बरेली में ‘आई लव मोहम्मद’ विवाद: योगी सरकार का सख्त रुख, कानून हाथ में लेने वालों को नहीं बख्शा जाएगा

उत्तर प्रदेश के बरेली शहर में शुक्रवार को जुमे की नमाज के बाद ‘आई लव मोहम्मद’ पोस्टर विवाद ने हिंसक रूप धारण कर लिया। मुस्लिम समुदाय के लोगों ने पैगंबर मोहम्मद के प्रति प्रेम व्यक्त करने वाले इस नारे के समर्थन में सड़कों पर उतर आए, लेकिन पुलिस अनुमति न मिलने पर स्थिति बेकाबू हो गई। प्रदर्शनकारियों ने पथराव किया, वाहनों को नुकसान पहुंचाया, जबकि पुलिस को लाठीचार्ज और आंसू गैस का सहारा लेना पड़ा। इस घटना ने पूरे राज्य में तनाव पैदा कर दिया है, और योगी आदित्यनाथ सरकार ने स्पष्ट संदेश दिया है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कोई ढील नहीं बरती जाएगी। राज्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने जोर देकर कहा कि योगी शासन में कोई भी व्यक्ति कानून को अपने वश में नहीं कर सकता।

प्रदर्शन की शुरुआत और हिंसा का दौर

शुक्रवार दोपहर करीब 2:30 बजे बरेली के कोतवाली इलाके में इस्लामिया ग्राउंड के पास बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हो गए। इत्तेहाद-ए-मिल्लत काउंसिल (आईएमसी) के प्रमुख मौलाना तौकीर रजा खान ने इस प्रदर्शन का आह्वान किया था, जो कानपुर में ‘आई लव मोहम्मद’ बैनर पर दर्ज एफआईआर के विरोध में था। प्रदर्शनकारी हाथों में ‘आई लव मोहम्मद’ की तख्तियां लिए आला हजरत दरगाह और मौलाना तौकीर के आवास के बाहर जमा हुए। जुमे की नमाज शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुई, लेकिन नमाज के बाद भीड़ ने विभिन्न चौराहों पर जुलूस निकालने की जिद की। पुलिस ने कई जगहों पर बैठकें आयोजित कर स्पष्ट किया कि प्रशासन ने इस्लामिया ग्राउंड के लिए अनुमति नहीं दी है, लेकिन भीड़ नहीं मानी।

हालात तब बिगड़ गए जब प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया। कुछ जगहों पर गोलीबारी की भी खबरें आईं। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) अनुराग आर्य ने बताया कि दिन भर जिले में शांति बनी रही, लेकिन कोतवाली क्षेत्र में शरारती तत्वों ने अफरा-तफरी मचा दी। पुलिस ने न्यूनतम बल प्रयोग करते हुए लाठीचार्ज किया, जिससे भीड़ तितर-बितर हो गई। इस दौरान 10 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हो गए, और कई वाहनों को क्षति पहुंची। डीआईजी अजय साहनी ने इसे ‘सुनियोजित साजिश’ करार देते हुए कहा कि 95 प्रतिशत लोग नमाज के बाद चले गए थे, लेकिन शरारती लोगों ने पथराव और फायरिंग की।

योगी सरकार का कड़ा संदेश: कानून हाथ में लेने की छूट नहीं

इस घटना पर उत्तर प्रदेश के राज्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने सख्त लहजे में कहा, “योगी सरकार में किसी को भी कानून अपने हाथ में लेने की इजाजत नहीं है। सरकार और प्रशासन अपना काम जरूर करेंगे।” उन्होंने स्पष्ट किया कि शांति भंग करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। इसी क्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी बयान दिया कि “वह मौलाना भूल गया कि शासन किसका है।” योगी सरकार ने त्योहारों के दौरान अशांति फैलाने वालों को अल्टीमेटम दिया है कि उपद्रवियों पर बुलडोजर एक्शन जैसी सख्ती होगी।

मंत्री अनिल राजभर ने प्रदर्शन को निशाना बनाते हुए कहा कि “ये लोग भारत और यूपी के विकास को पचा नहीं पा रहे।” वहीं, मंत्री जयवीर सिंह ने इसे “शांति भंग करने की साजिश” बताया। पुलिस ने अब तक 11 एफआईआर दर्ज की हैं, जिसमें 2000 से अधिक लोग नामजद हैं। मौलाना तौकीर रजा को दो मुकदमों में सीधे आरोपी बनाया गया है, और उनकी पार्टी आईएमसी के अधिकांश पदाधिकारियों पर कार्रवाई हो रही है। लगभग 25 उपद्रवी हिरासत में हैं, और विस्तृत जांच जारी है।

विवाद की जड़: कानपुर से बरेली तक फैला तनाव

यह विवाद 4 सितंबर को कानपुर के रावतपुर में बरावफात जुलूस के दौरान शुरू हुआ, जब ‘आई लव मोहम्मद’ बोर्ड लगाने पर 9 नामजद और 15 अज्ञात के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई। मुस्लिम संगठनों का दावा है कि यह नारा पैगंबर के प्रति प्रेम का प्रतीक है, लेकिन कुछ जगहों पर इसे धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला माना गया। विवाद उत्तराखंड, कर्नाटक, तेलंगाना, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश तक फैल गया, जहां ‘आई लव महादेव’ जैसे जवाबी पोस्टर लगे। बरेली के अलावा मऊ में भी पथराव और लाठीचार्ज की घटनाएं हुईं। विपक्षी नेता अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर लिखा, “सरकारें लाठीचार्ज से नहीं, सद्भाव से चलती हैं।” कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने कहा कि हर कोई अपने ईश्वर से प्रेम कर सकता है।

पुलिस की सतर्कता और भविष्य की चुनौतियां

पुलिस ने संवेदनशील इलाकों में भारी फोर्स तैनात की, जिसमें 12 कंपनियां रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) और रैपिड रिस्पॉन्स फोर्स (आरआरएफ) शामिल हैं। आईजी, एसपी और डीएम ने फ्लैग मार्च किया। एसएसपी आर्य ने कहा कि आह्वान करने, भीड़ इकट्ठा करने और पुलिस को गुमराह करने वालों के खिलाफ सख्ती होगी। मौलाना तौकीर रजा को नजरबंद कर दिया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद धार्मिक स्वतंत्रता और कानून-व्यवस्था के बीच संतुलन का सवाल है। सरकार ने जांच को गहन बनाया है, ताकि दोषियों को सजा मिले और भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।

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