आपातकाल के 50 वर्ष पूर्ण होने पर लोकतंत्र सेनानियों का सम्मान
आपातकाल के विरुद्ध आंदोलन को बताया राष्ट्रव्यापी जनक्रांति
लोकतंत्र सेनानियों को “संविधान हत्या दिवस” पर किया गया सम्मानित
प्रधानमंत्री मोदी और केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव की भूमिका का उल्लेख
उत्तराखंड के सेनानियों के संघर्ष और योगदान को दी गई श्रद्धांजलि
नई पीढ़ी को लोकतंत्र की कीमत समझाने हेतु प्रदर्शनियों का आयोजन
उत्तराखंड में लोकतंत्र के रक्षकों को सम्मानित करने की श्रृंखला में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून स्थित हिमालयन सांस्कृतिक केंद्र में आपातकाल के 50 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में भाग लिया। इस कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव सहित अनेक गणमान्य उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने 10 लोकतंत्र सेनानियों को सम्मानित कर उनके अदम्य साहस और योगदान को नमन किया।
लोकतंत्र रक्षकों को समर्पित श्रद्धांजलि
सीएम धामी ने कहा कि यह हमारे लिए सौभाग्य की बात है कि हम आज उन महानायकों को सम्मानित कर रहे हैं, जिन्होंने लोकतंत्र की रक्षा में अपने जीवन की आहुति तक देने से परहेज नहीं किया। आपातकाल के दौरान लोकतंत्र को बचाने वाले नेताओं और संगठनों की भूमिका को रेखांकित करते हुए उन्होंने लोकनायक जयप्रकाश नारायण, अटल बिहारी वाजपेयी, नानाजी देशमुख, लालकृष्ण आडवाणी, और अन्य सेनानियों के योगदान को याद किया।
आपातकाल: तानाशाही का काला अध्याय
मुख्यमंत्री ने कहा कि 25 जून 1975 को भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में एक काले अध्याय की शुरुआत हुई, जब एक परिवार की तानाशाही और सत्ता लोभ के कारण पूरे देश को खुली जेल में तब्दील कर दिया गया। प्रेस की स्वतंत्रता पर सेंसरशिप, न्यायपालिका की गरिमा का हनन और मौलिक अधिकारों का दमन – यह सब एक योजनाबद्ध तानाशाही का हिस्सा था।
उत्तराखंड के सेनानियों का गौरवशाली योगदान
मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड के लोकतंत्र सेनानियों जैसे चंद्र सिंह राठौर (बागेश्वर) और गोविंद राम ढींगरा (पौड़ी) का विशेष उल्लेख किया, जिन्होंने लोकतंत्र के लिए संघर्ष करते हुए अपने व्यक्तिगत जीवन की बड़ी कीमत चुकाई। उन्होंने कहा कि राज्य के प्रत्येक जिले में ऐसे उदाहरण मिलते हैं जिन्होंने लोकतंत्र की लौ बुझने नहीं दी।
युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा
सीएम धामी ने कहा कि हमारी सरकार का लक्ष्य है कि आपातकाल की घटनाओं और लोकतंत्र सेनानियों के संघर्ष से नई पीढ़ी को अवगत कराया जाए। इसी उद्देश्य से प्रदेश भर में प्रदर्शनियों और जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा “संविधान हत्या दिवस” की परंपरा की शुरुआत का भी उल्लेख किया।
प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रीय योगदान
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी ने आपातकाल के दौरान भूमिगत रहकर लोकतंत्र की रक्षा में अग्रणी भूमिका निभाई थी। उन्होंने 1978 में “संघर्षमां गुजरात” पुस्तक भी लिखी थी। हाल ही में गृह मंत्री अमित शाह द्वारा विमोचित “द इमरजेंसी डायरीज” पुस्तक के माध्यम से भी नई पीढ़ी को सच से रूबरू कराने का प्रयास हो रहा है।
सरकार का वादा: सेवा, सम्मान और संरक्षण
सीएम धामी ने दोहराया कि उत्तराखंड सरकार लोकतंत्र सेनानियों की हर समस्या के समाधान के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि इस तरह के सम्मान कार्यक्रम हर वर्ष आयोजित किए जाएंगे ताकि राष्ट्र के प्रति उनके योगदान को जन-जन तक पहुंचाया जा सके और युवा वर्ग लोकतंत्र की महत्ता को समझ सके।