देहरादून-मसूरी मार्ग पर फिर भूस्खलन का कहर: गलोगी के निकट सड़क अवरुद्ध, सैकड़ों यात्री फंसे, राहत कार्य तेज

देहरादून, 23 सितंबर 2025: उत्तराखंड में मानसून की बेरहमी थमने का नाम नहीं ले रही। सोमवार सुबह देहरादून-मसूरी राजमार्ग पर गलोगी पावर हाउस के पास भारी भूस्खलन हो गया, जिससे प्रमुख पर्यटन मार्ग पूरी तरह अवरुद्ध हो गया। पहाड़ी से बड़ी मात्रा में मलबा और पत्थर गिरने से सड़क पर लंबा जाम लग गया, जबकि मलबा हटाने वाली जेसीबी मशीन की खराबी ने हालात को और जटिल बना दिया। इस घटना से सैकड़ों पर्यटक, स्थानीय निवासी और वाहन चालक बीच रास्ते में फंस गए हैं। प्रशासन ने वैकल्पिक व्यवस्था के तहत कोठालगेट बैरियर पर वाहनों को रोका है, जबकि दूसरी मशीन बुलाने का कार्य चल रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, मलबा साफ करने में कम से कम तीन से चार घंटे लग सकते हैं।

भूस्खलन की घटना: सुबह की अचानक तबाही

सुबह करीब 8 बजे गलोगी के पास पहाड़ी कटाव के कारण अचानक भारी मलबा सड़क पर आ गिरा। यह इलाका भूस्खलन के लिए कुख्यात है, जहां मानसून के दौरान हर साल ऐसी घटनाएं दोहराई जाती हैं। लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के अनुसार, लगातार हो रही हल्की बूंदाबांदी ने मिट्टी को ढीला कर दिया, जिससे यह हादसा हुआ। सड़क के दोनों ओर करीब 2-3 किलोमीटर लंबा वाहनों का सिलसिला लग गया। फंसे यात्रियों ने बताया कि कई परिवारों में बच्चे और बुजुर्ग हैं, जो भोजन और पानी की कमी से परेशान हो रहे हैं। एक पर्यटक ने कहा, “हम दिल्ली से मसूरी घूमने आए थे, लेकिन अब वापसी का भी रास्ता नहीं।” पुलिस और एसडीआरएफ की टीमें मौके पर पहुंचीं, लेकिन मशीन की खराबी ने राहत कार्य को धीमा कर दिया। अब दूसरी जेसीबी मौके पर पहुंच चुकी है, और मलबा हटाने का प्रयास तेज हो गया है।

फंसे यात्रियों की दुविधा: पर्यटक और स्थानीय प्रभावित

मार्ग बंद होने से देहरादून से मसूरी जा रहे सैकड़ों वाहन कोठालगेट पर ही रुक गए। मसूरी से उतरने वाले यात्री भी उल्टे रास्ते फंस गए। अनुमान है कि कम से कम 500-700 लोग प्रभावित हुए हैं, जिनमें अधिकांश पर्यटक हैं। स्थानीय निवासियों को दैनिक कार्यों में बाधा आ रही है, जबकि स्कूल-कॉलेज जाने वाले छात्रों को वैकल्पिक रूट अपनाने पड़ रहे हैं। एक बुजुर्ग महिला ने शिकायत की, “हमारे गांव में दवा लाने जाना था, लेकिन अब घंटों इंतजार कर रहे हैं।” प्रशासन ने हेल्पलाइन नंबर (0135-2713321) जारी किया है, जहां फंसे लोग संपर्क कर सकते हैं। साथ ही, एम्बुलेंस और मेडिकल टीम को प्राथमिकता दी जा रही है।

प्रशासन की कार्रवाई: मलबा हटाने और वैकल्पिक मार्ग

जिलाधिकारी सविन बंसल ने घटना की जानकारी मिलते ही एसडीएम मसूरी और पीडब्ल्यूडी अधिकारियों को तत्काल मौके पर भेजा। उन्होंने निर्देश दिए कि मलबा हटाने के साथ-साथ सड़क की मजबूती की जांच हो। दूसरी जेसीबी मशीन पहुंचने के बाद कार्य तेज हो गया है, और दोपहर तक मार्ग बहाल होने की उम्मीद है। वैकल्पिक रूप से, यात्री विकासनगर-यमुना ब्रिज-कैंपटी फॉल रूट से जा सकते हैं, हालांकि यह मार्ग लंबा (करीब 30 किमी अतिरिक्त) है। पुलिस ने ट्रैफिक डायवर्जन लागू किया है, और भारी वाहनों पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। एसडीआरएफ की दो टीमें अतिरिक्त सहायता के लिए तैनात हैं।

पुरानी घटनाओं का सिलसिला: मानसून में बार-बार खतरा

यह पहली बार नहीं है जब गलोगी इलाका भूस्खलन का शिकार हुआ है। बीते सप्ताह ही, 17 सितंबर को शिव मंदिर के पास ब्रिटिश कालीन पुल टूटने से दो दिनों तक मार्ग बंद रहा था। उस दौरान करीब 2,000 पर्यटक फंस गए थे, और बेली ब्रिज बनाकर उन्हें निकाला गया। 15-16 सितंबर को बादल फटने से देहरादून में 13 मौतें हुईं, जबकि मसूरी में एक मौत की पुष्टि हुई। मसूरी-धनौल्टी मार्ग पर भी वुडस्टॉक स्कूल के पास भूस्खलन नासूर बने हुए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन और अनियोजित निर्माण से ये जोन और खतरनाक हो गए हैं। स्थानीय होटल एसोसिएशन ने सरकार से 22 करोड़ की ट्रीटमेंट योजना को तेजी से लागू करने की मांग की है, ताकि पर्यटन प्रभावित न हो।

भविष्य की चिंताएं: स्थायी समाधान की मांग

उत्तराखंड में मानसून ने अब तक 15 से अधिक मौतें और सैकड़ों प्रभावित किए हैं। गलोगी जैसे संवेदनशील इलाकों में ट्रीटमेंट कार्य वर्षा के कारण रुक-रुक कर हो रहा है। पर्यावरणविदों का मानना है कि पहाड़ी कटाई रोकना और ड्रेनेज सिस्टम मजबूत करना जरूरी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हाल ही में प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया और राहत पैकेज की घोषणा की। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि संवेदनशील इलाकों में सतर्क रहें और यात्रा से पहले अपडेट लें। आईएमडी ने 20 सितंबर तक रेड अलर्ट जारी रखा है।

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