देहरादून।
विश्व हेपेटाइटिस दिवस (28 जुलाई) के अवसर पर सोसायटी फॉर हेल्थ एजुकेशन एंड वीमेन एम्पावरमेंट अवेयरनेस द्वारा संजय ऑर्थोपेडिक, स्पाइन एवं मैटरनिटी सेंटर में एक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम की मुख्य वक्ता डॉ. सुजाता संजय, स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ और 100 अचीवर्स ऑफ इंडिया सम्मानित चिकित्सक रहीं। उन्होंने गर्भावस्था के दौरान हेपेटाइटिस के खतरों और इससे बचाव के उपायों पर विस्तार से जानकारी दी।
हेपेटाइटिसः एक साइलेंट किलर
डॉ. सुजाता संजय ने बताया कि हेपेटाइटिस एक जानलेवा बीमारी है, जिसमें हेपेटाइटिस बी सबसे अधिक प्रभावित करने वाला वायरस है।
- विश्वभर में लगभग 500 मिलियन लोग (हर 12 में से 1 व्यक्ति) हेपेटाइटिस बी या सी वायरस से प्रभावित हैं।
- हर साल करीब 1 मिलियन मौतें इस बीमारी के कारण होती हैं।
- भारत में हर साल लगभग ढाई लाख लोग हेपेटाइटिस के शिकार बनते हैं।
उन्होंने बताया कि 70-80% मरीजों में लक्षण नहीं दिखाई देते, इसलिए इसे साइलेंट किलर कहा जाता है।
हेपेटाइटिस के प्रकार और कारण
डॉ. सुजाता ने बताया कि हेपेटाइटिस लीवर में वायरल संक्रमण से होने वाली सूजन है और यह लीवर कैंसर का मुख्य कारण भी है। इसे पांच श्रेणियों में बांटा गया है:
- हेपेटाइटिस ए और ई – प्रदूषित भोजन और पानी से फैलता है।
- हेपेटाइटिस बी, सी और डी – संक्रमित रक्त, सुई और अन्य माध्यमों से फैलता है।
उन्होंने बताया कि सबसे ज्यादा मरीज बी श्रेणी के होते हैं, जबकि सी श्रेणी सबसे खतरनाक स्टेज मानी जाती है। गर्भावस्था में महिलाओं को सी श्रेणी के हेपेटाइटिस का खतरा अधिक रहता है।
जीवनशैली और सावधानियां
डॉ. सुजाता ने कहा कि खराब जीवनशैली, अस्वास्थ्यकर भोजन और कीटनाशकों व भारी धातुओं के सेवन से लीवर पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। उन्होंने सलाह दी कि
- प्राकृतिक डिटॉक्सिफिकेशन विधियों को अपनाएं,
- संतुलित भोजन करें,
- और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें।
गर्भवती महिलाओं के लिए चेतावनी
डॉ. सुजाता ने बताया कि गर्भावस्था में पीलिया को कभी हल्के में नहीं लेना चाहिए। पीलिया खुद में बीमारी नहीं, बल्कि गंभीर रोग का संकेत हो सकता है और आगे चलकर हेपेटाइटिस का रूप ले सकता है। उन्होंने कहा कि समय पर जांच और उचित इलाज से हेपेटाइटिस से बचाव संभव है।