एक बार फिर चर्चा में गैरसैंण
गैरसैंण को उत्तराखंड की स्थायी राजधानी बनाए जाने का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। हाल ही में उत्तराखंड हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल ने इस विषय पर नाराजगी जताते हुए कहा कि जनता को इस मसले पर लगातार भ्रमित किया जा रहा है। उनका यह बयान इंटरनेट पर वायरल हो गया है, जिसने वर्षों पुराने इस संवेदनशील विषय को फिर से चर्चा के केंद्र में ला खड़ा किया है।
हरीश रावत का वादा और न्यायमूर्ति की प्रतिक्रिया
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने एक स्थानीय समाचार पत्र को दिए बयान में कहा कि यदि कांग्रेस सत्ता में आती है तो वह गैरसैंण को राज्य की स्थायी राजधानी घोषित करेगी। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए न्यायमूर्ति थपलियाल ने कहा कि यदि समय रहते गैरसैंण को राजधानी बनाया गया होता, तो उत्तराखंड का विकास आज देहरादून तक सीमित न रहकर पूरे राज्य में संतुलित होता।
राज्य आंदोलन और राजधानी का सपना
उत्तराखंड राज्य आंदोलन के दौरान ही गैरसैंण को राजधानी बनाए जाने की मांग उठी थी। आंदोलनकारियों की सोच थी कि राजधानी पर्वतीय क्षेत्र में होनी चाहिए, ताकि वहां का भी विकास हो सके। लेकिन जब 2000 में राज्य बना, तो प्रशासनिक संसाधनों की कमी का हवाला देकर देहरादून को अस्थायी राजधानी बना दिया गया।
हर चुनाव से पहले गरमाया मुद्दा
समय-समय पर, विशेषकर चुनावों से पहले, गैरसैंण का मुद्दा फिर से उभरता रहा है। बीजेपी और कांग्रेस जैसी बड़ी पार्टियां इस विषय को केवल राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करती रही हैं। उत्तराखंड क्रांति दल (UKD) जैसे क्षेत्रीय दलों ने इस मुद्दे को उठाया जरूर, लेकिन बाद में सत्ता और गठबंधन की राजनीति में उनकी विश्वसनीयता कम हो गई।
ग्रीष्मकालीन राजधानी का प्रतीकात्मक दर्जा
पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित किया था, लेकिन यह निर्णय केवल प्रतीकात्मक बनकर रह गया। वास्तविक विकास, संसाधन, और सत्रों की नियमितता की कमी के चलते गैरसैंण अब भी हाशिए पर है। हाल ही में कुछ विधायकों ने ठंड का हवाला देते हुए गैरसैंण में विधानसभा सत्र से भी परहेज किया।
फिर उठा मुद्दा 2027 चुनाव से पहले
2027 के चुनाव से पहले एक बार फिर हरीश रावत इस मुद्दे को उठा रहे हैं, क्योंकि उन्हें मालूम है कि यह पहाड़ी जनता की भावनाओं से जुड़ा हुआ विषय है। लेकिन यह सवाल बना हुआ है कि जब उनके पास सत्ता थी, तो उन्होंने इसे क्यों नहीं अमल में लाया?
स्थायी राजधानी का लाभ
यदि गैरसैंण को पूरी तरह से विकसित कर स्थायी राजधानी बनाया जाए, तो इससे राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों में संस्थागत और सामाजिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।
- सरकारी योजनाएं सीधे पर्वतीय लोगों तक पहुँचेंगी
- प्रशासनिक तंत्र पर्वतीय क्षेत्रों में सक्रिय होगा
- रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं की बेहतर आपूर्ति संभव होगी
- ग्रामीण युवाओं के लिए अवसर बढ़ेंगे और पलायन में कमी आएगी
वादे नहीं, इच्छाशक्ति चाहिए
गैरसैंण की राजधानी बनने की मांग केवल राजनीतिक वादों तक सीमित न रहे, इसके लिए जरूरी है कि सरकारें वास्तविक इच्छाशक्ति और दीर्घकालिक योजना के साथ आगे आएं। जनता अब केवल भावनात्मक अपील नहीं, बल्कि ठोस कार्यवाही चाहती है।
लेखक परिचय
देवेंद्र कुमार बुडाकोटी, एक वरिष्ठ समाजशास्त्री हैं जो पिछले 40 वर्षों से NGO और सामाजिक विकास क्षेत्र से जुड़े हुए हैं। वे JNU के पूर्व छात्र हैं और उनके शोध कार्यों का उल्लेख नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन की पुस्तकों में भी हुआ है।