देहरादून, 28 सितंबर 2025 जिलाधिकारी सविन बसंल ने आज ऋषिपर्णा सभागार, कलेक्ट्रेट देहरादून में सीएम हेल्पलाइन की समीक्षा बैठक की। इस दौरान उन्होंने सभी विभागों को स्पष्ट निर्देश दिए कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर प्राप्त जन शिकायतों का गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करें। डीएम ने लंबित शिकायतों के प्रति सख्त नाराजगी जताते हुए सभी विभागों को दो दिनों के भीतर इनका समाधान करने का आदेश दिया। उन्होंने कहा कि सीएम हेल्पलाइन न केवल आम जनता की समस्याओं का समाधान है, बल्कि यह अच्छे शासन (गुड गवर्नेंस) का संदेश भी देता है।
जनसुनवाई प्रणाली: राज्य सरकार की प्राथमिकता
जिलाधिकारी ने कहा कि जनसुनवाई प्रणाली राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इस प्रणाली के तहत प्राप्त शिकायतों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। डीएम ने अधिकारियों को संवेदनशीलता के साथ कार्य करने की सलाह दी और कहा कि सीएम हेल्पलाइन हर परेशान और व्यथित व्यक्ति की उम्मीद का केंद्र है। उन्होंने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों से अपील की कि वे अपनी जिम्मेदारी को गंभीरता से लें और शिकायतों का समाधान त्वरित रूप से करें।
दो दिनों में लंबित शिकायतों का निस्तारण
समीक्षा के दौरान डीएम ने विभिन्न विभागों में लंबित शिकायतों की स्थिति पर गहरी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने सभी विभागों को निर्देश दिए कि सीएम हेल्पलाइन पोर्टल पर लंबित शिकायतों को दो दिनों के भीतर निस्तारित किया जाए। डीएम ने एक-एक विभाग की लंबित शिकायतों की विस्तृत समीक्षा की और समयबद्ध निस्तारण के लिए सख्त दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि निस्तारित शिकायतों की फीडबैक कॉल्स की जांच की जाए, ताकि शिकायतकर्ता की संतुष्टि की पुष्टि हो सके।
बार-बार आने वाली शिकायतों पर स्थायी समाधान
जिलाधिकारी ने उन शिकायतों पर विशेष ध्यान देने को कहा, जो बार-बार दर्ज हो रही हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ऐसी शिकायतों का स्थायी समाधान सुनिश्चित करें, ताकि आम जनता को बार-बार परेशानी न उठानी पड़े। डीएम ने कहा कि शिकायतों को केवल औपचारिकता के तौर पर नहीं, बल्कि गंभीरता से लिया जाए। उन्होंने यह भी जोड़ा कि शिकायतों का निस्तारण समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण होना चाहिए, ताकि जनता को वास्तविक राहत मिल सके।
जवाबदेही और पारदर्शिता पर जोर
डीएम ने स्पष्ट किया कि यदि किसी शिकायत का समयबद्ध निस्तारण नहीं होता, तो संबंधित विभागीय अधिकारी की जवाबदेही तय की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि शिकायतों के निस्तारण की जानकारी सीधे पोर्टल पर अपलोड की जाए और संतुष्टि फीडबैक पर विशेष ध्यान दिया जाए। इसके अलावा, सभी विभागों को लंबित प्रकरणों की अद्यतन स्थिति प्रस्तुत करने और प्रत्येक माह प्रगति की समीक्षा करने के लिए कहा गया। पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) को नियमित मॉनिटरिंग का जिम्मा सौंपा गया।
विभागों में लंबित शिकायतों की स्थिति
समीक्षा बैठक में सामने आया कि विभिन्न विभागों में शिकायतों की संख्या निम्नलिखित है:
- पुलिस विभाग: 368 शिकायतें
- लोक निर्माण विभाग (लोनिवि): 252 और 272 शिकायतें
- यूपीसीएल: 361 और 242 शिकायतें
- जल संस्थान: 276 और 203 शिकायतें
- नगर निगम: 358 शिकायतें
- एमडीडीए: 177 शिकायतें
- पेयजल निगम: 88 शिकायतें
- राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण: 50 शिकायतें
- यूटीयू: 35 शिकायतें
- यूयूएसडीए: 29 शिकायतें
- सिंचाई विभाग: 29 शिकायतें
- नगर पालिका: 20 शिकायतें
- जिला पंचायत: 18 शिकायतें
- प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड: 15 शिकायतें
- प्राथमिक शिक्षा: 14 शिकायतें
- भूलेख: 13 शिकायतें
- वन विभाग: 12 शिकायतें
बैठक में उपस्थित अधिकारी
बैठक में अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) के.के. मिश्रा, उप जिलाधिकारी कुमकुम जोशी सहित सभी संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।