जॉर्ज एवरेस्ट भूमि आवंटन विवाद: कांग्रेस ने करार दिया ‘महाघोटाला’, पर्यटन मंत्री के इस्तीफे की मांग की

मसूरी के ऐतिहासिक स्थल पर सियासी तूफान

देहरादून, 15 सितंबर 2025: उत्तराखंड में पर्यटन विभाग द्वारा मसूरी के प्रसिद्ध जॉर्ज एवरेस्ट एस्टेट पर एडवेंचर टूरिज्म प्रोजेक्ट के लिए जारी टेंडर को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। विपक्षी दल कांग्रेस ने इसे राज्य के इतिहास का सबसे बड़ा भूमि घोटाला करार देते हुए भाजपा सरकार पर बाबा रामदेव के सहयोगी आचार्य बालकृष्ण को हजारों करोड़ की जमीन मात्र एक करोड़ रुपये के किराए पर सौंपने का गंभीर आरोप लगाया है। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पूरे प्रदेश में सरकार के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किए, जिसमें पुतला दहन और नारेबाजी प्रमुख रही। राजधानी देहरादून के एश्ले हॉल चौक पर आयोजित धरने में सैकड़ों कांग्रेसी शामिल हुए, जहां उन्होंने पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज से नैतिक आधार पर इस्तीफे की मांग की।

टेंडर प्रक्रिया पर गंभीर सवाल: आचार्य बालकृष्ण की कंपनियों का वर्चस्व

कांग्रेस का दावा है कि दिसंबर 2022 में उत्तराखंड पर्यटन विकास बोर्ड (UTDB) द्वारा जारी टेंडर में केवल तीन कंपनियों ने भाग लिया, और ये सभी आचार्य बालकृष्ण द्वारा नियंत्रित हैं। इनमें राजस एरोस्पोर्ट्स एंड एडवेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड (जिसे टेंडर मिला), भारुवा एग्री साइंस प्राइवेट लिमिटेड और प्रकृति ऑर्गेनिक्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं। कांग्रेस प्रदेश उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने कहा कि आचार्य बालकृष्ण की इन कंपनियों में 99.9 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जो टेंडर नियमों और एंटी-कोल्यूशन लॉ का स्पष्ट उल्लंघन है। उन्होंने इसे ‘क्रोनी कैपिटलिज्म’ का उदाहरण बताते हुए आरोप लगाया कि सरकार ने 142 एकड़ (लगभग 762 बीघा) मूल्यवान विरासत भूमि को मात्र 1 करोड़ रुपये सालाना किराए पर 15 वर्ष (विस्तार योग्य 30 वर्ष तक) के लिए सौंप दिया, जबकि इसकी बाजार कीमत 30,000 से 50,000 करोड़ रुपये बताई जा रही है। यह भूमि एशियाई विकास बैंक (ADB) से 23.5 करोड़ रुपये के ऋण पर विकसित की गई थी, जो अब सस्ते में निजी कंपनी को सौंपी गई।

कांग्रेस का आरोप: केवल एक करोड़ में करोड़ों का फायदा

धस्माना ने कहा कि यह आवंटन न केवल भ्रष्टाचार का प्रतीक है, बल्कि राज्य के युवाओं और महिलाओं की भूमि कानून की मांग पर कुठाराघात भी है। उन्होंने दावा किया कि टेंडर प्रक्रिया को विशेष रूप से एक ही समूह को लाभ पहुंचाने के लिए डिजाइन किया गया था। कांग्रेस नेता यशपाल आर्य ने विधानसभा में भी इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि जॉर्ज एवरेस्ट एस्टेट जैसी प्रीमियर पर्यटन संपत्ति को सौंपने से पहले पारदर्शिता की कमी साफ झलकती है। उन्होंने इसे भर्ती, खनन, पेपर लीक और शराब घोटालों से भी बड़ा बताया।

प्रदर्शन और आंदोलन की रूपरेखा

प्रदेश भर में कांग्रेस ने पहले चरण के विरोध के तौर पर भाजपा सरकार का पुतला दहन किया। देहरादून, मसूरी, हरिद्वार और अन्य जिलों में सड़कों पर उतरकर कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी की। पार्टी ने घोषणा की कि जल्द ही एक प्रतिनिधिमंडल राज्यपाल से मिलकर शिकायत दर्ज कराएगा। उसके बाद आंदोलन को तेज किया जाएगा, जिसमें धरना, रैलियां और विधानसभा मार्च शामिल होंगे। कांग्रेस अध्यक्ष करण महारा ने कहा कि उच्च स्तरीय जांच (CBI या रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में) की मांग पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा।

