नोएडा में इंजीनियर की मौत: डेवलपर ने अदालत में दावा किया, प्राधिकरण के विज्ञापनों पर आपत्ति जताने के बाद हटाए गए थे बैरिकेड्स

खाई में कार गिरने से हुई मौत, अब अदालत में नया खुलासा

ग्रेटर नोएडा के सेक्टर 150 में एक खाई में कार गिरने से सॉफ्टवेयर इंजीनियर की मौत के मामले में नया मोड़ आया है। भूखंड के मालिक (डेवलपर) ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में दावा किया कि नोएडा प्राधिकरण ने जनवरी 2021 में नोएडा स्पोर्ट्स सिटी परियोजना पर लगे प्रतिबंध के बाद बैरिकेड हटवा दिए थे। डेवलपर ने यह भी कहा कि प्राधिकरण के विज्ञापनों पर आपत्ति जताने के कारण ही बैरिकेड हटाए गए थे। इस दौरान अदालत ने गिरफ्तार आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज कर उनकी न्यायिक हिरासत बढ़ा दी। अगली सुनवाई गुरुवार को होगी।

घटना का पृष्ठभूमि: क्या हुआ था उस रात

देहरादून से नोएडा में नौकरी करने वाला एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर अपनी कार से जा रहा था। सेक्टर 150 की एक अनियोजित खाई में कार गिर गई और उसकी मौके पर मौत हो गई। घटना के बाद पुलिस ने प्रबंधन और ठेकेदारों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया। जांच में सामने आया कि खाई को बैरिकेड से सुरक्षित नहीं किया गया था। अब डेवलपर ने अदालत में यह दावा किया है कि बैरिकेड पहले लगे थे, लेकिन प्राधिकरण के दबाव में हटा दिए गए।

डेवलपर का अदालत में दावा: विज्ञापनों पर आपत्ति जताने पर हटाए गए बैरिकेड

भूखंड के मालिक ने अदालत को बताया:

  • जनवरी 2021 में नोएडा स्पोर्ट्स सिटी परियोजना पर प्रतिबंध लगने के बाद बैरिकेड हटाए गए।
  • प्राधिकरण ने उनके विज्ञापनों पर आपत्ति जताई और छह लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया।
  • बैरिकेड हटाने का आदेश जुलाई 2021 में प्राधिकरण की ओर से दिया गया था।
  • इससे खाई अनियोजित और खतरनाक हो गई, जिसके कारण हादसा हुआ।

एक अधिकारी ने पुष्टि की कि डेवलपर ने अदालत में यह बात कही है और दस्तावेज भी पेश किए हैं।

अदालत का फैसला: जमानत याचिकाएं खारिज, हिरासत बढ़ी

मंगलवार को सूरजपुर स्थित मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में मामले की सुनवाई हुई। अदालत ने गिरफ्तार आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं और उनकी न्यायिक हिरासत बढ़ा दी। अगली सुनवाई बृहस्पतिवार को होगी। अधिकारी ने बताया कि मामले की जांच जारी है और सभी पक्षों के दावों की जांच की जा रही है।

प्राधिकरण की भूमिका पर सवाल: बैरिकेड हटाने का आदेश किस आधार पर?

डेवलपर के दावे से नोएडा प्राधिकरण की भूमिका पर सवाल खड़े हो गए हैं।

  • क्या प्राधिकरण ने वाकई विज्ञापनों पर आपत्ति के कारण बैरिकेड हटवाए?
  • क्या सुरक्षा उपायों की अनदेखी हुई?
  • क्या यह हादसा टाला जा सकता था?

प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि जांच में सभी दस्तावेजों की जांच की जा रही है। यदि डेवलपर का दावा सही साबित हुआ तो प्राधिकरण के अधिकारियों पर भी कार्रवाई हो सकती है।

प्रभाव: हादसे के बाद बढ़ी सुरक्षा की मांग

इस हादसे के बाद सेक्टर 150 और आसपास के क्षेत्रों में अनियोजित खाइयों और निर्माण स्थलों पर सुरक्षा उपायों की मांग तेज हो गई है। स्थानीय निवासियों ने प्राधिकरण से सभी खतरनाक स्थानों पर बैरिकेड लगाने और नियमित निगरानी की मांग की है।

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