतीय वायुसेना द्वारा 7 मई 2025 को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत मुरिदके स्थित एलईटी के मुख्यालय ‘मरकज तैयबा’ को नेस्तनाबूद करने के बाद, संगठन अब बाढ़ प्रभावितों की मदद के नाम पर चंदा जुटाकर अपनी क्षतिग्रस्त इमारतों को दोबारा खड़ा करने में जुटा है। भारतीय खुफिया एजेंसियों के एक गोपनीय दस्तावेज के अनुसार, एलईटी कार्यकर्ता पाकिस्तानी रेंजर्स और सरकारी अधिकारियों की मौजूदगी में राहत शिविरों में फोटो सेशन कर ‘मानवीय सेवा’ का भ्रम पैदा कर रहे हैं, जबकि वास्तविकता में यह सब आतंकी ढांचे के पुनरुद्धार का हिस्सा है।

बाढ़ राहत शिविरों में छिपी साजिश

पाकिस्तान में जुलाई-अगस्त 2025 में आई भयंकर बाढ़ ने पंजाब, सिंध और खैबर पख्तूनख्वा प्रांतों में हजारों गांवों को तबाह कर दिया। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, लाखों लोग बेघर हो गए और सैकड़ों की जानें गईं। इसी संकट का फायदा उठाते हुए एलईटी ने अपने फ्रंट संगठन जमात-उद-दावा (जेयूडी) के माध्यम से राहत कार्यों का ढोंग रचा है। एलईटी कार्यकर्ता राहत सामग्री बांटते हुए तस्वीरें खिंचवा रहे हैं, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं। लेकिन खुफिया रिपोर्ट्स बताती हैं कि यह ‘सेवा’ मात्र एक दिखावा है। वास्तव में, जुटाए गए चंदे का बड़ा हिस्सा मुरिदके के मुख्यालय के पुनर्निर्माण में लगाया जा रहा है। यह वही रणनीति है जो 2005 के कश्मीर भूकंप के दौरान अपनाई गई थी, जब जेयूडी ने 80% राहत फंड को आतंकी कैंपों के निर्माण में डायवर्ट कर दिया था।

पाकिस्तानी रेंजर्स के साथ फोटो सेशन: भ्रम का जाल

हाल के दिनों में एलईटी कमांडर सैफुल्लाह कसूरी जैसे वरिष्ठ सदस्यों को पाकिस्तानी रेंजर्स के साथ राहत शिविरों में देखा गया। एक वीडियो में कसूरी, जो पहलगाम हमले का मास्टरमाइंड माना जाता है, पुलिस प्रोटोकॉल के साथ बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा करता नजर आ रहा है। एक्स (पूर्व ट्विटर) पर वायरल इस वीडियो में वह राहत सामग्री बांटते दिख रहे हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यह भर्ती का माध्यम भी है, जहां युवाओं को जिहाद के लिए ललकारा जा रहा है। भारतीय एजेंसियों के अनुसार, ये शिविर न केवल फंड जुटाने का जरिया हैं, बल्कि नए सदस्यों की भर्ती के केंद्र भी बन चुके हैं।

ऑपरेशन सिंदूर: एलईटी को लगे गहरे झटके

ऑपरेशन सिंदूर भारत की एक सटीक सैन्य कार्रवाई थी, जो 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले (जिसमें 26 नागरिक मारे गए) के जवाब में शुरू की गई। भारतीय वायुसेना के मिराज जेटों ने रात 12:35 बजे पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में घुसकर मुरिदके के 1.09 एकड़ के मरकज तैयबा परिसर पर हमला किया। हमले में लाल रंग की दो मंजिला इमारत (जो कैडर आवास और हथियार भंडारण के लिए इस्तेमाल होती थी) और दो पीली इमारतें (उम्म-उल-कुरा, प्रशिक्षण केंद्र) पूरी तरह ध्वस्त हो गईं। सैटेलाइट इमेजरी से साफ था कि केवल कंकाल बचे थे। इस हमले में एलईटी और जैश-ए-मोहम्मद के कम से कम पांच वरिष्ठ कमांडर मारे गए। कुल नौ ठिकानों पर हमला हुआ, जिसमें से दो वायुसेना ने संभाले। पाकिस्तान ने इसे ‘युद्ध का कार्य’ बताया, लेकिन भारत ने स्पष्ट किया कि केवल आतंकी ढांचे निशाना बने।

