हरेला: प्रकृति और संस्कृति का उत्सव
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हरेला पर्व की बधाई देते हुए इसे प्रकृति, परंपरा और पर्यावरण के प्रति समर्पण का पर्व बताया। उन्होंने कहा कि यह पर्व सुख, समृद्धि और सौहार्द का प्रतीक है, जो हमें हमारी सांस्कृतिक जड़ों और प्रकृति से जोड़ता है।
“धरती मां का ऋण चुकाओ” थीम पर पौधरोपण
इस वर्ष हरेला पर्व पर “धरती मां का ऋण चुकाओ, एक पेड़–मां के नाम” थीम पर विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत 11 जुलाई को पूरे प्रदेश में एक ही दिन में पांच लाख से अधिक पौधे रोपे जाएंगे:
- गढ़वाल मंडल: 3 लाख पौधे
- कुमाऊं मंडल: 2 लाख पौधे
पौधरोपण अभियान के केंद्र बिंदु
मुख्यमंत्री ने बताया कि पौधरोपण अभियान को वृहद स्तर पर लागू किया जाएगा। पौधे निम्न स्थानों पर लगाए जाएंगे:
- सार्वजनिक स्थल
- वन क्षेत्र
- नदियों, गाड, गदेरों के किनारे
- स्कूल और कॉलेज परिसरों
- विभागीय कार्यालय
- सिटी पार्क और आवासीय क्षेत्र
जनसहभागिता से मिलेगा अभियान को बल
इस अभियान में जनप्रतिनिधि, छात्र, विभागीय कर्मी, एनसीसी, एनएसएस, और सामान्य नागरिकों की सहभागिता अनिवार्य रूप से सुनिश्चित की जाएगी। मुख्यमंत्री ने सामाजिक संगठनों और संस्थाओं से भी इस अभियान में जुड़ने की अपील की है।
धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यावरणीय विरासत की रक्षा जरूरी: मुख्यमंत्री
सीएम धामी ने कहा कि उत्तराखंड की संस्कृति, अध्यात्म और प्राकृतिक विविधता राज्य की विशेष पहचान हैं। ऐसे में जलस्रोतों, नदियों और पारंपरिक प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की जिम्मेदारी सभी नागरिकों की है।
लोक पर्व हमारी सांस्कृतिक पहचान हैं
मुख्यमंत्री ने लोक पर्वों को हमारी सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि जब तक हम इन पर्वों को सहेज कर अगली पीढ़ी को नहीं सौंपेंगे, तब तक हमारी लोक संस्कृति जीवित नहीं रह सकती।
मुख्यमंत्री खुद करेंगे पौधरोपण
हरेला पर्व के मुख्य अवसर पर मुख्यमंत्री आरतोला, जागेश्वर में आयोजित विशाल वृक्षारोपण कार्यक्रम में शामिल होकर प्रदेशवासियों को स्वयं प्रेरणा देंगे।
हरेला केवल एक पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति से जुड़ाव और जिम्मेदारी का अहसास है। मुख्यमंत्री की पहल “एक पेड़–मां के नाम” इस पर्व को सांस्कृतिक और पर्यावरणीय चेतना का जीवंत उदाहरण बना रही है