अध्यापकों की अनुपस्थिति पर हाईकोर्ट सख्त: ग्रामीण स्कूलों में उपस्थिति सुनिश्चित करने को ठोस कदम उठाए सरकार

गरीब बच्चों का शिक्षा अधिकार प्रभावित, डिजिटल उपस्थिति अनिवार्य

इलाहाबाद, 3 नवंबर 2025: इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को चेतावनी दी है कि ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी विद्यालयों में अध्यापकों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए ठोस और प्रभावी उपाय तत्काल लागू किए जाएं। न्यायमूर्ति प्रवीण कुमार गिरि की पीठ ने कहा कि देश की स्वतंत्रता के बाद से ही उपस्थिति प्रणाली की कमी से गरीब बच्चों का संवैधानिक शिक्षा अधिकार गंभीर रूप से प्रभावित हो रहा है। अदालत ने अन्य विभागों और संस्थानों में चल रही उपस्थिति निगरानी प्रणालियों की जानकारी मांगी और डिजिटल माध्यम से समयबद्ध रिकॉर्डिंग को अनिवार्य बताया। मामूली देरी पर नरमी बरती जा सकती है, लेकिन आदतन अनुपस्थित रहने वाले शिक्षकों को किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अगली सुनवाई 10 नवंबर 2025 को होगी।

बांदा अध्यापिका निलंबन मामला: औचक निरीक्षण में अनुपस्थित पाई गईं

याचिका पर सुनवाई, सरकार से व्यावहारिक नीति की मांग

मामला बांदा जिले के पैलानी स्थित एक सरकारी स्कूल की अध्यापिका इंद्रा देवी की याचिका से जुड़ा है। जिला मजिस्ट्रेट के औचक निरीक्षण में इंद्रा देवी अनुपस्थित पाई गईं, जिसके बाद उन्हें निलंबित कर दिया गया। याचिका में निलंबन को चुनौती दी गई है। अदालत ने इसे व्यापक मुद्दे से जोड़ते हुए कहा कि यह केवल एक व्यक्ति का मामला नहीं, बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र की खामी को उजागर करता है। ग्रामीण स्कूलों में जहां गरीब परिवारों के बच्चे पढ़ते हैं, वहां शिक्षकों की अनियमितता शिक्षा की गुणवत्ता को बुरी तरह प्रभावित कर रही है।

डिजिटल युग में उपस्थिति प्रणाली: मुख्य सचिव की बैठक के बाद भी कार्रवाई अपर्याप्त

30 अक्टूबर आदेश: इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्डिंग अनिवार्य

16 अक्टूबर को अदालत ने राज्य अधिकारियों को जमीनी स्तर पर “व्यावहारिक” उपस्थिति नीति बनाने का निर्देश दिया था। राज्य के स्थायी अधिवक्ता ने बताया कि मुख्य सचिव की अध्यक्षता में बैठक हो चुकी है। 30 अक्टूबर के आदेश में अदालत ने स्पष्ट किया कि टेक्नोलॉजी के इस दौर में अध्यापकों की उपस्थिति डिजिटल इलेक्ट्रॉनिक माध्यम (जैसे बायोमेट्रिक, ऐप आदि) से निर्धारित समय पर दर्ज होनी चाहिए। अदालत ने अन्य विभागों में सफल मॉडल अपनाने को कहा ताकि शिक्षक अनुपस्थिति की समस्या का स्थायी समाधान हो।

अदालत की सख्त टिप्पणी: आदतन अनुपस्थिति बर्दाश्त नहीं

मामूली देरी पर नरमी, लेकिन सिस्टम में सुधार जरूरी

न्यायमूर्ति गिरि ने कहा कि यातायात या अपरिहार्य कारणों से मामूली देरी पर थोड़ी छूट दी जा सकती है, लेकिन जो शिक्षक बार-बार अनुपस्थित रहते हैं, उन्हें सख्ती से रोका जाना चाहिए। अदालत ने सरकार से पूछा कि अन्य संस्थानों में उपस्थिति कैसे सुनिश्चित की जाती है, उसी तर्ज पर शिक्षा विभाग में लागू किया जाए। यह निर्देश RTE (शिक्षा का अधिकार) अधिनियम और संविधान के अनुच्छेद 21A की भावना को मजबूत करता है।

शिक्षा तंत्र की खामी: गरीब बच्चों का भविष्य दांव पर

स्वतंत्रता के बाद से समस्या, अब ठोस कदम की जरूरत

अदालत ने चिंता जताई कि दशकों से उपस्थिति प्रणाली की कमी से ग्रामीण शिक्षा प्रभावित है। सरकार को न केवल नीति बनानी है बल्कि जमीनी अमल सुनिश्चित करना होगा। अगली सुनवाई में सरकार को प्रगति रिपोर्ट सौंपनी होगी।

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