विधि-विधान से संपन्न हुआ कपाट बंद समारोह, चोपता के लिए डोली प्रस्थान
रुद्रप्रयाग जिले के तुंगनाथ में स्थित तृतीय केदार श्री तुंगनाथ मंदिर के कपाट गुरुवार (7 नवंबर 2025) को पूर्वाह्न 11:30 बजे शुभ मुहूर्त में शीतकाल के लिए विधि-विधान से बंद कर दिए गए। कपाट बंद होने के बाद भगवान तुंगनाथ की चल विग्रह डोली ने प्रथम पड़ाव चोपता के लिए प्रस्थान किया। मंदिर को फूलों से भव्य रूप से सजाया गया था, और 500 से अधिक श्रद्धालु इस पवित्र क्षण के साक्षी बने। ढोल-नगाड़ों की थाप और “बाबा तुंगनाथ जी की जय” के जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। यह समारोह न केवल धार्मिक परंपरा का निर्वहन था, बल्कि पंच केदार यात्रा के समापन का भी प्रतीक बना। बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के मुख्य कार्याधिकारी विजय प्रसाद थपलियाल की उपस्थिति में पूजा-अर्चना संपन्न हुई, जिसने समारोह को और गरिमामय बनाया।
कपाट बंद की प्रक्रिया: समाधि रूप से डोली प्रस्थान तक
प्रातः काल मंदिर श्रद्धालुओं के लिए दर्शनार्थ खोला गया। नित्य पूजा-अर्चना के बाद तीर्थयात्री दर्शन कर पुण्य अर्जित करने लगे। साढ़े दस बजे से कपाट बंद की औपचारिक प्रक्रिया शुरू हुई:
- भोग यज्ञ और हवन पूजा संपन्न।
- स्वयंभू शिवलिंग को समाधि रूप प्रदान किया गया।
- 11:30 बजे कपाट बंद।
- चल विग्रह डोली मंदिर परिसर में विराजमान हुई, परिक्रमा की और श्रद्धालुओं को आशीर्वाद दिया।
- ढोल-नगाड़ों के साथ चोपता प्रस्थान।
यह प्रक्रिया वैदिक मंत्रोच्चार और परंपरागत रीति-रिवाजों से ओत-प्रोत रही, जो तुंगनाथ की प्राचीन धार्मिक विरासत को जीवंत करती है।
यात्रा वर्ष का लेखा-जोखा: 1.5 लाख से अधिक श्रद्धालु, शीतकालीन यात्रा पर जोर
बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कपाट बंद पर शुभकामनाएं देते हुए कहा कि इस यात्रा वर्ष 1.5 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने तुंगनाथ के दर्शन किए, जो अपेक्षा से अधिक सफल रहा। उन्होंने बताया कि चल विग्रह डोली 8 नवंबर को शीतकालीन गद्दी स्थल मक्कूमठ के मर्कटेश्वर मंदिर पहुंचेगी, जहां शीतकालीन पूजाएं शुरू होंगी। द्विवेदी ने घोषणा की:
“मंदिर समिति शीतकालीन यात्रा को प्रोत्साहित करेगी, ताकि भक्तों को वर्षभर दर्शन का अवसर मिले।”
बीकेटीसी उपाध्यक्ष विजय कप्रवाण और ऋषि प्रसाद सती ने भी यात्रा की सफलता पर प्रसन्नता जताई। मीडिया प्रभारी डॉ. हरीश गौड़ ने डोली यात्रा का विवरण दिया:
- 7 नवंबर: चोपता (प्रथम पड़ाव)।
- 8 नवंबर: भनकुन (दूसरा पड़ाव)।
- 9 नवंबर: मक्कूमठ पहुंचकर शीतकालीन प्रवास।
उपस्थितजन: बीकेटीसी पदाधिकारी से हक-हकूकधारी तक
समारोह में बीकेटीसी के प्रमुख पदाधिकारी और स्थानीय लोग शामिल रहे:
- बीकेटीसी उपाध्यक्ष: विजय कप्रवाण
- सदस्य: श्रीनिवास पोस्ती, प्रह्लाद पुष्पवान, देवी प्रसाद देवली, डॉ. विनीत पोस्ती
- मुख्य कार्याधिकारी/कार्यपालक मजिस्ट्रेट: विजय प्रसाद थपलियाल
- मठापति: रामप्रसाद मैठाणी
- केदारनाथ प्रभारी: यदुवीर पुष्पवान
- प्रबंधक: बलबीर नेगी
- अन्य: अरविंद शुक्ला, प्रकाश पुरोहित, दीपक पंवार, चंद्र मोहन बजवाल
- पुजारी: अतुल मैठाणी, अजय मैठाणी
- हक-हकूकधारी और अधिकारी-कर्मचारी
500+ श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने समारोह को जन-भागीदारी का रंग दिया।
शीतकालीन महत्व: मक्कूमठ में 6 माह की पूजा, पर्यटन को बढ़ावा
तुंगनाथ विश्व का सबसे ऊंचा शिव मंदिर होने के कारण शीतकाल में बर्फ से ढक जाता है, इसलिए 6 माह मक्कूमठ में पूजा होती है। बीकेटीसी की शीतकालीन यात्रा प्रोत्साहन योजना से:
- स्थानीय अर्थव्यवस्था को बल।
- पर्यटन का विस्तार।
- भक्तों को वर्षभर सुविधा।
यह कदम पंच केदार यात्रा को और समृद्ध बनाएगा।