चार धाम यात्रा का समापन: केदारनाथ के कपाट 23 अक्टूबर, बदरीनाथ के 25 नवंबर को शीतकाल के लिए बंद

बद्रीनाथ/केदारनाथ, 3 अक्टूबर 2025 उत्तराखंड के विश्व विख्यात चार धामों में से दो प्रमुख तीर्थस्थलों—केदारनाथ और बद्रीनाथ—के कपाट शीतकाल के लिए क्रमशः 23 अक्टूबर और 25 नवंबर को बंद हो जाएंगे। विजयादशमी के पावन अवसर पर श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) ने इन तिथियों की आधिकारिक घोषणा की। केदारनाथ धाम के कपाट भैया दूज के दिन सुबह 8:30 बजे बंद होंगे, जबकि बद्रीनाथ के कपाट दोपहर 2:56 बजे पर शीतकाल के लिए बंद होंगे। इस वर्ष मानसून की आपदाओं के बावजूद 30 लाख से अधिक तीर्थयात्रियों ने दर्शन किए हैं, जो राज्य सरकार की कुशल व्यवस्था और भक्तों की आस्था का प्रतीक है। बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने तीर्थयात्रियों से अपील की कि शेष समय में दर्शन का लाभ उठाएं और स्वच्छता पखवाड़े में सहयोग करें।

विजयादशमी पर तिथि घोषणा: पंचांग गणना और धार्मिक समारोह में रावल ने किया ऐलान

विजयादशमी के शुभ मुहूर्त में बद्रीनाथ मंदिर परिसर में आयोजित भव्य धार्मिक समारोह के दौरान कपाट बंद की तिथियां निर्धारित की गईं। रावल अमरनाथ नंबूदरी ने हक-हकूकधारियों, तीर्थ पुरोहितों और समिति सदस्यों की उपस्थिति में घोषणा की। इससे पहले, धर्माधिकारी राधाकृष्ण थपलियाल और वेदपाठी रविंद्र भट्ट, अमित बंदोलिया ने पंचांग गणना के आधार पर तिथि का निर्धारण किया।

बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने समारोह में हक-हकूकधारियों को पगड़ी भेंट की। भंडारी थोक से मनीष भंडारी, मेहता थोक से महेंद्र सिंह मेहता और दिनेश भट्ट, कमदी थोक से कुलभूषण पंवार को सम्मानित किया गया। द्विवेदी ने कहा, “आपदा के बावजूद 14 लाख से अधिक भक्तों ने बद्रीनाथ और 16 लाख से अधिक ने केदारनाथ के दर्शन किए। यह आस्था और सरकार की मेहनत का परिणाम है।” उन्होंने तीर्थयात्रियों से शेष समय में दर्शन के लिए प्रोत्साहित किया।

केदारनाथ धाम का समापन: 23 अक्टूबर को भैया दूज पर कपाट बंद, पंचमुखी डोली का प्रस्थान

द्वादश ज्योतिर्लिंगों में 11वें स्थान पर विराजमान केदारनाथ धाम के कपाट गुरुवार, 23 अक्टूबर को सुबह 8:30 बजे शीतकाल के लिए बंद होंगे। बंद होने के तुरंत बाद बाबा केदार की पंचमुखी उत्सव डोली प्रस्थान करेगी। डोली का पहला पड़ाव रामपुर होगा।

बीकेटीसी के अनुसार, डोली 24 अक्टूबर को रामपुर से गुप्तकाशी पहुंचेगी और 25 अक्टूबर को शीतकालीन गद्दीस्थल ऊखीमठ के ओंकारेश्वर मंदिर में विराजमान होगी। इस वर्ष केदारनाथ यात्रा में 16 लाख 24 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने दर्शन किए, जो आपदा के बावजूद एक उपलब्धि है। समिति ने यात्रियों से मौसम की मार झेलते हुए भी शेष अवधि में दर्शन का लाभ उठाने की अपील की।

बद्रीनाथ धाम का समापन: 25 नवंबर को 2:56 बजे कपाट बंद, पंच पूजाओं का विस्तृत कार्यक्रम