पुनर्निर्माण की तैयारी: फरवरी 2026 तक लक्ष्य

हमले के बाद 18 अगस्त 2025 को एलईटी ने पांच जेसीबी मशीनों से मलबा हटाना शुरू किया। अब पुनर्निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है, जिसकी निगरानी एलईटी के वरिष्ठ नेता मौलाना अबू जर (मरकज तैयबा निदेशक), उस्ताद उल मुजाहिदीन (प्रमुख प्रशिक्षक) और यूनुस शाह बुकरानी (ऑपरेशनल कमांडर) कर रहे हैं। संगठन का लक्ष्य फरवरी 2026 तक नया परिसर चालू करना है, जो कश्मीर एकजुटता दिवस पर संयोगवश है। यह परिसर न केवल कमांड सेंटर है, बल्कि सालाना 1000 कैडरों को प्रशिक्षण देने वाला केंद्र भी है।

पाकिस्तान सरकार का प्रत्यक्ष समर्थन: 4 करोड़ रुपये की मंजूरी

खुफिया दस्तावेजों से पता चलता है कि पाकिस्तान सरकार ने एलईटी और जैश-ए-मोहम्मद की सुविधाओं के पुनर्निर्माण के लिए सार्वजनिक रूप से धन देने की घोषणा की है। इस्लामाबाद ने पहले ही 4 करोड़ पाकिस्तानी रुपये (लगभग 12 लाख डॉलर) की औपचारिक मंजूरी दे दी है, जबकि कुल अनुमानित खर्च 15 करोड़ रुपये से अधिक है। यह फंड बाढ़ और भूकंप राहत के नाम पर जारी किए गए सरकारी पैकेज से डायवर्ट किया जा रहा है। पाकिस्तानी सेना के अधिकारी, जैसे लेफ्टिनेंट जनरल सैयद आमिर रजा (जनरल स्टाफ चीफ), को राहत सामग्री प्राप्त करते देखा गया, जो संदेह पैदा करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पाकिस्तान की ‘डबल गेम’ का प्रमाण है, जो वैश्विक मंचों पर आतंकवाद का शिकार होने का दावा करता है, लेकिन सीमा पार खूनखराबे को बढ़ावा देता है।

ऐतिहासिक पैटर्न: 2005 भूकंप का दोहराव

यह पहली बार नहीं है जब एलईटी ने आपदा का फायदा उठाया। 2005 के भूकंप में जेयूडी ने अंतरराष्ट्रीय दान के जरिए करोड़ों जुटाए, लेकिन अधिकांश को आतंकी कैंपों में लगाया। इसी तरह, 2010 की बाढ़ में भी फलाह-ए-इंसानियत फाउंडेशन (जेयूडी का एक और फ्रंट) ने राहत कार्यों के नाम पर फंडिंग की। अब 2025 की बाढ़ में भी यही हो रहा है, जहां ऑनलाइन कैंपेन और ऑफलाइन ड्राइव से चंदा इकट्ठा किया जा रहा है।

वैश्विक चिंताएं और भारत की चेतावनी

संयुक्त राष्ट्र और अमेरिकी खुफिया एजेंसियां पहले से ही एलईटी को वैश्विक खतरा मानती हैं। भारत ने पाकिस्तान से इन फंडिंग को तुरंत रोकने की मांग की है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, “पाकिस्तान की यह नीति क्षेत्रीय शांति के लिए खतरा है।” एक्स पर चर्चा में कई यूजर्स ने इसे ‘आतंकवाद को सरकारी संरक्षण’ बताया। एक पोस्ट में कहा गया, “बाढ़ राहत के नाम पर जिहादी भर्ती हो रही है, न कि असली मदद।” भारत ने सतर्कता बरतते हुए अपनी सीमाओं पर निगरानी बढ़ा दी है।

भविष्य की चुनौतियां: नया मुख्यालय, नई धमकी

पुनर्निर्मित मरकज तैयबा न केवल प्रशिक्षण केंद्र बनेगा, बल्कि हथियार भंडारण और रणनीतिक नियोजन का हब भी। इससे कश्मीर में आतंकी गतिविधियां बढ़ सकती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत को अब और सख्त कदम उठाने होंगे, जैसे अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ाना और साइबर निगरानी मजबूत करना।

मानवीय आड़ में छिपा खतरा

एलईटी का यह अभियान न केवल पाकिस्तान की नीतियों की पोल खोलता है, बल्कि वैश्विक आतंकवाद नेटवर्क की जटिलता को भी उजागर करता है। बाढ़ पीड़ितों को असली राहत देने के बजाय, यह फंडिंग आतंक को मजबूत कर रही है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को अब सतर्क हो जाना चाहिए, ताकि मानवीय सहायता गलत हाथों में न पहुंचे।

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