पर्यटन मंत्री पर निशाना: ‘कुंभकरण की नींद’

कांग्रेस ने पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज को सीधे निशाने पर लेते हुए कहा कि वे इस घोटाले पर चुप्पी साधे हुए हैं। धस्माना ने तंज कसते हुए कहा, “महा घोटाले ने अन्य घोटालों को पीछे छोड़ दिया, लेकिन सतपाल महाराज कुंभकरण की नींद सोए हैं।” पार्टी ने मंत्री से तत्काल इस्तीफे की मांग की, ताकि निष्पक्ष जांच हो सके।

भाजपा का जवाब: प्रक्रिया पारदर्शी, आरोप आधारहीन

भाजपा ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि जॉर्ज एवरेस्ट एस्टेट का आवंटन पूरी तरह पारदर्शी और नियमों के अनुरूप था। पार्टी प्रवक्ता मनवीर सिंह चौहान ने कहा कि 2012 से पहले यह स्थल जीर्ण-शीर्ण था, और अब पर्यटन गतिविधियां बढ़ने से रोजगार के अवसर पैदा हो रहे हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय ने भी स्पष्ट किया कि टेंडर प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया से हुआ, और किसी पक्षपात का प्रश्न ही नहीं उठता। पर्यटन सचिव धीरज सिंह गर्ब्याल ने कहा कि यदि औपचारिक शिकायत मिलती है, तो जांच के आदेश दिए जाएंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि स्थानीय लोगों की आवाजाही बाधित नहीं हुई है, और प्रोजेक्ट में पैराग्लाइडिंग, बंजी जंपिंग, हेलीकॉप्टर संचालन जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं।

विकास मॉडल पर सवाल: सरकार का बचाव

भाजपा ने कांग्रेस पर नकारात्मक प्रचार का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि हिमालयन दर्शन कार्यक्रम के तहत यह प्रोजेक्ट पर्यटन को बढ़ावा देगा, और भूमि का उपयोग केवल रखरखाव के लिए है। हालांकि, कांग्रेस ने इसे ‘लूट का अड्डा’ बताते हुए केंद्रीय सरकार के दबाव में पहाड़ी क्षेत्रों की जमीन सस्ते में बाहरी कंपनियों को सौंपने का आरोप लगाया।

विवाद की पृष्ठभूमि: जॉर्ज एवरेस्ट का महत्व

जॉर्ज एवरेस्ट एस्टेट मसूरी के पास स्थित एक ऐतिहासिक स्थल है, जो ब्रिटिश सर्वेक्षक जॉर्ज एवरेस्ट के नाम पर है। यह हिमालयी दृश्यों के लिए प्रसिद्ध है और पर्यटन का प्रमुख केंद्र है। 1987 में जिला प्रशासन ने 172.91 एकड़ भूमि अधिग्रहित की थी। दिसंबर 2022 के टेंडर में एडवेंचर स्पोर्ट्स, संग्रहालय, पार्किंग और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए बोली आमंत्रित की गई। लेकिन तीनों बोलीदाता एक ही व्यक्ति से जुड़े होने से विवाद भड़क गया।

जांच की मांग: हाईकोर्ट की निगरानी में CBI प्रोब

कांग्रेस ने हाईकोर्ट की निगरानी में CBI जांच की मांग की है। यशपाल आर्य ने कहा कि रिटायर्ड जज की कमिटी या CBI ही सच्चाई उजागर कर सकती है। पार्टी ने चेतावनी दी कि यदि जांच नहीं हुई, तो आंदोलन और तेज होगा। दूसरी ओर, सरकार ने सभी दस्तावेज सार्वजनिक करने का संकेत दिया है ताकि पारदर्शिता साबित हो।

सियासत का नया मोर्चा

यह विवाद उत्तराखंड की सियासत में नया मोड़ ला सकता है, खासकर आगामी चुनावों को देखते हुए। कांग्रेस इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ जन आंदोलन बनाने की कोशिश कर रही है, जबकि भाजपा विकास के नाम पर बचाव कर रही है। मामला अब राज्यपाल और अदालत के द्वार पर पहुंच चुका है, जहां से अगला कदम तय होगा।

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