गोरखा दशैं-दीपावली महोत्सव में सांस्कृतिक संध्या ने बांधा समां: भारत-नेपाल संबंधों की अनकही कहानी

वीर गोरखा कल्याण समिति का आयोजन: सांस्कृतिक धरोहर का जीवंत प्रदर्शन

देहरादून, 2 नवंबर 2025: उत्तराखंड के गढ़ी कैंट स्थित महेंद्र ग्राउंड में वीर गोरखा कल्याण समिति द्वारा आयोजित गोरखा दशैं-दीपावली महोत्सव एवं राज्य स्तर का मेला-2025 का दूसरा दिन शनिवार को सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की धूम से गूंज उठा। यह तीन दिवसीय उत्सव (31 अक्टूबर से 2 नवंबर तक) ने न केवल गोरखा समुदाय की समृद्ध परंपराओं को उजागर किया बल्कि भारत और नेपाल के बीच बेटी-रोटी के ऐतिहासिक संबंधों को भी जीवंत कर दिया। समिति के अध्यक्ष कमल थापा ने कहा कि यह महोत्सव सांस्कृतिक एकता का प्रतीक है और दोनों देशों की साझा विरासत को संरक्षित करने का माध्यम है। मेला स्थल पर हजारों लोग उमड़ पड़े, जहां पारंपरिक व्यंजनों, स्टॉलों और सांस्कृतिक प्रदर्शनियों ने माहौल को उत्साहपूर्ण बना दिया।

सांस्कृतिक संध्या का भव्य आगाज: बाल कलाकारों ने बांधा जादू

गुरु वंदना और कत्थक नृत्य से शुरुआत

सांस्कृतिक संध्या की शुरुआत बाल कलाकारों की मनमोहक गुरु वंदना और कत्थक नृत्य से हुई, जिसने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। नन्हे कलाकारों की नृत्य मुद्राओं ने न केवल पारंपरिक कला की झलक दिखाई बल्कि युवा पीढ़ी की सृजनशीलता को भी रेखांकित किया। इसके बाद सिंधुली महिला कलाकारों की आराधना प्रस्तुति ने मंच को रोशन कर दिया। ढोल-दमाऊ, ढोलक, थाली जैसे पारंपरिक वाद्यों के साथ उनके ऊर्जावान नृत्य ने दर्शकों का दिल जीत लिया। यह प्रदर्शन गोरखा संस्कृति की जीवंतता का प्रतीक बना।

भावुक प्रस्तुतियां: गोरखाली गीतों ने छुआ दिल

खुखरी डांस और कौड़ा डांस का जलवा

संध्या की मुख्य आकर्षण गोरखाली पुरुष कलाकारों का खुखरी डांस था, जिसमें उन्होंने अपनी सैन्य परंपरा और शौर्य का जोरदार प्रदर्शन किया। यह नृत्य देशभक्ति की भावना से ओतप्रोत था। इसके साथ वीर गोरखा कल्याण समिति की ओर से कौड़ा डांस प्रस्तुत किया गया, जिसमें अनुष्का, निशा सहित कलाकारों ने अपनी कुशलता दिखाई। दर्शकों में गोरखा समुदाय की पारंपरिक वेशभूषा, आकर्षक परिधान और ऊर्जावान प्रस्तुतियों ने उत्साह का संचार किया।

नेपाली बैंड और तमांग सेलो का जादू

स्पोनार्ड लाइव नेपाली बैंड सोनाली राय ने ‘माया बैनी’ जैसे गीतों की प्रस्तुति दी, जो प्रसिद्ध कलाकार जुबिन दाई को समर्पित था। इस धुन ने माहौल को और रोमांचक बना दिया। सागरिका देवां और उनके ग्रुप ने तमांग सेलो ‘नाचो नाचो लगाउ’ गाकर दर्शकों को नाचने पर मजबूर कर दिया। इन गीतों ने सांस्कृतिक एकता का संदेश दिया।

मेला का आकर्षण: व्यंजन, स्टॉल और सामाजिक संदेश

पारंपरिक भोजन और लोक कलाओं का मेल

महेंद्र ग्राउंड पर लगा यह मेला पारंपरिक व्यंजनों, मनोरंजन खेलों और झूलों से सजा था। गढ़वाली, कुमाऊनी, जौनसारी और नेपाली व्यंजनों तथा परिधानों से लोग परिचित हो रहे थे। कलाकारों ने कॉमेडी प्रस्तुत कर हंसी का पिटारा खोला, जबकि गोरखाली भाषा में नाटक-गीतों ने समाज की कुरीतियों का विरोध किया और सद्गुणों को अपनाने का संदेश दिया।

कमल थापा: बेटी-रोटी संबंधों का संरक्षण

भारत-नेपाल की सांस्कृतिक एकता

वीर गोरखा कल्याण समिति के अध्यक्ष कमल थापा ने कहा कि भारत और नेपाल के बीच बेटी-रोटी का गहरा संबंध है। यह महोत्सव उसी को मजबूत करता है और संस्कृति को बचाने का संघर्ष है। उन्होंने सभी से अपील की कि रविवार रात समापन में अधिक से अधिक लोग शामिल हों।

सम्मान समारोह: वीर गोरखा एचीवर अवॉर्ड

पर्वतारोही कैप्टन प्रवीन थापा और ओलंपस स्कूल चेयरमैन व फिल्म निर्देशक कुणाल शमशेर मल्ला को वीर गोरखा एचीवर अवॉर्ड से सम्मानित किया गया।

आयोजन में उपस्थित प्रमुख व्यक्ति

समिति के वरिष्ठ उपाध्यक्ष उर्मिला तमांग, उपाध्यक्ष सूर्य बिक्रम शाही, महासचिव विशाल थापा, कोषाध्यक्ष टेकु थापा, सचिव देविन शाही, सह-सचिव आशु थापा, सांस्कृतिक सचिव देव कला दिवान, सह-सांस्कृतिक सचिव करमिता थापा, संगठन मंत्री लोकेश बन, सोनु गुरुंग, सदस्य पूरन बहादुर थापा, यामु राना, सोना शाही, ज्योति राना, बबिता गुरुंग, एनबी थापा, बुद्धेश राय, मीन गुरुंग मौजूद रहे। पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने सांस्कृतिक संध्या का शुभारंभ किया।

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