देहरादून, 04 अक्टूबर 2025, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को देहरादून जू में वन्य जीव प्राणी सप्ताह का भव्य शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने घोषणा की कि वन्य जीवों के हमले में होने वाली जनहानि के लिए दी जाने वाली सहायता राशि को बढ़ाकर 10 लाख रुपये किया जाएगा। यह कदम राज्य में मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने और प्रभावित परिवारों को राहत प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। मुख्यमंत्री ने वन्य जीवों को सनातन संस्कृति का अभिन्न अंग बताते हुए उनके संरक्षण और पर्यावरण संतुलन के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। कार्यक्रम में वन मंत्री सुबोध उनियाल, कृषि मंत्री गणेश जोशी सहित कई गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया।
वन्य जीवों का सांस्कृतिक महत्व: सह-अस्तित्व का संदेश
मुख्यमंत्री धामी ने अपने संबोधन में कहा कि वन्य जीव हमारी आस्था, संस्कृति और परंपराओं का अभिन्न हिस्सा हैं। उन्होंने देवी-देवताओं के साथ वन्य जीवों के संबंधों का उल्लेख करते हुए बताया कि मां दुर्गा का वाहन शेर, गणेश जी का मूषक, मां सरस्वती का हंस, भगवान कार्तिकेय का मोर, लक्ष्मी जी का उल्लू, और महादेव के कंठ पर नागराज व नंदी की मौजूदगी मानव और जीव-जगत के बीच एकता का प्रतीक है। “आदिकाल से वन्य जीवों का संरक्षण भारत की जीवन पद्धति का स्वाभाविक हिस्सा रहा है,” धामी ने कहा। उन्होंने जोर देकर बताया कि यह परंपरा आज भी प्रासंगिक है और इसे आगे बढ़ाने की आवश्यकता है।
पर्यावरणीय प्रतिबद्धता: उत्तराखंड का अनूठा योगदान
मुख्यमंत्री ने राज्य की पर्यावरण संरक्षण में अग्रणी भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड की लगभग 14.77 प्रतिशत भूमि 6 राष्ट्रीय उद्यानों, 7 वन्यजीव विहारों और 4 संरक्षण आरक्षित क्षेत्रों के रूप में संरक्षित है, जो देश के औसत 5.27 प्रतिशत से कहीं अधिक है। “यह अंतर हमारे राज्य की पर्यावरणीय प्रतिबद्धता को दर्शाता है,” धामी ने कहा। उन्होंने बताया कि यह हरियाली और स्वच्छंद विचरण करने वाले वन्य जीव देश-विदेश से आने वाले लाखों पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। सरकार पर्यटकों की सुविधाओं के साथ-साथ प्राकृतिक स्वरूप को अक्षुण्ण रखने और वन्य जीवों की सुरक्षा के लिए कटिबद्ध है।
इको-टूरिज्म और प्राकृतिक संरक्षण: संतुलन का प्रयास
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से राज्य सरकार इकोनॉमी, इकोलॉजी और टेक्नोलॉजी के बीच संतुलन स्थापित करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने वन विभाग को निर्देश दिया कि हर जिले में कम से कम एक नए पर्यटन स्थल की पहचान की जाए और उसे विकसित किया जाए, बिना प्राकृतिक स्वरूप को नुकसान पहुंचाए। “प्रदेश में नए इको-टूरिज्म मॉडल पर काम चल रहा है, ताकि लोग जंगलों से जुड़ें, लेकिन प्रकृति को हानि न हो,” धामी ने कहा। यह पहल पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देने का संदेश देती है।
मानव-वन्यजीव संघर्ष: आधुनिक तकनीक और आजीविका के अवसर
धामी ने स्वीकार किया कि राज्य में बाघ, गुलदार, हाथी और हिम तेंदुए जैसे दुर्लभ वन्य प्राणियों की संख्या में वृद्धि हुई है, लेकिन इसके साथ मानव-वन्यजीव संघर्ष की चुनौतियां भी बढ़ी हैं। सरकार इन चुनौतियों से निपटने के लिए आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक उपायों का उपयोग कर रही है। वन विभाग को ड्रोन और जीपीएस जैसी तकनीकी सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं, ताकि वन्यजीवों की निगरानी और सुरक्षा बेहतर हो सके। इसके अलावा, स्थानीय लोगों के लिए आजीविका के नए अवसर पैदा किए जा रहे हैं, ताकि वे जंगलों की रक्षा और वन्यजीवों की सुरक्षा में भागीदार बनें।
युवा और शिक्षा: इको-प्रिन्योरशिप और इको क्लब की पहल
मुख्यमंत्री ने ‘सीएम यंग ईको-प्रिन्योर’ योजना की प्रगति पर प्रकाश डाला, जिसमें एक लाख युवाओं को शामिल करने का लक्ष्य रखा गया था। इस योजना के तहत नेचर गाइड, ड्रोन पाइलट, वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर, और ईकोटूरिज्म से जुड़े कौशल को उद्यम में बदलने का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसके साथ ही, प्रदेश के प्रत्येक जिले में छात्रों के लिए इको क्लब के माध्यम से वन्यजीवों से संबंधित शैक्षिक यात्राएं आयोजित की जा रही हैं। धामी ने कहा कि यह पहल युवाओं को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
पर्यटकों के लिए अपील: स्वच्छता और जागरूकता का आह्वान
मुख्यमंत्री ने पीएम मोदी के ‘लाइफ स्टाइल फॉर एनवायरनमेंट’ के आह्वान का उल्लेख करते हुए इसे धरती मां को बचाने का मंत्र बताया। उन्होंने उत्तराखंड आने वाले पर्यटकों से अपील की कि जंगल सफारी या धार्मिक पर्यटन स्थलों पर गंदगी न फैलाएं। “प्रकृति की रक्षा हम सबकी जिम्मेदारी है,” धामी ने जोर देकर कहा, जो पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने का संदेश देता है।
वरिष्ठ नेताओं का समर्थन: सामूहिक प्रयास की बात
वन मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि वन और वन्य जीवों को बचाना सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने इकोनॉमी, इकोलॉजी और टेक्नोलॉजी के समन्वय को प्रदेश के विकास का आधार बताया। कार्यक्रम में कृषि मंत्री गणेश जोशी, राज्य सभा सांसद नरेश बसंल, प्रमुख सचिव आरके सुधांशु, प्रमुख मुख्य वन संरक्षक समीर सिन्हा, और प्रमुख वन संरक्षक वन्यजीव रंजन कुमार मिश्रा सहित कई अधिकारी मौजूद रहे।
पर्यावरण और विकास का सामंजस्य
मुख्यमंत्री धामी के इस शुभारंभ ने वन्य जीव संरक्षण और पर्यावरण संतुलन के प्रति सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति को दर्शाया। सहायता राशि में वृद्धि, तकनीकी उपयोग, और युवाओं की भागीदारी से यह स्पष्ट है कि उत्तराखंड न केवल पर्यटन के क्षेत्र में अग्रणी बनना चाहता है, बल्कि प्रकृति के संरक्षक के रूप में भी अपनी पहचान मजबूत करना चाहता है।