भगवान विष्णु के धाम बद्रीनाथ के कपाट मंगलवार, 25 नवंबर को दोपहर 2:56 बजे शीतकाल के लिए बंद होंगे। बंद होने से पहले 21 नवंबर से पंच पूजाएं प्रारंभ होंगी। पहला चरण 21 नवंबर को भगवान गणेश की पूजा से शुरू होगा, शाम को उनके कपाट बंद होंगे।

22 नवंबर को आदि केदारेश्वर और शंकराचार्य मंदिर के कपाट बंद होंगे। 23 नवंबर को खड़ग, दृ पुस्तक पूजन और वेद ऋचाओं का वाचन समाप्त होगा। 24 नवंबर को मां लक्ष्मी को कढ़ाई भोग चढ़ाया जाएगा। 25 नवंबर को मुख्य कपाट बंद होने के बाद 26 नवंबर को कुबेर जी, उद्धव जी, रावल और आदि गुरु शंकराचार्य की गद्दी पांडुकेश्वर और जोशीमठ के नृसिंह मंदिर के लिए रवाना होगी। पूजाएं रावल अमरनाथ नंबूदरी, धर्माधिकारी राधाकृष्ण थपलियाल और वेदपाठी रविंद्र भट्ट संपन्न करेंगे।

इस वर्ष बद्रीनाथ में 14 लाख 20 हजार से अधिक भक्तों ने दर्शन किए, जो कुल मिलाकर दोनों धामों में 30 लाख 22 हजार 777 यात्रियों का आंकड़ा है।

चार धाम यात्रा का समग्र परिदृश्य: यमुनोत्री-गंगोत्री पहले बंद, पंच केदारों का क्रम

चार धाम यात्रा का समापन क्रमिक रूप से हो रहा है। गंगोत्री धाम के कपाट 22 अक्टूबर को अन्नकूट गोवर्धन पूजा के अभिजीत मुहूर्त में बंद होंगे। यमुनोत्री धाम भी 23 अक्टूबर को भैया दूज पर बंद होगा। पंच केदारों में तुंगनाथ (तृतीय केदार) के कपाट 6 नवंबर को, जबकि मद्महेश्वर (द्वितीय केदार) के कपाट 18 नवंबर को शीतकाल के लिए बंद होंगे।

बीकेटीसी उपाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती, विजय कप्तवाण, मुख्य कार्याधिकारी विजय प्रसाद थपलियाल और केदारनाथ प्रभारी यदुवीर पुष्पवान ने यात्रा की सफलता पर बधाई दी। उन्होंने कहा, “यात्रा निरंतर गतिमान है, भक्तों से शेष अवधि में दर्शन का आग्रह है।”

यात्रा की सफलता और अपील: आपदा के बावजूद 30 लाख दर्शन, स्वच्छता पखवाड़े में सहयोग

मानसून की भयंकर आपदाओं के बावजूद चार धाम यात्रा सफल रही। द्विवेदी ने कहा, “यह गर्व का विषय है कि 30 लाख से अधिक भक्तों ने दर्शन किए।” उन्होंने आरएसएस के शताब्दी वर्ष, महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री की जयंती तथा स्वच्छ भारत मिशन के स्वच्छता पखवाड़े का उल्लेख किया। पीएम नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और सीएम पुष्कर सिंह धामी के निर्देशन में चल रही यह पहल तीर्थयात्रियों से अपील करती है कि वे स्वच्छता में योगदान दें।

समारोह में बीकेटीसी सदस्य महेंद्र शर्मा, प्रह्लाद पुष्पवान, देवीप्रसाद देवली, धीरज मोनू पंचभैया, राजेंद्र प्रसाद डिमरी, नीलम पुरी, पूर्व सदस्य भास्कर डिमरी, बद्रीनाथ प्रभारी विपिन तिवारी, मंदिर अधिकारी राजेंद्र चौहान, प्रशासनिक अधिकारी कुलदीप भट्ट, मीडिया प्रभारी डॉ. हरीश गौड़, सुधाकर बाबुलकर सहित अधिकारी, कर्मचारी, तीर्थ पुरोहित, हक-हकूकधारी और श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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