मुंबई – भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी (IT) क्षेत्र के लिए मंगलवार का दिन भारी उथल-पुथल भरा रहा। दिग्गज आईटी कंपनियों के शेयरों में 6 प्रतिशत तक की भारी गिरावट दर्ज की गई। इस गिरावट के पीछे मुख्य कारण चिप निर्माता कंपनी ‘एनवीडिया’ (Nvidia) द्वारा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) क्षेत्र में की गई बड़ी घोषणाएं और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की आगामी नीतिगत बैठक को लेकर निवेशकों की चिंता रही।
एनएसई (NSE) पर ‘निफ्टी आईटी इंडेक्स’ दिन का सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला सेक्टर रहा।
एनवीडिया का प्रभाव: क्या एआई खा जाएगा नौकरियां?
एनवीडिया के सीईओ जेन्सेन हुआंग ने घोषणा की कि 2027 तक एआई चिप्स से उनका राजस्व 1 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है। उन्होंने एक नया ‘एडवांस्ड एआई सिस्टम’ भी पेश किया, जो कार्यों को और अधिक स्वचालित बना सकता है। हुआंग के इस बयान ने कि “एआई की मांग लगातार बढ़ रही है”, भारतीय आईटी कंपनियों के निवेशकों के बीच इस डर को फिर से जीवित कर दिया है कि भविष्य में कोडिंग और सॉफ्टवेयर रखरखाव जैसे कार्यों के लिए इंसानों की जरूरत कम हो जाएगी।
बाजार का हाल: इंफोसिस और विप्रो में गिरावट
इस बिकवाली का असर सभी प्रमुख कंपनियों पर पड़ा:
- कोफोर्स (Coforge): इसमें 6% की सबसे बड़ी गिरावट देखी गई।
- इंफोसिस और विप्रो: इन कंपनियों के शेयर 2% से ज्यादा टूटे और कई ने 52-हफ्तों का नया निचला स्तर छुआ।
- टीसीएस (TCS) और एचसीएल टेक: इनमें भी करीब 2% की गिरावट रही।
फेडरल रिजर्व की बैठक और राजस्व का संकट
अमेरिकी फेडरल रिजर्व (US Fed) की बैठक से पहले निवेशक सावधानी बरत रहे हैं। चूंकि भारतीय आईटी कंपनियां अपना अधिकांश राजस्व (करीब 50-60%) अमेरिका से प्राप्त करती हैं, इसलिए ब्याज दरों में कोई भी बदलाव इन कंपनियों के मुनाफे पर सीधा असर डाल सकता है।
विशेषज्ञों की राय: खतरा या अवसर?
एआई को लेकर मचे इस हंगामे के बीच कुछ जानकारों का मानना है कि डर जरूरत से ज्यादा है। तकनीकी विश्लेषक संदीप कालरा ने कहा: “यह सच है कि एआई से काम करने का तरीका बदलेगा, लेकिन एआई मॉडल खुद को लागू नहीं कर सकते। बड़ी कंपनियों को अभी भी ऐसे विशेषज्ञों की जरूरत होगी जो इन एआई सिस्टम को उनके पुराने ढांचे के साथ जोड़ सकें।”
ब्रोकरेज फर्म ‘नुवामा’ ने भी मार्क ट्वेन के शब्दों का हवाला देते हुए कहा कि “आईटी सेक्टर की मौत की खबरें बहुत बढ़ा-चढ़ाकर बताई जा रही हैं।” उनके अनुसार, यह सेक्टर खत्म नहीं होगा बल्कि खुद को नई तकनीक के अनुसार ढाल लेगा।
मंगलवार की गिरावट इस बात का संकेत है कि भारतीय आईटी क्षेत्र अब एक चौराहे पर खड़ा है। जैसे-जैसे सिलिकॉन वैली से नई एआई तकनीकें आएंगी, भारतीय कंपनियों को ‘सर्विस प्रोवाइडर’ से बदलकर ‘सॉल्यूशन आर्किटेक्ट’ बनना होगा। तब तक बाजार में ऐसी अस्थिरता बनी रहने की संभावना है।