कुट्टू के आटे की शेल्फ लाइफ दो महीनों से ज्यादा नहीं होती: स्पेक्स

मुख्य बिंदु:

  • व्रत में उपयोगी कुट्टू का आटा पोषक तत्वों से भरपूर
  • दो महीने से ज्यादा नहीं होती इसकी शेल्फ लाइफ
  • गलत स्टोरेज व मिलावट से हो सकता है फूड पॉइजनिंग
  • रसायनों व परिरक्षकों के दुष्प्रभाव भी सामने आए

कुट्टू का आटा: पौष्टिक लेकिन सीमित समय तक सुरक्षित

देहरादून, आजखबर। कुट्टू का आटा (Buckwheat Flour) जिसे व्रतों के दौरान विशेष रूप से खाया जाता है, तकनीकी रूप से कोई अनाज नहीं है, बल्कि यह बकव्हीट पौधे के बीजों से तैयार किया जाता है। इसमें प्रोटीन, मैग्नीशियम, आयरन, कैल्शियम, विटामिन-B और एंटीऑक्सीडेंट्स भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो हृदय, लिवर, पाचन और हड्डियों की सेहत के लिए लाभकारी होते हैं।


शेल्फ लाइफ और खराब होने के कारण

खाद्य विशेषज्ञों के अनुसार, कुट्टू के आटे की शेल्फ लाइफ बेहद सीमित—लगभग 1 से 1.5 महीने तक—होती है। इसमें मौजूद प्राकृतिक तेल जल्दी ऑक्सीडाइज हो जाते हैं जिससे यह जल्दी खराब हो सकता है। नमी, गर्मी और गलत स्टोरेज इसकी गुणवत्ता को और तेजी से बिगाड़ते हैं।
खराब आटे की पहचान:

  • अजीब गंध
  • रंग में बदलाव (ग्रे/हल्का हरा)
  • काले दाने या कीड़ों की उपस्थिति

स्वास्थ्य पर प्रभाव और सेवन में सावधानी

कुट्टू का आटा अधिक मात्रा में सेवन करने से गैस, सूजन, एसिडिटी, और एलर्जी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसमें फॉस्फोरस की उच्च मात्रा अधिक मात्रा में ली जाने पर किडनी पर असर डाल सकती है। ब्लड शुगर स्तर पर भी इसका असर पड़ता है, इसलिए सीमित मात्रा में सेवन की सलाह दी जाती है।


रसायनों और परिरक्षकों का उपयोग

शेल्फ लाइफ बढ़ाने के लिए कुछ उत्पादकों द्वारा बेंज़ोइल पेरोक्साइड, कैल्शियम प्रोपियोनेट और सोडियम बेंजोएट जैसे रसायनों का उपयोग किया जाता है। हालांकि ये आटा को लंबे समय तक सुरक्षित रखने में मदद करते हैं, लेकिन इनके दुष्प्रभाव गंभीर हो सकते हैं:

  • बेंज़ोइल पेरोक्साइड: मुँहासे के इलाज में भी इस्तेमाल, लेकिन अत्यधिक सेवन से यकृत क्षति संभव
  • कैल्शियम प्रोपियोनेट: ब्रेड और केक में आम, लेकिन माइग्रेन, इंसुलिन प्रतिरोध संभव
  • सोडियम बेंजोएट: खाद्य व कॉस्मेटिक में उपयोगी, लेकिन अस्थमा, पेट दर्द, एलर्जी की आशंका

मिलावट और सावधानियाँ

कुट्टू के आटे में मक्का, चावल, गेहूं का आटा, सफेद लकड़ी का बुरादा, सबमरमर पाउडर जैसी चीजों की मिलावट की जा सकती है, जो सेहत के लिए बेहद खतरनाक हैं।
शुद्धता की पहचान:

  • रंग व गंध से जांचें
  • पानी या तेल में मिलाकर परखें
  • प्रमाणित ब्रांड (ऑर्गेनिक, ग्लूटेन-फ्री, नॉन-GMO) को चुनें

पोषण तथ्य (100 ग्राम में):

  • कैलोरी: 343
  • प्रोटीन: 13.3 ग्राम
  • कार्बोहाइड्रेट: 71.5 ग्राम
  • फाइबर: 10 ग्राम
  • फैट: 3.4 ग्राम
  • शुगर: 0 ग्राम

कुट्टू का आटा एक स्वास्थ्यवर्धक विकल्प है, खासकर व्रत या ग्लूटेन फ्री डाइट के लिए, लेकिन इसकी सीमित शेल्फ लाइफ, मिलावट की संभावना और गलत तरीके से उपयोग से होने वाले दुष्प्रभावों को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। इसके सुरक्षित उपयोग के लिए सतर्कता और जागरूकता अत्यंत आवश्यक है

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