देहरादून, 20 सितंबर 2025 (संवाददाता): उत्तराखंड में प्रलयंकारी वर्षा ने मात्र 48 घंटों में राज्य के दो प्रमुख जिलों—देहरादून और चमोली—को बुरी तरह झकझोर दिया है। कभी पहाड़ी इलाकों तक सीमित रहने वाली ऐसी विपत्तियां इस बार मैदानी क्षेत्रों में भी उतरीं, जहां बाढ़ और भूस्खलन ने जीवन को तहस-नहस कर दिया। देहरादून में बादल फटने की घटना ने शहर की सूरत ही पलट दी, जबकि चमोली के नंदानगर में अतिवृष्टि ने गांवों को मलबे के ढेर में बदल दिया। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, देहरादून में 24 लोगों की जान जा चुकी है, वहीं चमोली में कम से कम दो मौतें और 14 लोग लापता हैं। कुल मिलाकर 29 लोग अब भी सुरक्षित नहीं हैं। प्रशासन राहत कार्यों में जुटा है, लेकिन लगातार हो रही झमाझम बारिश और अवरुद्ध मार्गों ने चुनौतियां बढ़ा दी हैं। मौसम विभाग की चेतावनी से स्थिति और गंभीर हो गई है—20 सितंबर तक वर्षा का सिलसिला जारी रहने की आशंका है।
देहरादून में बादल फटने का कहर: सहस्त्रधारा और मालदेवता में संपर्क कटा, दर्जनों सड़कें-ब्रिज क्षतिग्रस्त
देहरादून जिले में अचानक बादल फटने और मूसलाधार वर्षा ने सबसे अधिक विध्वंस मचाया। सहस्त्रधारा क्षेत्र में नदी का जलस्तर इतना उफान मार गया कि आसपास के कई गांव पानी की चपेट में आ गए। तेज धारा में होटल, दुकानें और आवास बह गए, जिससे स्थानीय निवासियों का शहर से जुड़ाव पूरी तरह टूट गया। मालदेवता इलाके में 12 से अधिक गांव बाहरी दुनिया से कट चुके हैं—यहां पुल ध्वस्त हो गए, सड़कों पर भारी मलबा जमा हो गया, और लोग अपने घरों में ही कैद होकर रह गए।
एक दिल दहला देने वाली घटना टपकेश्वर महादेव मंदिर के साथ घटी, जो देहरादून का प्रमुख धार्मिक केंद्र है। एक रात की बौछारों ने तमसा नदी को उन्मादी बना दिया, जिसके परिणामस्वरूप मंदिर परिसर का पुल बह गया। उन क्षेत्रों तक पानी पहुंच गया, जहां कभी कल्पना भी नहीं की गई थी। मंदिर के कमरे और अन्य संरचनाएं मलबे के नीचे दब गईं। आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार, पिछले 48 घंटों में जिले में 62 सड़कें और 8 पुल पूरी तरह धराशायी हो चुके हैं। इनमें देहरादून-हरिद्वार राष्ट्रीय राजमार्ग, हिमाचल प्रदेश से जोड़ने वाली सड़क और मसूरी मार्ग भी शामिल हैं। इससे यातायात ठप हो गया है, और राहत सामग्री पहुंचाने में भारी परेशानी हो रही है।
मसूरी में वर्षा का प्रकोप: पर्यटक फंसे, मार्ग घंटों अवरुद्ध, कैंपटी और धनोल्टी प्रभावित
‘पहाड़ों की रानी’ मसूरी भी इस विपत्ति से अछूती नहीं रही। यहां 48 घंटों से अनवरत हो रही बरसात ने हाहाकार मचा दिया। मसूरी-देहरादून सड़क भूस्खलन के कारण कई बार बंद हो चुकी है, और अभी केवल पैदल आवागमन संभव है। वाहनों के लिए रास्ता पूरी तरह अवरुद्ध है। कैंपटी फॉल्स और धनोल्टी मार्ग भी कई घंटों तक बंद रहे, जिससे सैकड़ों पर्यटक होटलों में फंस गए। कुछ ने अपनी गाड़ियां छोड़कर पैदल ही नीचे उतरने का सहारा लिया। कई पुलों के बह जाने से स्थिति और जटिल हो गई। हालांकि, बाद में कुछ मार्गों को खोला गया, जिससे पर्यटक सुरक्षित स्थानों पर पहुंच सके। स्थानीय प्रशासन ने पर्यटकों को चेतावनी जारी की है कि यात्रा न करें, क्योंकि भूस्खलन का खतरा बरकरार है।
