आपदा योद्धाओं का सम्मान: मुख्यमंत्री धामी ने राहत कर्मियों को किया पुरस्कृत, स्कूल-कॉलेजों में आपदा प्रशिक्षण को शामिल करने का ऐलान

देहरादून, 05 अक्टूबर 2025 उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को पटेल नगर के राजकीय दून मेडिकल कॉलेज में ‘अर्पित फाउंडेशन’ द्वारा आयोजित ‘प्राइड मूवमेंट सम्मान समारोह’ में भाग लिया। इस अवसर पर उन्होंने हालिया आपदाओं में राहत एवं बचाव कार्यों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पुलिस और आईटीबीपी के वीर कर्मियों को सम्मानित किया। सीएम धामी ने कहा कि ये सम्मान उन नायकों के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक हैं, जिन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर मानव जीवन बचाया। साथ ही, उन्होंने घोषणा की कि आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण को स्कूलों और कॉलेजों के पाठ्यक्रम में शामिल करने की प्रक्रिया तेज की जाएगी। यह कदम राज्य की आपदा-प्रवण भौगोलिक स्थिति को देखते हुए युवा पीढ़ी को तैयार करने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है।

सम्मान समारोह का महत्व: आपदा नायकों का सम्मान, कृतज्ञता का प्रतीक

मुख्यमंत्री धामी ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि उत्तराखंड का नाम लेते ही इसके प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिक महत्व के साथ-साथ भौगोलिक चुनौतियां और वार्षिक आपदाएं भी याद आती हैं। हिमालय की गोद में बसे इस राज्य में भूस्खलन, बाढ़, अतिवृष्टि जैसी प्राकृतिक आपदाएं आम हैं। “देवभूमि का सौंदर्य जितना मनमोहक है, उतनी ही अप्रत्याशित चुनौतियां भी हैं,” धामी ने कहा।

समारोह में एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पुलिस और आईटीबीपी के चुनिंदा कर्मियों को सम्मानित किया गया, जिन्होंने हालिया आपदाओं में ग्राउंड जीरो पर डटकर राहत कार्य किए। मुख्यमंत्री ने कहा कि ये योद्धा आपदा के समय प्रथम पंक्ति में खड़े रहते हैं, और उनका जज्बा राज्य का गौरव बढ़ाता है।

आपदा की त्रासदी: 2013 केदारघाटी से 2023 जोशीमठ धंसाव तक की यादें

सीएम धामी ने राज्य की आपदा इतिहास को याद करते हुए कहा कि 2013 की केदारनाथ आपदा ने हजारों जिंदगियां लील लीं, जबकि 2021 की ऋषिगंगा-धौलीगंगा त्रासदी ने पूरे देश को झकझोर दिया। 2023 में जोशीमठ का धंसाव एक नई चुनौती के रूप में उभरा। इस वर्ष उत्तरकाशी, चमोली और देहरादून में भारी बारिश, बादल फटने और भूस्खलन की कई घटनाओं ने भारी तबाही मचाई। “इन आपदाओं में जान-माल की हानि के साथ-साथ संपत्ति को अपूरणीय क्षति पहुंची,” धामी ने कहा।

उन्होंने बताया कि इन संकटों में मानव जीवन की रक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता थी। एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और पुलिस ने मलबे में फंसे लोगों को निकालने के लिए दिन-रात एक कर दिया। सिल्क्युला टनल हादसे में फंसे मजदूरों का बचाव अभियान इसका जीता-जागता उदाहरण है, जहां पूरे देश की नजर लगी थी। “बाबा बौखनाग के आशीर्वाद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन से यह अभियान सफल रहा,” धामी ने कहा।

केंद्र सरकार का सहयोग: 1200 करोड़ की राहत राशि, पुनर्वास पर फोकस

मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार के सहयोग की सराहना की। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी ने स्वयं देहरादून आकर प्रभावित परिवारों से मुलाकात की, उनकी समस्याएं सुनीं और त्वरित निर्णय लिए। गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में 1200 करोड़ रुपये की विशेष राहत राशि जारी की गई, जो पुनर्वास और पुनर्निर्माण में सहायक सिद्ध हुई।

धामी ने जोर देकर कहा कि आपदा केवल भौतिक क्षति ही नहीं पहुंचाती, बल्कि लोगों का आत्मविश्वास और भविष्य भी तोड़ती है। इसलिए सरकार ने मुआवजे के साथ-साथ आजीविका और पुनर्वास पर विशेष ध्यान दिया है।

आपदा प्रबंधन में मजबूती: ड्रोन, जीपीएस और आपदा मित्र योजना

मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार की पहलों पर प्रकाश डाला। एसडीआरएफ जवानों को ड्रोन, सैटेलाइट मॉनिटरिंग और आधुनिक रेस्क्यू उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं। ‘आपदा मित्र योजना’ के तहत गांव-गांव में स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षित किया जा रहा है। सड़क-पुल निर्माण में डिजास्टर रेजिलिएंट तकनीक अनिवार्य की गई है।

धामी ने घोषणा की कि आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण को स्कूल-कॉलेजों के पाठ्यक्रम में शामिल करने की प्रक्रिया प्रारंभ हो चुकी है। “आने वाली पीढ़ी को आपदाओं से निपटने के लिए तैयार करना हमारी जिम्मेदारी है,” उन्होंने कहा।

कार्यक्रम का विशेष क्षण: नकल विरोधी कानून पर छात्रों का आभार

समारोह के दौरान छात्रों ने नकल विरोधी कानून लागू करने के लिए मुख्यमंत्री का विशेष स्वागत किया। धामी ने छात्रों को आश्वस्त किया कि सरकार पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया सुनिश्चित करेगी। कार्यक्रम की संयोजक हनी पाठक ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

उपस्थित गणमान्य व्यक्ति: विधायकों और अधिकारियों की भागीदारी

इस अवसर पर विधायक प्रेमचंद अग्रवाल, स्वामी रूपेंद्र प्रकाश, कृष्ण गिरी महाराज, अपर पुलिस महानिदेशक वी. मुरुगेशन सहित कई गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे। कार्यक्रम में आपदा प्रभावित परिवारों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए, जिन्होंने सरकार की त्वरित कार्रवाई की सराहना की।

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