मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में नशा मुक्ति को जनांदोलन बनाने की दिशा में मजबूत कदम
देहरादून।
उत्तराखंड सरकार “नशा मुक्त उत्तराखंड” के अपने संकल्प को धरातल पर उतारने के लिए सक्रिय रूप से कार्य कर रही है। स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार की अध्यक्षता में आयोजित राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण की महत्वपूर्ण बैठक में नशा मुक्ति केंद्रों की सख्त निगरानी और अवैध संस्थानों पर कठोर कार्रवाई के निर्णय लिए गए हैं।
अवैध और अपंजीकृत नशा मुक्ति केंद्र होंगे बंद
बैठक में निर्णय लिया गया कि प्रदेश भर में सभी जिला स्तरीय निरीक्षण टीमों का गठन कर नशा मुक्ति केंद्रों की गहन जांच की जाएगी। जो भी केंद्र बिना पंजीकरण के संचालित हो रहे हैं या निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतरते, उन पर आर्थिक दंड के साथ कानूनी कार्रवाई करते हुए तत्काल बंद किया जाएगा।
“नशा मुक्त उत्तराखंड” केवल अभियान नहीं, एक जन आंदोलन
स्वास्थ्य सचिव ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की नेतृत्व वाली सरकार इस मुद्दे को केवल सरकारी स्तर पर नहीं, बल्कि एक सामाजिक क्रांति के रूप में देख रही है। समाज के हर वर्ग की भागीदारी इस अभियान को सफल बनाने में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
जन-जागरूकता को बताया सबसे असरदार उपाय
डॉ. राजेश कुमार ने जन-जागरूकता को नशा मुक्ति की सबसे प्रभावी रणनीति बताते हुए सभी विभागों से ग्राम से लेकर शहरी स्तर तक अभियान चलाने की अपील की। उन्होंने कहा कि जन सहयोग से ही समाज को नशे की प्रवृत्तियों से पूरी तरह मुक्त किया जा सकता है।
मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं में भी आएगा सुधार
बैठक में बताया गया कि राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को और सुदृढ़ बनाने के लिए नई कार्य योजना पर काम कर रहा है। मानसिक स्वास्थ्य देखरेख अधिनियम, 2017 के प्रभावी क्रियान्वयन को तेज किया जाएगा।
प्राधिकरण को बनाएंगे सशक्त और पारदर्शी
स्वास्थ्य सचिव ने कहा कि राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण को और अधिक सशक्त, पारदर्शी व उत्तरदायी बनाया जाएगा, जिससे लोगों को उच्च गुणवत्ता वाली और भरोसेमंद सेवाएं मिल सकें।
उपस्थित अधिकारीगण
इस अहम बैठक में महानिदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य डॉ. सुनीता टम्टा, मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. शिखा जंगपांगी, संयुक्त निदेशक डॉ. सुमित बरमन, सहायक निदेशक डॉ. पंकज सिंह सहित कई अधिकारी और प्राधिकरण सदस्य उपस्थित रहे।