चमोली में अतिवृष्टि की मार: नंदानगर के गांव मलबे में दबे, 14 लापता, रेस्क्यू अभियान जारी
चमोली जिला भी इस प्राकृतिक कहर से बुरी तरह प्रभावित हुआ है। नंदानगर ब्लॉक के कुंतरी लगा फाली, सरपाणी और धुर्मा गांवों में अतिवृष्टि ने रातोंरात तबाही ला दी। रात के अंधेरे में सो रहे ग्रामीणों पर मलबा गिर पड़ा, जिससे घर-दबोए, संपत्ति नष्ट हो गई। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी के अनुसार, कुंतरी लगा फाली में एक व्यक्ति की मृत्यु हो चुकी है, चार लापता हैं, जबकि 11 लोगों को मलबे से निकाला गया—इनमें एक बुरी तरह घायल व्यक्ति भी शामिल है। सरपाणी में एक मौत और एक लापता व्यक्ति दर्ज है, वहीं धुर्मा में दो लोग गायब हैं, लेकिन एक को बचा लिया गया। कुल 14 लोग अभी भी लापता हैं।
घटना के समय ग्रामीण घरों में थे, जब अचानक पहाड़ी से मलबा खिसक आया। रेस्क्यू टीमें मौके पर हैं, लेकिन भारी वर्षा और दुर्गम इलाकों के कारण कार्य धीमा चल रहा है। चमोली प्रशासन ने राहत शिविर स्थापित किए हैं, जहां प्रभावित परिवारों को भोजन और आश्रय उपलब्ध कराया जा रहा है।
मौसम विभाग की चेतावनी: 20 सितंबर तक वर्षा बरसात, सहस्त्रधारा में रिकॉर्ड तोड़ा
मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून के निदेशक रोहित थपलियाल ने गंभीर चेतावनी जारी की है कि यह वर्षा का दौर 20 सितंबर तक थमने वाला नहीं। देहरादून के सहस्त्रधारा में एक ही दिन में 264 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जो सदी पुराना रिकॉर्ड तोड़ चुकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन और अवैध निर्माण ने ऐसी आपदाओं को और घातक बना दिया है। प्रशासन ने सभी जिलों में हाई अलर्ट घोषित कर दिया है।
प्रशासनिक प्रयास और भविष्य की चुनौतियां: क्या उत्तराखंड तैयार है ऐसी विपत्तियों के लिए?
उत्तराखंड सरकार ने तत्काल राहत के लिए एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमें तैनात की हैं। मुख्यमंत्री ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने का ऐलान किया है, जबकि केंद्रीय सहायता के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। हालांकि, विशेषज्ञ सवाल उठा रहे हैं कि क्या राज्य बार-बार आने वाली ऐसी आपदाओं से निपटने के लिए पूरी तरह सजग है? नुकसान का आकलन जारी है, और पुनर्वास कार्य में महीनों लग सकते हैं। स्थानीय निवासी कहते हैं कि जल संरक्षण और निर्माण नियमों का सख्ती से पालन ही भविष्य की रक्षा कर सकता है।
इस विपत्ति ने उत्तराखंड को गहरी चोट पहुंचाई है, लेकिन एकजुटता से उबरने की उम्मीद बंधी है। राहत कार्यों में जन सहयोग की अपील की गई है।